किसानों के खेत प्यासे, टेक्सटाइल मिल में पहुंच रहा था नहर का पानी! वीडियो वायरल होते ही जागा विभाग

किसानों के खेत प्यासे, टेक्सटाइल मिल में पहुंच रहा था नहर का पानी! वीडियो वायरल होते ही जागा विभाग

सूरत में किसानों के हिस्से के नहर के पानी को लेकर विवाद सामने आया है. आरोप है कि पाइपलाइन के जरिए नहर का पानी सम्राट वेलवेट टेक्सटाइल मिल तक पहुंचाया जा रहा था. इसका वीडियो वायरल होने के बाद सिंचाई विभाग हरकत में आया है और मामले की जांच शुरू की गई है.

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सूरत में किसानों की खेत की जगह मिल में पहुंचा नहर का पानी, वीडियो वायरल होते ही जागा विभागकिसानों के हक के पानी पर डाका

गुजरात के औद्योगिक शहर सूरत में कपड़ा उद्योग से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सिंचाई विभाग की कामकाज और नहरों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. आरोप है कि किसानों को खेती-बाड़ी के लिए उपलब्ध कराया जाने वाला नहर का पानी कुछ कपड़ा मिल मालिक चोरी-छिपे अपने औद्योगिक इस्तेमाल में ले रहे हैं. इसके लिए नहर में पाइपलाइन डालकर पानी सीधे मिल परिसर तक पहुंचाया जा रहा है. हैरानी की बात यह है कि इस तरह की गतिविधियां कथित तौर पर लंबे समय से चल रही हैं, लेकिन इन पर प्रभावी रोक लगाने को लेकर विभागीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं.

नहर से पानी चुराने का वीडियो वायरल

ऐसा ही एक मामला सूरत जिले के कड़ोदरा इलाके से सामने आया है, जहां सम्राट वेलवेट नामक टेक्सटाइल मिल में नहर का पानी चोरी करके इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगा है. जानकारी के मुताबिक, मिल परिसर के पास से गुजरने वाली नहर में पाइप डालकर पानी को मिल के अंदर पहुंचाया जा रहा था. इस पानी का इस्तेमाल कपड़ा मिल की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जा रहा था. इस पूरे मामले पर एक स्थानीय जागरूक नागरिक की नजर पड़ गई. उन्होंने मौके पर पहुंचकर नहर से पाइप के जरिए पानी निकाले जाने का वीडियो अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया. इसके बाद उन्होंने वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया.

पानी चुराने वाले मिल मालिकों पर होगी कार्रवाई

इतना ही नहीं, उन्होंने संबंधित सिंचाई विभाग के अधिकारियों को फोन करके पूरे मामले की जानकारी दी और मौके पर पहुंचकर जांच करने की मांग की. सूचना मिलने के बाद सिंचाई विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे. वहां नहर में पाइप डालकर पानी निकाले जाने के मामले को लेकर जानकारी जुटाई गई और पाइप को मिल से बाहर निकाला गया. अधिकारियों ने संबंधित मिल संचालकों के खिलाफ नहर से पानी चोरी करने के मामले में कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है.

पानी चोरी के मामले में विभाग पर उठ रहा सवाल

वायरल वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि जिस नहर का पानी किसानों की खेती और सिंचाई के लिए सरकार की ओर से उपलब्ध कराया जाता है. उसी पानी को पाइपलाइन के जरिए कथित तौर पर टेक्सटाइल मिल के अंदर पहुंचाया जा रहा था. सवाल यह है कि जब नहरों से पानी की आपूर्ति और उसके इस्तेमाल पर संबंधित विभाग की निगरानी रहती है, तो फिर इस तरह से पाइपलाइन डालकर पानी निकालने की गतिविधियां कैसे संचालित हो रही थीं?

किसानों को हो सकती है सिंचाई की समस्या

दरअसल, सूरत और आसपास के औद्योगिक इलाकों में बड़ी संख्या में कपड़ा मिलें संचालित होती हैं. इन मिलों में उत्पादन प्रक्रिया के दौरान पानी की जरूरत पड़ती है. ऐसे में यदि कोई मिल संचालक किसानों के लिए निर्धारित नहर के पानी का अवैध रूप से इस्तेमाल करता है, तो इसका सीधा असर किसानों के अधिकार और सिंचाई व्यवस्था पर पड़ सकता है. किसानों के हिस्से का पानी इस तरह औद्योगिक गतिविधियों में इस्तेमाल होना गंभीर सवाल खड़े करता है.

सिंचाई विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल सिंचाई विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी उठ रहा है. क्या विभाग के अधिकारियों को इस तरह की गतिविधियों की जानकारी नहीं थी? यदि जानकारी थी तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई? और यदि जानकारी नहीं थी तो नहरों की निगरानी किस तरह की जा रही है? सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद 'आज तक' की टीम ने भी इस मामले को लेकर सिंचाई विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की. सिंचाई विभाग के अधिकारी संजय गरासिया से फोन पर बातचीत की और उनसे पूरे मामले पर आधिकारिक पक्ष जानना चाहा. लेकिन उन्होंने कैमरे के सामने बयान देने से इनकार कर दिया.

उनका कहना था कि इस मामले में उनके फील्ड ऑफिसर ही जानकारी दे पाएंगे. इसके बाद संबंधित फील्ड ऑफिसर प्रेरणा राजपूत से भी संपर्क कर मामले की जानकारी लेने की कोशिश की गई. लेकिन वहां से भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला. फील्ड ऑफिसर ने गोलमोल जवाब देने के बाद फोन काट दिया. ऐसे में विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं मिलने के कारण कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं.

विभाग की ओर से कार्रवाई का आश्वासन

फिलहाल इस मामले में विभाग की ओर से कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है, लेकिन देखना होगा कि सम्राट वेलवेट टेक्सटाइल मिल में नहर से पानी निकालने के आरोपों की जांच के बाद वास्तव में क्या कार्रवाई होती है. साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि विभाग केवल इस एक मामले तक सीमित रहता है या फिर कड़ोदरा और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में नहरों से पानी के अवैध इस्तेमाल की व्यापक जांच भी करवाता है. क्योंकि नहर का पानी किसानों की खेती के लिए है, किसी की निजी औद्योगिक संपत्ति नहीं. ऐसे में सवाल सिर्फ एक टेक्सटाइल मिल का नहीं, बल्कि किसानों के पानी के अधिकार और सिंचाई विभाग की जवाबदेही का भी है. (संजय सिंह जे राठौड़ की रिपोर्ट)

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