मन की बातप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो शो मन की बात के 128 वां एपिसोड को संबोधित किया. इस कार्यक्रम के माध्यम से देश की जनता को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि साल 2026 का यह पहला ‘मन की बात’ है. पीएम मोदी ने कहा कि मैं आप सभी की एक बात के लिए बहुत सराहना करना चाहता हूं, वजह है मिलेट्स यानी श्रीअन्न. उन्होंने कहा कि मुझे ये देखकर खुशी है कि श्रीअन्न के प्रति देश के लोगों और किसानों का लगाव निरंतर बढ़ रहा है. वैसे तो हमने 2023 को मिलेट ईयर घोषित किया था, लेकिन आज तीन साल बाद भी इसको लेकर देश और दुनिया में जो पैशन और कमिटमेंट है, वो बहुत उत्साहित करने वाला है.
कार्यक्रम में पीएम मोदी ने तमिलनाडु के कल्लकुरिचि जिले का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के कल्लकुरिचि जिले में महिला किसानों का एक समूह प्रेरणा का स्त्रोत बन गया है. यहां के ‘पेरियापलायम मिलेट’ FPC से लगभग 800 महिला किसान जुड़ी हैं. मोटे अनाज की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए इन महिलाओं ने मिलेट्स प्रोसेसिंग यूनिट शुरू की है, और अब वो मोटे अनाज से बने उत्पादों को सीधे बाजार तक पहुंचा रही हैं.
पीएम मोदी ने राजस्थान के रामसर क्षेत्र में हो रहे नवाचारों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, यहां के रामसर ऑर्गेनिक किसान उत्पादक कंपनी से 900 से ज्यादा किसान जुड़े हैं. ये किसान मुख्य रूप से बाजरे की खेती करते हैं. फिर बाजरे को प्रोसेस करके रेडी-टू-ईट लड्डू तैयार करते हैं. इसकी बाजार में बड़ी मांग है. उन्होंने कहा कि मुझे ये जानकर भी खुशी होती है कि आजकल कई मंदिर ऐसे हैं, जो अपने प्रसाद में सिर्फ मिलेस्ट का उपयोग करते हैं. मैं उन मंदिर के सभी व्यवस्थापकों का उनकी इस पहल के लिए हृदय से अभिनंदन करता हूं.
मिलेट्स यानी श्रीअन्न से अन्नदाताओं की कमाई बढ़ने के साथ ही लोगों की सेहत में भी सुधार हो रहा है. मिलेट्स पोषण से भरपूर होते हैं, सुपरफूड होते हैं. हमारे देश में सर्दियों का मौसम तो खानपान के लिए बहुत ही अच्छा माना जाता है. ऐसे में इन दिनों हमें श्रीअन्न का सेवन जरूर करना चाहिए. पीएम मोदी ने कहा कि ‘मन की बात’ में एक बार फिर कई अलग-अलग विषयों पर चर्चा करने का अवसर मिला. यह कार्यक्रम हम सभी को अपने देश की उपलब्धियों को महसूस करने और सेलिब्रेट करने का अवसर देता है. फरवरी में ऐसा ही एक और अवसर आ रहा है
पीएम मोदी ने आगे कहा कि जब पर्यावरण संरक्षण की बात होती है, तो बड़ी योजनाएं और बड़े संगठन की बात आती है. कई बार बदलाव की शुरुआत साधारण तरीके से होती है. लगातार की गई छोटी कोशिशों से भी बड़े बदलाव आते हैं. पश्चिम बंगाल के कूचबिहार के रहने वाले बैनोई दास ने ऐसा ही प्रयास किया है. उन्होंने खुद के पैसों से हजारों पेड़ लगाए हैं, जिसके बाद अब इलाके में हरियाली काफी ज्यादा बढ़ गई है. पर्यावरण संरक्षण की यही भावना बड़े स्तर पर भी दिखाई दे रही है. इसी सोच के तहत एक पेड़ मां के नाम अभियान चलाया जा रहा है. अब तक देश में 200 करोड़ से ज्यादा पेड़ लगाए जा चुके हैं और लोग अब पर्यावरण को लेकर ज्यादा जागरूक हैं.
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