अरुणाचल में झूम और असम में आहू धान की खेती की तैयारी करें किसान, पढ़ें IMD की सलाह

अरुणाचल में झूम और असम में आहू धान की खेती की तैयारी करें किसान, पढ़ें IMD की सलाह

किसान झूम चावल की खेती के लिए आवश्यक तैयारी कर लें. चावल के अलावा मक्का और सब्जियों की खेती करने के लिए खेत का उचित प्रबंधन करें. खेत में अपनी फसल को कीट और रोगों के मुक्त रखने के लिए खेत के आसपास अच्छे से सफाई करें.

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अरुणाचल में झूम और असम में आहू धान की खेती की तैयारी करें किसान, पढ़ें IMD की सलाहधान की खेती के लिए सलाह (सांकेतिक तस्वीर)

देश में मॉनसून की शुरुआत होने वाली है और इसके साथ ही खरीफ सीजन की शुरुआत भी होने वाली है. इस खरीफ सीजन में किसान सबसे अधिक धान की खेती करते हैं. इस बार के मौसम पूर्वानुमान के अनुसार इस बार देश में सही समय पर मॉनसून का आगमन सही समय से होनेवाला है. इसे देखते हुए किसान अभी से ही धान की खेती के लिए खेत की तैयारी में जुट गए हैं ताकि जैसे ही बारिश हो धान की बुवाई कर सकें. किसान अच्छे और सही तरीके से धान की खेती कर सकें और अच्छी पैदावार हासिल कर सकें ,इसके लिए मौसम विज्ञान विभाग की तरफ से किसानों के लिए सलाह जारी की गई है. 

अरुणाचल प्रदेश के लिए जारी सलाह में कहा गया है कि किसान झूम चावल की खेती के लिए आवश्यक तैयारी कर लें. चावल के अलावा मक्का और सब्जियों की खेती करने के लिए खेत का उचित प्रबंधन करें. खेत में अपनी फसल को कीट और रोगों के मुक्त रखने के लिए खेत के आसपास अच्छे से सफाई करें. खेत के आस-पास खरपतवार को साफ रखें. सूखे हुए खरपतवार का सही तरीके से निपटान करें. लंबे समय तक गर्म मौसम रहने के बाद मौसम में नमी आने के कारण मक्के की फसल में कीट और रोग का आक्रमण हो सकता है. इससे बचाव के लिए खेत में जलजमाव नहीं होने दें. मक्के में फॉल आर्मी वॉल का प्रकोप हो सकता है. इससे बचाव के लिए एज़ाडिरेक्टिन 1500 पीपीएम का 2.5 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें. 

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आहू चावल की खेती की करें तैयारी

असम के पहाड़ी क्षेत्रों में आहू चावल की रोपाई की जाती है. इसलिए किसान इसकी खेती के लिए किसान अभी से तैयारी में जुट जाएं ताकि उन्हें अच्छा उत्पादन हासिल हो सके. दलहन की खेती को लेकर जारी सलाह में कहा गया है कि इस वक्त मूंग और उड़द में फली निर्माण हो रहा है. ऐसे में बढ़ते तापमान के बीच उड़द और मूंग में फली छेदक कीट का प्रकोप हो सकता है. इससे बचाव के लिए खेतों में फेरोमोन ट्रैप का इस्तेमाल करें. असम में अगले कुछ दिनों में बारिश होने की संभावना है, इसलिए किसी भी प्रकार के रसायन के छिड़काव से बचें. फली छेदक कीट का प्रकोप अधिक होने पर क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5 एससी का छिड़काव करें. 

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बोरो चावल की करें कटाई

असम के निचले ब्रह्मपुत्र घाटी क्षेत्र में, साली चावल की खेती की जाती है. किसान इसकी तैयारी में जुट जाएं और अधिक उपज वाली किस्मों का संग्रह करें. इसके अलावा जो ब्रह्मपुत्र के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र हैं, वहां पर धान की खेती करने के लिए स्वर्णा सब-1, बहादुर सब-1, रंजीत सब-1 के बीज एकत्रित कर लें. किसान सही समय पर धान की बुवाई कर सकें, इसके लिए बोरो धान की कटाई जारी रखें. पिछले सप्ताह इस क्षेत्र में हुई बारिश के कारण एन्थ्रेक्नोज, जड़ सड़न और उकठा रोग का प्रकोप पौधों में हो सकता है. इसके लिए निरंतर खेत की निगरनी करते रहें. ऊपरी ब्रह्मपुत्र घाटी क्षेत्र में गन्ने और केले की बुवाई जारी रखें. खेत में उचित जल निकास की व्यवस्था करें. धान के खेतों की ग्रीष्मकालीन जुताई करें क्योंकि पिछले सप्ताह के दौरान पर्याप्त वर्षा हुई है. इससे कीड़ों के अंडे और लार्वा मर जाएंगे और मिट्टी में नमी संरक्षण में भी मदद मिलेगी.

 

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