ग्राहकों को नहीं छोड़ेगी अरहर की महंगाई, सब्जियों के साथ दालों ने भी मारी छलांग

ग्राहकों को नहीं छोड़ेगी अरहर की महंगाई, सब्जियों के साथ दालों ने भी मारी छलांग

देश में खाद्यान्न की कीमतों में बढ़ोतरी एक गंभीर का चिंता का विषय बनी हुई है, हालांकि इसपर नियंत्रण करने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने जैसे कई कदम उठाए गए पर इसके बावजूद अनाज और सब्जियों की कीमतें कम नहीं हो रही हैं.

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ग्राहकों को नहीं छोड़ेगी अरहर की महंगाई, सब्जियों के साथ दालों ने भी मारी छलांगPulses Price hike

इस साल महंगाई के कारण टमाटर और प्याज सुर्खियों में रहा. पर साल के आखिर में आते ही लहसुन ने भी महंगाई के मामले में बढ़त बना ली है. क्योंकि इस महीने खुदरा बाजार में लहसुन 300-400 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक रहा है. इससे पहले प्याज की कीमते खुदरा बाजार में 100 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई थी. इसके अलावा अरहर दाल की कीमतें भी आसमान छू रही है. अरहर के कीमत की बात करें तो पिछले एक साल में इसकी कीमतों में 40 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है. देश के कई प्रमुख राज्यों में अरहर दाल प्रमुख है. उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के अनुसार, चना दाल के कीमतों में  भी आग लगी है. इसी अवधि में इसकी कीमतें कम से कम 10 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ी हैं. 

देश में खाद्यान्न की कीमतों में बढ़ोतरी एक गंभीर का चिंता का विषय बनी हुई है, हालांकि इसपर नियंत्रण करने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने जैसे कई कदम उठाए गए पर इसके बावजूद अनाज और सब्जियों की कीमतें कम नहीं हो रही हैं. महंगाई के लेकर जारी किए गए नए आंकड़ों से पता चलता है कि नवंबर में, सब्जियों, फलों, दालों और चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण उपभोक्ता कीमतों में 5.55 प्रतिशत का उछाल आया है. वहीं अक्टूबर महीने में सीपीआई मुद्रास्फीति 4.87 प्रतिशत थी. 

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नवंबर में भी जारी है महंगाई

इस प्रकार सीपीआई मुद्रास्फीति नवंबर में तीन महीने के उच्चतम स्तर पर थी, जो पिछले तीन महीनों के दौरान आ रही गिरावट को से अलग थी. इस दौरान भले की ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं हुई पर नवंबर में उपभोक्ता खाद्य मूल्य मुद्रास्फीति 8.7 प्रतिशत रहा जो अक्टूबर में 6.61 प्रतिशत था.  सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) के आंकड़ों से पता चलता है कि नवंबर में फैक्ट्री गतिविधि में तेजी आई है. पर लगातार बढ़ रही महंगाई के लिए  बढ़ती जीडीपी का लाभ सभी तक नहीं पहुंच पाता है, क्योंकि महंगाई के कारण उपभोक्ताओं क्रय शक्ति कम हो रही है.  नवंबर में न केवल सीपीआई मुद्रास्फीति चिंताजनक बिंदु पर थी, बल्कि ग्रामीण बाजारों में भी अपने शहरी बाजारों की तरह महंगाई अधिक देखी गई.

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रेटिंग एजेंसी केयर की चेतावनी

रेटिंग एजेंसी केयर रेटिंग्स ने चेतावनी दी है कि अनाज और दालों जैसी कुछ खाद्यान्न की लगातार बढ़ रही कीमतों के कारण संभावित सामान्यीकरण का खतरा पैदा हो गया है. इसके कारण लोन की दरों में भारतीय रिजर्व बैंक ने कोई कटौती अभी तक नहीं की है. केंद्रीय बैंक पहले ही कह चुका है कि मुद्रास्फीति को कम करना उसकी प्राथमिकता है और इसके लिए होम लोन, कार लोन और एजुकेशन लोन की ईएमआई में कोई भी कटौती करना फिलहाल दूर का सपना लगता है. तक एक दूर का सपना प्रतीत होता है .

 

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