किसान को मिला 15 करोड़ का टैक्स नोटिस (AI Image)उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में एक किसान के साथ कथित आईडेंटिटी फ्रॉड का मामला सामने आया है. वजीरगंज क्षेत्र के खुर्रमपुर भामोरी गांव निवासी किसान भोला सिंह को अचानक 14.65 करोड़ (लगभग 15 करोड़) रुपये के टैक्स नोटिस मिले हैं, जिन्हें देखकर वह आवाक रह गए. इस मामले की अब पूरे इलाके में चर्चा हो रही है. किसान भोला सिंह ने कहा कि उनके नाम और पहचान दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर दिल्ली में एक फर्जी फर्म संचालित की गई. जानकारी के अनुसार, ‘राम स्टोर’ नाम की यह फर्म नारायणा इंडस्ट्रियल एरिया में चलाई जा रही थी. इस फर्म पर भारी टैक्स बकाया बताया गया है.
भोला सिंह ने बताया कि उन्हें आयकर विभाग की ओर से 1.02 करोड़ रुपये जमा करने का नोटिस मिला है. इसके अलावा जीएसटी विभाग ने 13.63 करोड़ रुपये की देनदारी बताई है. दोनों को मिलाकर कुल राशि 14.66 करोड़ रुपये हो जाती है. किसान ने कहा है कि उन्होंने कभी कोई व्यापार नहीं किया और न ही वह दिल्ली गए हैं. ऐसे में यह पूरा मामला उनके लिए समझ से बाहर है.
मामले की गंभीरता को देखते हुए किसान की लिखित शिकायत पर बदायूं प्रशासन भी एक्शन में आ गया है. जिलाधिकारी अवनीश राय के निर्देश पर अतिरिक्त जिलाधिकारी (वित्त) और डिप्टी कमिश्नर (GST) की एक संयुक्त टीम गठित की गई है, जो पूरे मामले की जांच कर रही है. प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि फर्जी फर्म बनाने में किसान के आधार और पैन कार्ड का इस्तेमाल किया गया है.
जिलाधिकारी अवनीश राय ने कहा, “किसान को आयकर और जीएसटी विभाग की ओर से नोटिस मिला है. उन्होंने इस संबंध में लिखित शिकायत दी है. मामले की जांच के लिए अतिरिक्त जिलाधिकारी (वित्त) और डिप्टी कमिश्नर (GST) की दो सदस्यीय टीम गठित की गई है. प्रथम दृष्टया यह मामला धोखाधड़ी और जालसाजी का प्रतीत होता है. जांच रिपोर्ट 3-4 दिन में आने की उम्मीद है, जिसके बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.”
किसान ने बताया कि उन्होंने साइबर क्राइम और स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई. इससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है. उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.किसान भोला सिंह ने कहा कि भले ही वे अपनी पूरी संपत्ति बेच दें तो भी इतनी बड़ी रकम चुकाना उनके लिए असंभव है. ऐसे में अब उनकी उम्मीद प्रशासनिक जांच और न्यायिक कार्रवाई पर टिकी हुई है. (पीटीआई)
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