
मुआवजे की मांग को लेकर किसानों का प्रदर्शनबिहार के खगड़िया जिले में किसानों की एक अहम बैठक में कई बड़ी समस्याओं को उठाया गया. किसानों ने बताया कि पिछले कई महीनों से जलजमाव की वजह से उनकी फसलें बर्बाद हो रही हैं और हालात काफी गंभीर बने हुए हैं. किसान विकास मंच की बैठक के दौरान किसान नेता अध्यक्ष धीरेद्र सिंह 'टुडु' ने कहा कि वे लगातार जिला प्रशासन (DM) के संपर्क में हैं और प्रभावित इलाकों का निरीक्षण भी कराया गया है, ताकि जल्द समाधान निकल सके. साथ ही किसानों ने बैठक में कहा कि वो 4 अप्रैल को खगड़िया पहुंचकर शांतिपूर्ण तरीके से जिलाधिकारी को ज्ञापन देंगे और धरना प्रदर्शन करेंगे.
इसके अलावा किसानों ने कहा कि मार्च 2026 के अंत में खगड़िया के मानसी प्रखंड सहित कई इलाकों में तेज आंधी और बारिश के कारण मक्का और गेहूं की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है, जिसके मुआवजे की मांग को लेकर किसानों में भारी असंतोष है. बेमौसम हुई बारिश से मानसी प्रखंड के बलहा, सैदपुर, अमनी और पूर्वी ठाठा पंचायतों में सैकड़ों एकड़ मक्का और गेहूं की फसल बर्बाद हो गई है. जिसको लेकर किसानों सरकार से फसल क्षतिपूर्ति और राहत की मांग की है.

बैठक में बताया गया कि जल निकासी के निर्माण के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है और इस मामले को विधायक के जरिए विधानसभा में भी उठाया गया है. उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इस पर प्रशासनिक मंजूरी मिल सकती है, जिससे जलजमाव की समस्या से राहत मिलेगी. इसके अलावा, किसानों ने गैर-मजूरवा खास जमीन के मुद्दे को भी उठाया. किसानों ने कहा कि गैर मजरुआ जमीन की रसीद कटवाने में भी किसानों को काफी परेशानी हो रही है, जिससे वे अपनी जमीन का सही इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं.
किसान मंच की बैठक के दौरान किसान नेता धीरेद्र सिंह ने बैकात में बनने वाले प्रस्तावित स्टील प्लांट पर भी चिंता जताई. उनका कहना है कि अगर किसानों की जमीन छीन ली गई, तो उनके पास जीने का कोई साधन नहीं बचेगा. उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की कि किसानों को परेशान न किया जाए और बिना जरूरत पुलिस भेजने जैसी कार्रवाई बंद की जाए.
बैठक में यह भी सामने आया कि कुछ इलाकों में गाद (मिट्टी) जमा होने से नहर और जल निकासी सिस्टम पूरी तरह प्रभावित हो गया है. अगर समय रहते इसे साफ नहीं किया गया, तो आने वाले समय में किसानों की हालत और खराब हो सकती है. साथ ही, सभी किसानों से अपील की गई है कि वे 4 अप्रैल तारीख को खगड़िया पहुंचकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाएं, ताकि उनकी समस्याओं का समाधान हो सके.
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