1 रुपये में दूध बेच रहा Flipkart, प्रधानमंत्री मोदी तक पहुंचा मामला

1 रुपये में दूध बेच रहा Flipkart, प्रधानमंत्री मोदी तक पहुंचा मामला

बैंगलोर मिल्क यूनियन लिमिटेड के अध्यक्ष ने कहा कि यह भी जांच की जा रही है कि कंपनी दूध कहां से खरीद रही है और कहीं दूध में पाउडर मिलाकर तो नहीं बेचा जा रहा. उन्होंने दूध के सैंपल लैब में जांच के लिए भेजने की बात भी कही.

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1 रुपये में दूध बेच रहा Flipkart, प्रधानमंत्री मोदी तक पहुंचा मामला1 रुपये में दूध बेच रहा Flipkart

बैंगलोर मिल्क यूनियन लिमिटेड (BAMUL) के अध्यक्ष डी.के. सुरेश ने दावा किया है कि ई-कॉमर्स कंपनी Flipkart 1 रुपये प्रति लीटर दूध बेच रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी भारी छूट देकर दूध बेच रही है, जिससे डेयरी किसानों और सहकारी संस्थाओं को नुकसान हो सकता है. उन्होंने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के सामने Flipkart के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ईमेल भी लिखा है और इस पूरे मामले की जांच की मांग की है.

इस मामले पर Flipkart ने क्या कहा

हालांकि Flipkart ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा है कि कंपनी समय-समय पर ग्राहकों को बेहतर कीमत देने के लिए कुछ खास उत्पादों पर सीमित समय के प्रमोशनल ऑफर चलाती है. कई बार ये ऑफर कंपनी अपने बैंकिंग पार्टनर्स के साथ मिलकर भी देती है. कंपनी के प्रवक्ता के अनुसार, Flipkart के प्लेटफॉर्म पर किसी भी उत्पाद की कीमत विक्रेता खुद तय करते हैं. डेयरी से जुड़े सभी पार्टनर्स और विक्रेताओं को उनके उत्पाद की पूरी तय कीमत मिलती है, इसलिए किसानों से खरीदे जाने वाले दूध की कीमत पर इसका कोई असर नहीं पड़ता.

Flipkart ने यह भी कहा कि वह देशभर में किसानों, सहकारी समितियों और विक्रेताओं के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है. कंपनी का कहना है कि वह किसानों और छोटे कारोबारियों को बड़े बाजार तक पहुंच दिलाने और उनके विकास में सहयोग करने की दिशा में लगातार काम कर रही है.

किसानों की रोजी-रोटी से जुड़ा है दूध

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के भाई और पूर्व सांसद डी. के. सुरेश ने Flipkart के इस कदम की कड़ी आलोचना की है. वहीं, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए, बैंगलोर मिल्क यूनियन लिमिटेड (BAMUL) के अध्यक्ष सुरेश ने कहा कि दूध कोई 1 रुपये की फ्लैश डील नहीं है, बल्कि यह लाखों किसानों की रोजी-रोटी से जुड़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि दूध के हर एक लीटर के पीछे किसानों की मेहनत और पसीना लगा होता है. अगर कंपनियां बहुत ज्यादा छूट देकर दूध बेचती हैं, तो इससे देश की डेयरी सहकारी समितियां कमजोर हो सकती हैं और किसानों की आय पर भी बुरा असर पड़ सकता है.

BAMUL की केंद्र और राज्य सरकार से अपील

सुरेश ने केंद्र और राज्य सरकार से अपील की कि वे किसानों और सहकारी संस्थाओं की सुरक्षा के लिए जल्द कदम उठाएं. उन्होंने यह भी कहा कि दूध कोई मार्केटिंग का तरीका नहीं है, बल्कि यह उन लाखों डेयरी किसानों की आजीविका है, जो हर दिन मेहनत करके लोगों तक दूध पहुंचाते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि Flipkart निवेशकों के पैसे से चल रहे डिस्काउंट ऑफर के जरिए 1 रुपये में दूध बेच रहा है. उनका कहना है कि इससे किसानों की गरिमा और कई सालों में खड़े हुए सहकारी डेयरी आंदोलन को नुकसान पहुंच सकता है.

उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसानों और सहकारी संस्थाओं का समर्थन करें और 'नंदिनी' (कर्नाटक मिल्क फेडरेशन - KMF का एक डेयरी ब्रांड) को ही चुनें, जो एक स्थानीय डेयरी ब्रांड है. सुरेश ने यह भी कहा कि Flipkart के 1 रुपये में 1 लीटर दूध बेचने के मामले को लेकर वे भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) में धारा 19(1)(a) के तहत शिकायत दर्ज कराएंगे. उनका आरोप है कि इस तरह बहुत कम कीमत पर सामान बेचकर बाजार पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है, जिससे किसानों और डेयरी सहकारी समितियों को बड़ा नुकसान हो सकता है.

पुरानी डेयरी सहकारी संस्थाओं को होगा नुकसान

डी.के. सुरेश ने दावा किया कि इस ऑफर पर करीब 2,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. उनका कहना है कि इस तरह सार्वजनिक शेयरधारकों के पैसे का इस्तेमाल करना ठीक नहीं है. उन्होंने कहा कि इससे उन पुरानी डेयरी सहकारी संस्थाओं को नुकसान हो सकता है, जो आजादी से पहले से काम कर रही हैं. सुरेश ने आरोप लगाया कि कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां किसानों के हितों के खिलाफ काम कर रही हैं. उनका कहना है कि कंपनियों को साफ बताना चाहिए कि वे दूध को इतनी कम कीमत पर कितने समय तक बेचने वाली हैं. उन्होंने Flipkart से इस ऑफर को वापस लेने की भी मांग की, क्योंकि इससे किसान समुदाय को नुकसान हो सकता है.

बिक्री में गिरावट का दावा और जांच की मांग

BAMUL के अध्यक्ष के अनुसार, इस ऑफर की वजह से उनकी दूध बिक्री में करीब 40,000 से 50,000 लीटर तक की गिरावट आई है. उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को अभी लगभग 38–40 रुपये प्रति लीटर दूध का भुगतान किया जाता है, ऐसे में 1 रुपये में दूध बेचना समझ से बाहर है. सुरेश ने कहा कि यह भी जांच की जा रही है कि कंपनी दूध कहां से खरीद रही है और कहीं दूध में पाउडर मिलाकर तो नहीं बेचा जा रहा. उन्होंने दूध के सैंपल लैब में जांच के लिए भेजने की बात भी कही. उन्होंने सरकार से अपील की है कि किसानों और सहकारी आंदोलन की रक्षा के लिए इस मामले में जल्द कार्रवाई की जाए. (PTI)

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