उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों और खानपान की विविधता को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए 'वन डिस्ट्रिक्ट-वन कुजीन' (ओडीओसी) अभियान को अब तहसील, ब्लॉक और गांव स्तर तक ले जाया जाएगा. अभी तक जिला स्तर पर चिह्नित व्यंजनों के अलावा भी प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे पारंपरिक पकवान हैं, जिन्हें पहचान और बाजार उपलब्ध कराने की जरूरत है. सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक क्षेत्र के खास व्यंजनों को मंच मिले, उन्हें तकनीक और बेहतर पैकेजिंग से जोड़ा जाए तथा वैश्विक बाजार तक पहुंचाया जाए. ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित 'एक जनपद-एक व्यंजन' कार्यक्रम में कहीं.
मुख्यमंत्री ने बुलंदशहर की एक महिला उद्यमी का उदाहरण देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश दिवस पर उन्हें यूपी गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया था. जब उनके पास कोई काम नहीं था तो उन्होंने 500 रुपये उधार लेकर दिल्ली में अचार बनाने का काम शुरू किया. आज वह महिला 'अचार वाली दीदी' के नाम से प्रसिद्ध हैं और बुलंदशहर की करीब 500 महिलाओं को रोजगार दे रही हैं. आगे बढ़ने के लिए इच्छाशक्ति और मेहनत जरूरी है. उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति में काम करने का संकल्प हो तो उसे मंच और अवसर मिल सकते हैं. ओडीओसी ऐसे ही लोगों को आगे बढ़ने का अवसर देगा.
सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश के हर जिले की अपनी अलग खानपान की परंपरा और विशेष स्वाद है. इसे पहचानने और आगे बढ़ाने की जरूरत है. बलिया का बाटी-चोखा, जौनपुर की इमरती और अलग-अलग जिलों के पारंपरिक पकवानों में वैश्विक बाजार में जगह बनाने की अपार संभावनाएं हैं. यदि इन व्यंजनों की गुणवत्ता, शुद्धता और पैकेजिंग पर ध्यान दिया जाए तो ये बड़े ब्रांड बन सकते हैं.
योगी ने 'वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट' (ओडीओपी) योजना की शुरुआत की सोच भी साझा की. उन्होंने वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद उन्हें म्यांमार की यात्रा के दौरान थाईलैंड में रुकने का अवसर मिला. वहां के अधिकारियों से अर्थव्यवस्था की मजबूती के बारे में बातचीत हुई तो उन्होंने भी पारंपरिक खेती के साथ मैन्युफैक्चरिंग को जोड़ने को आर्थिक विकास का आधार बताया. इसके बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों की एक समिति गठित कर प्रदेश के 75 जिलों के पारंपरिक उत्पादों की पहचान करने को कहा.
सर्वे में 58 जिलों में विशिष्ट उत्पादों की जानकारी मिली, तब बाकी जिलों के लिए भी उत्पाद चिह्नित करने की तैयारी की गई. इसके बाद सभी 75 जिलों के लिए एक-एक विशिष्ट उत्पाद तय किया गया. वर्ष 2018 में ओडीओपी योजना शुरू की गई, इसके तहत उत्पादों को तकनीक, बाजार और ब्रांडिंग से जोड़ा गया.
सीएम योगी ने कहा कि आज ओडीओपी के माध्यम से उत्तर प्रदेश करीब दो लाख करोड़ रुपये के उत्पादों का निर्यात कर रहा है. प्रदेश में लगभग 80 उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है. जीआई टैग से उत्पादों की विशिष्ट पहचान और वैश्विक बाजार में उनकी विश्वसनीयता बढ़ती है. इसी सफलता से प्रेरित होकर पिछले तीन-चार वर्षों से ओडीओसी की संभावनाओं पर काम किया जा रहा था. वह जब भी किसी जिले में जाते थे तो वहां के खानपान की अलग विशेषता देखने को मिलती थी. इसके बाद एक टीम को बिना किसी प्रचार के अलग-अलग जिलों के पारंपरिक व्यंजनों की पहचान करने की जिम्मेदारी दी गई.
सीएम ने खाद्य उत्पादों की बाजार क्षमता का उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया की बड़ी खाद्य कंपनियों में शामिल नेस्ले का कारोबार करीब नौ लाख करोड़ रुपये से अधिक है, जो उत्तर प्रदेश सरकार के वार्षिक बजट के बराबर है. जब एक कंपनी खाद्य उत्पादों के जरिए इतना बड़ा कारोबार कर सकती है तो बलिया का बाटी-चोखा और जौनपुर की इमरती भी बड़े ब्रांड क्यों नहीं बन सकते? मुख्यमंत्री ने समारोह में एक छोटी बच्ची का उदाहरण भी दिया, जिसने अपनी मां के हाथों से बनी मूंग दाल की नमकीन का पैकेट उन्हें भेंट किया. बच्ची ने बताया कि उसकी मां घर पर नमकीन बनाती हैं और उसे बेचती भी हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि ऐसे घरेलू उत्पादों को अच्छी पैकेजिंग और ब्रांडिंग से जोड़ दिया जाए तो वे बड़े व्यवसाय का रूप ले सकते हैं.
योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा कि घरों में बनने वाले व्यंजनों की गुणवत्ता का ध्यान रखा जाता है. इसी शुद्धता को व्यावसायिक स्तर पर भी बनाए रखना होगा. भोजन हर व्यक्ति की जरूरत है. कोई व्यक्ति भोजन के बिना नहीं रह सकता. इसलिए खाद्य पदार्थों के व्यवसाय में गुणवत्ता और शुद्धता सबसे महत्वपूर्ण हैं. किसी भी तरह की मिलावट या ऐसा काम नहीं होना चाहिए, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़े. अधिक मुनाफा कमाने के लिए शॉर्टकट अपनाने वालों को इससे बचना होगा.
उन्होंने कहा कि जब उत्पादों की गुणवत्ता अच्छी होगी तो दुनिया खुद उनके पीछे आएगी. काशी में ऐसे कई पारंपरिक हलवाई और दुकानें हैं, जो दिन में केवल एक-दो घंटे खुलती हैं और इसी दौरान उनकी इतनी बिक्री हो जाती है कि उन्हें पूरे दिन दुकान चलाने की जरूरत नहीं पड़ती. यह पारंपरिक व्यंजनों की लोकप्रियता और बाजार की क्षमता को दर्शाता है. मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडीओसी अभियान को गांव स्तर तक पहुंचाया जाएगा. इससे छूटे हुए व्यंजनों और स्थानीय उत्पादों की पहचान हो सकेगी.
प्रयास होगा कि पात्र उत्पादों को जीआई टैग मिले और उन्हें बाजार उपलब्ध कराने के साथ आगे बढ़ने के लिए जरूरी सहयोग भी दिया जाए उत्तर प्रदेश खुद में बहुत बड़ा बाजार है. यहां हर मौसम और हर सीजन के अनुसार खाद्य सामग्री और व्यंजन उपलब्ध हैं. जरूरत केवल उन्हें प्रोत्साहित करने और गुणवत्ता बनाए रखने की है.
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