crop loss due to unseasonal rain
मिचौंग चक्रवात के कारण हुई बारिश के चलते ओडिशा के कई जिलों में फसलों को काफी नुकसान हुआ है. खास कर ओडिशा को कोरापुट जिले के किसानों को फसलों को काफी क्षति पहुंची है. फसलों को हुए नुकसान को देखते हुए ओडिशा कृषि विभाग की तरफ से किसानों को मुआवजा देने की पहल की जा रही है. इसके तहत किसानों को हुए फसल नुकसान के लिए उनके खेतों का सर्वे भी किया गया है. पर सर्वे के बाद नुकसान के आकलन की जो रिपोर्ट सौंपी गई है उससे किसान नाखुश है. क्योंकि नुकसान का आकलन बेहद ही कम किया गया है जबकि जमीन में नुकसान अधिक हुआ है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कोरापुट जिले में मिचौंग का व्यापक प्रभाव हुआ है. इसके बावजूद जिला प्रशासन को जो नुकसान की रिपोर्ट पी गई है उसमें दर्शाया गया है कि मात्र 187 हेक्टेयर में धान की फसल नष्ट हुई है. इसके कारण किसान काफी नाखुश हैं. किसानों का दावा है कि सभी प्रभावित क्षेत्रों का नुकसान का सर्वेक्षण सभी प्रभावित क्षेत्रों को पर्याप्त रूप से कवर करने में विफल रहा, जिससे महत्वपूर्ण क्षति के बारे में जानकारी नहीं मिल पाई है. उल्लेखनीय है कि चक्रवाती बारिश के कारण तीन दिनों तक लगातार भारी बारिश हुई थी. लगातार बारिश के कारण जेपोर, कोटपाड, कुंद्रा, बोर्रिगुम्मा, नंदपुर, पोट्टांगी और लामातापुट जैसे क्षेत्रों में धान की फसलों को काफी नुकसान हुआ है.
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सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार किसानों ने 2,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में फसल नुकसान की जानकारी दी थी. पर जब नुकसान का आकलन के लिए कर्वे किया गया और रिपोर्ट सौंपी गई तो उसमें दिखाया गया कि सिर्फ 187 हेक्टेयर में ही फसलों को नुकसान हुआ है. जिससे किसानों में असंतोष फैल गया है. कोरापुट कृषक कल्याण मंच के संयोजक नरेंद्र प्रधान ने आरोप लगाया कि कृषि और राजस्व विभागों द्वारा किया गया संयुक्त सर्वेक्षण काफी नहीं था. इसके साथ ही नुकसान की जो रिपोर्ट सौंपी गई है वह वास्तविक नुकसान से काफी कम है.
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उन्होंने आगे बताया कि कोरापुट जिले के कुंद्रा, कोटपाड, जेपोर, बोर्रिगुम्मा, सेमिलिगुडा, नंदपुर और लामतापुट सहित विभिन्न इलाकों में धान की फसल के महत्वपूर्ण हिस्से पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा. इन क्षेत्रों में बारिश के कारण आई नमी के चलते 30 प्रतिशत से अधिक धान की खेती प्रभावित हुई है, लेकिन नुकसान के लिए किए गए सर्वेक्षण में इन जगहों को शामिल नहीं किया गया है. फसल क्षति सूची के पुनर्मूल्यांकन की मांग करते हुए, नरेंद्र प्रधान ने सरकार से आग्रह करते हुए कहा कि जो जमीनी सच्चाई है उसपर विचार करे. साथ ही फसल क्षति की सूची का दोबारा मूल्यांकन किया जाए. उन्होंने कहा नुकसान में धान की खड़ी और कटी हुई फसल को भी शामिल किया जाए.
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