‘पराली सुरक्षा बल’हरियाणा में धान की पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार ने तैयारी तेज कर दी है. इसके लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर ‘पराली सुरक्षा बल’ तैनात किया जाएगा. इसमें पुलिस, कृषि विभाग और प्रशासन के अधिकारी शामिल होंगे. खेतों में आग की निगरानी के लिए ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जाएगा. सरकार का कहना है कि पराली जलाने की घटनाओं पर तुरंत कार्रवाई करने के साथ किसानों को पराली के बेहतर प्रबंधन के विकल्प भी दिए जाएंगे.
अधिकारियों के मुताबिक, कुछ किसान सैटेलाइट की नजर से बचने के लिए शाम या रात में खेतों में पराली जला देते हैं. इसे देखते हुए देर शाम गश्त बढ़ाई जाएगी और खेतों पर नजर रखी जाएगी. ‘पराली सुरक्षा बल’ जिला और ब्लॉक स्तर पर काम करेगा. यह टीम खेतों में आग लगने की घटनाओं की जानकारी जुटाएगी और सत्यापित मामलों में कार्रवाई करेगी. सरकार की योजना के मुताबिक, पराली जलाने का मामला सही पाए जाने पर किसान के खिलाफ FIR दर्ज की जाएगी, चालान काटा जाएगा और जमीन के रिकॉर्ड में ‘रेड एंट्री’ की जाएगी. इसके अलावा पर्यावरण मुआवजा भी वसूला जाएगा.
सरकार किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए आर्थिक मदद भी दे रही है. पराली प्रबंधन मशीनों के सही इस्तेमाल पर किसानों को प्रति एकड़ 1,200 रुपये का प्रोत्साहन दिया जाएगा. इसके अलावा बेलर, रेकर और दूसरी मशीनें जरूरत के हिसाब से अलग-अलग जिलों में उपलब्ध कराई जाएंगी. अधिकारियों को पड़ोसी राज्यों और आसपास के जिलों के बेलर मालिकों के साथ तालमेल करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि किसानों को समय पर मशीनें मिल सकें.
हरियाणा में खेतों की निगरानी के लिए गांव स्तर पर 8,134 नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं. राज्य के करीब 5,600 गांवों में धान की खेती करने वाले 6,21,285 किसान रजिस्टर्ड हैं. ये किसान करीब 34.1 लाख एकड़ जमीन पर धान उगा रहे हैं. अभी तक नोडल अधिकारी करीब 6,04,314 किसानों से संपर्क कर चुके हैं. एक नोडल अधिकारी को सामान्य गांवों में अधिकतम 100 किसानों की जिम्मेदारी दी जा सकती है. वहीं, पराली जलाने वाले हॉटस्पॉट गांवों में यह संख्या 50 किसानों तक रखी गई है.
वहीं, नोडल अधिकारी मोबाइल ऐप के जरिए खेतों में आग लगने की जानकारी दर्ज करेंगे. साथ ही यह भी रिकॉर्ड किया जाएगा कि किसान पराली को खेत में ही इस्तेमाल कर रहे हैं, खेत से बाहर ले जा रहे हैं या चारे के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं. आग की सूचना मिलने के बाद ‘पराली प्रोटेक्शन फोर्स’ के जरिए जल्द कार्रवाई करने की योजना है.
हरियाणा अब पराली जलाने की निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए DRIISHYA के साथ मिलकर ड्रोन तैनात करने की प्रक्रिया चल रही है. जिला प्रशासन पहले ही उन गांवों और जगहों की पहचान करेगा, जहां ड्रोन से निगरानी की जाएगी. इससे खेतों में लगने वाली आग की पहचान करने में मदद मिलेगी.
सरकार पराली को जलाने के बजाय उसका इस्तेमाल बढ़ाने पर भी जोर दे रही है. इसके लिए सरकारी और पंचायत की जमीन पर पराली की गांठों को रखने के लिए जगह चिन्हित की जाएगी. इसके अलावा उन उद्योगों के साथ तालमेल किया जाएगा, जो धान के अवशेषों का इस्तेमाल करते हैं. जिला स्तर पर सप्लाई चेन तैयार करने की योजना है, ताकि पराली की बेलिंग, पेलेटिंग, ब्रिकेटिंग और स्टोरेज की व्यवस्था बेहतर हो सके और किसानों को पराली खरीदने वाले उद्योगों से जोड़ा जा सके.
पराली न जलाने को लेकर सरकार गांवों और स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता अभियान भी चला रही है. गांव और ब्लॉक स्तर पर अब तक 646 कैंप, बैठकें और प्रदर्शन किए गए हैं, जिनमें 23,189 किसान शामिल हुए. वहीं, स्कूल और कॉलेज स्तर पर 370 जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गई हैं, जिनमें 19,232 छात्र शामिल हुए हैं. सरकार का कहना है कि इस पूरी योजना का उद्देश्य पराली जलाने की घटनाओं को रोकना, हवा की क्वालिटी को बेहतर रखना और किसानों को फसल अवशेषों के सही इस्तेमाल के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराना है. (PTI)
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