ओडिशा के किसानों को सता रहा डर सांकेतिक तस्वीरओडिशा में इस बार धान लगाने से लेकर धान की कटाई तक किसानों के हिस्से सिर्फ परेशानी और चिंता है. पहले भी किसानो की चिंता बारिश थी और आज भी किसानों की चिंता बारिश ही है. इस बार किसान बारिश की भविष्यणावी को लेकर इसलिए चिंतित हैं क्योंकि उनकी फसल खेत में तैयार है. ऐसे में अगर चक्रवाती तूफान के कारण बारिश राज्य में बारिश की संभावना जतायी गई है. इसके कारण फसलों को नुकसान हो सकता है. बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव क्षेत्र के कारण राज्य के कुछ हिस्सों में 17 और 18 नवंबर को भारी बा बारिश की भविष्यवाणी की गई है. वहीं राज्य के पूर्वी जिलों में अपर्याप्त मॉनसूनी बारिश और पश्चिमी जिलों मं कीटों का हमला देखा गया है.
एएनआई से बात करते हुए भारत मौसम विज्ञान विभाग के भुवनेश्वर क्षेत्रीय केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक उमा शंकर दास ने कहा, पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी पर गहरा दबाव 17 नवंबर तक चक्रवाती तूफान में तब्दील हो सकता है. उन्होंने यह भी बताया था कि इस सिस्टम के प्रभाव के कारण ओडिशा के कुछ हिस्सों में भारी से मध्यम बारिश हो सकती है. गौरतलब है कि ओडिशा के गजपति और गंजम जिलों में बारिश की कमी के कारण पहले से ही परेशानियों का सामना कर रहे हैं. जबकि पश्चिमी ओडिशा के जिलों में कीटों के हमले की सूचना मिली है.
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वहीं एक किसान ने बताया की अगर बारिश हो जाती है तो इससे फसलों को काफी नुकसान हो जाएगा. प्रदेश में किसानों को हुए फसल नुकसान के कारण पिछले एक महीने में तीन किसान आत्महत्या कर चुके हैं. ताजा मामला बलांगीर जिले के पुईंटाला का है. जहां के किसान रमेश भोई ने कीटनाशक का छिड़काव करते समय अपने खेतों में जहर खा लिया था. इसके बाद उस ब्लांगीर जिले भीमा भोई मेडिकल अस्पताल में ले जाया गया था, ज़हां डाक्टरोंने किसान को मृत घोषित कर दिया था, इधर किसान आत्महत्या के मौत को लेकर बीजेपी कृषक मोर्चा ने राज्यपाल से मुकालात की थी और इस मामले में कार्रवाई करने की मांग की थी.
गंजाम जिले में 26 सितंबर से बारिश की कमी के कारण जिले की कुल 179,000 हेक्टेयर भूमि में से लगभग 26,000 हेक्टेयर में खड़ी धान की फसल खराब हो गई है. वहीं गजपति जिले की 25,000 हेक्टेयर भूमि में से लगभग 5,000 हेक्टेयर भूमि को नुकसान पहुंचा है. अधिकांश क्षेत्रों में धान की फसल पक चुकी है, जबकि कई किसान पहले ही फसल काट चुके हैं. पर अभी तक धान की खरीद शरू नहीं हुई. इसके कारण धान की सरकारी दर पर खरीद शुरू करने के लिए किसान प्रशासन पर दबाव बना रहे हैं. किसानों ने धान की बोरियों को बाजार समिति के कैंपस में डंप कर दिया है. किसान संघ रुशिकुल्या रायत महासभा के सचिव सिमामचल नाहक ने कहा, सरकार ने अभी तक अधिकांश जिलों में धान की खरीद शुरू नहीं की है, इसलिए जिन किसानों ने पहले ही फसल काट ली है, उन्हें अपनी उपज सुरक्षित रखने में कठिन समय का सामना करना पड़ेगा.
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