गुजरात में डीजल की कमीमिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब सीधे भारत के गांवों तक पहुंचने लगा है. गुजरात के भावनगर शहर समेत पूरे जिले में इन दिनों डीजल की भारी कमी देखने को मिल रही है. इसका सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ रहा है, क्योंकि इस समय खेती से जुड़े कई महत्वपूर्ण काम चल रहे हैं. डीजल की कमी के कारण किसानों को ट्रैक्टर और अन्य कृषि मशीनें चलाने में परेशानी हो रही है, जिससे खेती का काम प्रभावित होने लगा है.
जिले के कई ग्रामीण इलाकों, खासकर तलाजा तहसील के त्रापज-अलंग हाईवे के आसपास स्थित पेट्रोल पंपों पर पिछले चार दिनों से किसानों की लंबी कतारें लगी हुई हैं. किसान सुबह से लेकर देर रात तक डीजल मिलने की उम्मीद में लाइन में खड़े रहते हैं, लेकिन कई बार उन्हें खाली हाथ वापस लौटना पड़ता है.
एक किसान ने बताया कि पिछले चार दिनों से वे लगातार पेट्रोल पंप के चक्कर लगा रहे हैं. पंप संचालक उन्हें भरोसा देते हैं कि डीजल का टैंकर आने वाला है, लेकिन जैसे ही थोड़ा-सा डीजल आता है, कुछ लोगों को देने के बाद स्टॉक खत्म हो जाता है. इसके बाद पंप बंद कर दिया जाता है और बाकी किसानों को इंतजार करते हुए वापस लौटना पड़ता है. किसानों का कहना है कि सरकार और संबंधित विभागों की ओर से डीजल की पर्याप्त उपलब्धता का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है. पंपों पर डीजल का स्टॉक बेहद सीमित है, जिससे किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं.
किसानों का कहना है कि यह खेती का बेहद महत्वपूर्ण समय है. खेतों की तैयारी, बुवाई और अन्य कृषि कार्यों के लिए डीजल की जरूरत होती है. ऐसे में अगर समय पर डीजल नहीं मिला तो खेती का काम प्रभावित होगा और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. साथ ही, घंटों लाइन में खड़े रहने से उनका कीमती समय भी बर्बाद हो रहा है. किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि डीजल की आपूर्ति जल्द से जल्द सामान्य की जाए और पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराया जाए, ताकि खेती का काम बिना किसी बाधा के जारी रह सके और किसानों को राहत मिल सके. (नितिन गोहेल की रिपोर्ट)
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