शव को ट्रैक्टर से बांधकर घसीटाराजस्थान सरकार एक तरफ जहां गौ रक्षा के नाम पर नंदीशालाओं का निर्माण कर रही है. वहीं, दूसरी ओर कोटा से सामने आई तस्वीर ने मानवता को शर्मसार करके रख दिया है, जिस देश में गाय को माता का दर्जा दिया जाता है. वहां उनके साथ अमानवीय व्यवहार की घटना दिल को झकझोर देने वाली होती है. एक ऐसी हृदय विदारक घटना कोटा जिले से सामने आई है, जहां गाय के शव के साथ अमानवीय व्यवहार सामने आया है. दरअसल, रामगंजमंडी क्षेत्र की घाटोली पंचायत में मृत गाय को ट्रैक्टर से बांधकर घसीटने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. यह घटना 27 जनवरी की बताई जा रही है. खास बात यह है कि जिले में बीते 12 दिनों के भीतर यह दूसरी ऐसी घटना है, जिसने प्रशासन की सख्ती और कामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
वायरल वीडियो सामने आने के बाद घाटोली पंचायत हरकत में आई है. पंचायत सचिव ने संबंधित गोशाला को नोटिस जारी करने और भविष्य में ऐसी लापरवाही न होने देने की बात कही है. इससे पहले खेड़ा रूधा पंचायत क्षेत्र में भी गाय के शव को इसी तरह घसीटे जाने का मामला सामने आ चुका है.
घाटोली पंचायत के सचिव बाली शेखावत के अनुसार, मेघवाल बस्ती स्थित निर्मला गोशाला में एक गाय की मौत हुई थी, जिसके बाद गोशाला प्रबंधन ने इसकी सूचना पंचायत को नहीं दी, जबकि पंचायत की ओर से मृत मवेशियों के निस्तारण (दफनाने) के लिए अलग से लोग नियुक्त किए गए है. इसके बावजूद गांव के एक व्यक्ति को बुलाकर शव को हटवाया गया, जो नियमों के खिलाफ है. इस लापरवाही को लेकर गोशाला के महाराज को नोटिस देने की तैयारी की जा रही है.
वहीं, निर्मला गोशाला के महाराज राम कुमार दास ने अपनी सफाई में कहा कि गोशाला में करीब 220 गाय हैं. 27 जनवरी को बारिश के बाद शाम करीब छह बजे गोशाला के बाहर एक लावारिस गाय मृत अवस्था में मिली थी. सूचना देने के लिए पंचायत में एक युवक को भेजा गया, लेकिन वहां कोई मौजूद नहीं मिला.उनका कहना है कि गली संकरी होने के कारण जेसीबी अंदर नहीं आ सकती थी, इसलिए रवि नाम के युवक की मदद ली गई, जो शव को ट्रैक्टर से बाहर ले गया. बाद में जेसीबी से शव को उठाकर गांव के बाहर दफना दिया गया. उन्होंने यह भी बताया कि रवि गांव में मृत पशु उठाने का काम करता है और बदले में ग्रामीण उसे हर साल अनाज देते हैं.
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में गाय के शव को सार्वजनिक रूप से घसीटे जाने का वीडियो सामने आने के बाद लोगों में काफी आक्रोश है. प्रशासन के लिए यह मामला अब केवल नियमों के उल्लंघन का नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और जिम्मेदारी से जुड़ा बड़ा सवाल बन गया है.
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