
CFMTTI बुधनी में हुआ विशेष कार्यक्रमकेंद्रीय कृषि यंत्र प्रशिक्षण और परीक्षण संस्थान (CFMTTI), बुधनी ने 9 मार्च 2026 को “ड्रोन तकनीक के माध्यम से कृषि यांत्रिकरण को बढ़ावा” विषय पर एक दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया. यह कार्यक्रम किसानों और कृषि से जुड़े लोगों को नई तकनीक के बारे में जागरूक करने और उनकी क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया. इस कार्यक्रम का आयोजन कृषिशास्त्र के सहयोग से किया गया था. इसमें देशभर से 600 से अधिक लोग ऑनलाइन माध्यम से जुड़े. कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि ड्रोन तकनीक आधुनिक खेती में किस तरह से मदद कर सकती है.
विशेषज्ञों ने किसानों को समझाया कि ड्रोन की मदद से खेतों में कीटनाशक और उर्वरकों का छिड़काव, फसलों की निगरानी और खेतों का सर्वेक्षण आसानी से किया जा सकता है. इससे समय और मेहनत दोनों की बचत होती है और फसलों का उत्पादन भी बेहतर हो सकता है. कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि आने वाले समय में ड्रोन तकनीक खेती को और अधिक आधुनिक और आसान बनाने में बड़ी भूमिका निभाएगी. इसलिए किसानों और कृषि से जुड़े लोगों को इस नई तकनीक की जानकारी होना जरूरी है.
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य खेती में ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देना, कृषि यांत्रिकरण को नई दिशा देना और किसानों, युवाओं और कृषि से जुड़े लोगों को आधुनिक तकनीकों के प्रति जागरूक करना था. कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय की संयुक्त सचिव (एम एंड टी) एस. रुक्मिणी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहीं. इस मौके पर अतिरिक्त आयुक्त (एम एंड टी) डॉ. वी. एन. काले विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए. वहीं वहीं डॉ. बी. एम. नांदेड़े, निदेशक, सीएफएमटीटीआई बुधनी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की.

कार्यक्रम में कृषिशास्त्र के संस्थापक और सीईओ निखिल आर. यादव भी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे. इस पूरे कार्यक्रम का संचालन दुष्यंत राहंगडाले ने किया. कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने खेती में ड्रोन तकनीक के फायदे और इसके उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी. अपने संबोधन में वक्ताओं ने बताया कि आधुनिक कृषि में ड्रोन तकनीक किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है. इसके माध्यम से फसल की निगरानी, कीटनाशकों और उर्वरकों का सटीक छिड़काव, लागत में कमी के साथ उत्पादन में वृद्धि संभव है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलती है.
कार्यक्रम में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने अपने विचार प्रस्तुत किए. इनमें डॉ. सचिन नलावडे (एसोसिएट डीन, एमपीकेवी, राहुरी), डॉ. विद्यु कुम्पुर (संयुक्त निदेशक, एनआईपीएचएम, हैदराबाद), एस. जी. पवार (कृषि अभियंता, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय), डॉ. एस. आर. कोलवाडे (डीन, कृषि अभियांत्रिकी, पीडीकेवी, अकोला) के साथ डॉ. एस. डी. गोरंटिवार (पूर्व अनुसंधान निदेशक, एमपीकेवी, राहुरी) प्रमुख रूप से शामिल रहे.
विशेषज्ञों ने प्रिसिजन फार्मिंग, ड्रोन संचालन के सुरक्षा नियमों और ड्रोन आधारित उद्यमिता के अवसरों पर विस्तार से जानकारी दी. कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने ड्रोन तकनीक से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं. इस प्रकार के कार्यक्रम कृषि यांत्रिकरण को बढ़ावा देने और किसानों और युवाओं को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहे हैं.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today