बिदादी टाउनशिप मामले में किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी हैकर्नाटक के बिदादी टाउनशिप मामले में विवाद बढ़ गया है. रामनगर जिले के बिदादी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मंडलाहल्ली गांव में सोमवार को भूमि अधिग्रहण के लिए सर्वे टीम पहुंची थी जिस पर किसानों ने हमला बोल दिया और भगा दिया. इस दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई. इस घटना में पुलिस दल पर भी हमले का आरोप है. इस घटना में बिदादी पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर और सर्वे टीम के एक सदस्य के घायल होने की खबर है. अब इस मामले में कई किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 13 जुलाई 2026 को बिदादी के बायरामंगला और कंचुगरनहल्ली ग्राम पंचायत क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण का सर्वे का काम चल रहा था. सर्वे टीम में महेश (सर्वे हेड), निश्चिंत (सिविल इंजीनियर), रोहिणी (वन विभाग), मंजूनाथ (बागवानी विभाग) और कीर्तना (जीएमसी हेड) शामिल थे. यह टीम इनोवा (KA-05-NH-9228) और टाटा सूमो (KA-42-N-3918) में सवार होकर सर्वे संख्या 3/2 की पैमाइश करने पहुंची थी.
सोमवार दोपहर करीब 2:30 बजे, जब टीम अपना काम कर रही थी, तभी दर्जनों की संख्या में किसान वहां गोलबंद हो गए. आरोप है कि प्रदर्शनकारी किसानों ने लाठी, डंडों और पत्थरों से लैस होकर सर्वे के काम में बाधा डाली. देखते ही देखते विरोध हिंसक हो गया. किसानों ने अधिकारियों के साथ गाली-गलौज की और उन्हें जान से मारने की धमकी दी.
मौके पर तैनात पुलिस इंस्पेक्टर मुरली ने जब स्थिति को नियंत्रित करने और अधिकारियों को बचाने का प्रयास किया, तो भीड़ ने उन पर भी हमला कर दिया. इंस्पेक्टर के अनुसार, एक व्यक्ति ने जान से मारने की नीयत से उनके सिर पर पत्थर से वार किया. इस हमले में इंस्पेक्टर और सर्वे हेड महेश घायल हो गए. इंस्पेक्टर को इलाज के लिए रामनगर जिला अस्पताल ले जाना पड़ा.
उपद्रवी किसानों ने सर्वे टीम के वाहनों को भी निशाना बनाया. पत्थरों के हमले से इनोवा और टाटा सूमो की खिड़कियों के कांच पूरी तरह टूट गए, जिससे गाड़ियों को भारी नुकसान पहुंचा है.
इस मामले में रामनगर पुलिस ने सरकारी काम में बाधा डालने, हिंसा भड़काने, जानलेवा हमला करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोपों में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है. पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उपद्रवियों की पहचान कर कड़ी कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है. इलाके में एहतियातन सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है.
भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत लगाए गए आरोप और धारा की जानकारी कुछ इस प्रकार है-
किसान संगठनों ने कहा, कल हमारे विरोध प्रदर्शन के दौरान, पुलिस ने जबरदस्ती हमारे आंदोलन को दबाने की कोशिश की. वे यह कहकर आए थे कि यह सिर्फ एक सर्वे है, लेकिन हमें पहले से कोई जानकारी दिए बिना, वे अचानक सर्वे करने के लिए हमारी जमीन पर आ गए.
उस समय, हमने 'पोराके चालुवली' (झाड़ू विरोध प्रदर्शन) शुरू किया था. सभी महिलाएं झाड़ू लेकर शांतिपूर्ण विरोध करने गईं. हम बस अधिकारियों से बात कर रहे थे और अपनी बात रख रहे थे. हमने बार-बार उनसे कहा कि हमने अपनी सहमति नहीं दी है और सर्वे की प्रक्रिया रोकने का अनुरोध किया.
जब पुलिस हमसे बात कर रही थी, तो उन्होंने चुपके से एक दूसरी टीम को दूसरे रास्ते से बुलाया और उस तरफ से JMC सर्वे शुरू कर दिया.
जब किसानों को इस बात का पता चला, तो हमने अपने झाड़ू विरोध प्रदर्शन के जरिए इसका विरोध करने का फैसला किया और वहां जाकर पूछा कि वे ऐसा क्यों कर रहे हैं. उस समय, जमीन अधिग्रहण का समर्थन करने वाले कुछ लोग भीड़ में शामिल हो गए और गाड़ियों पर पत्थर फेंकने लगे.
हमारा मानना है कि ऐसा ध्यान भटकाने और हमारे विरोध को बदनाम करने के लिए किया गया था. हमारा आंदोलन इतने दिनों से पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा है. 490 दिनों के विरोध के बाद भी, हमने यह सुनिश्चित किया था कि कोई अप्रिय घटना न हो. लेकिन कल, कुछ लोग जान-बूझकर भीड़ में शामिल हुए और गड़बड़ पैदा की.
हंगामे के दौरान, पुलिस ने हमारे साथ मारपीट भी की. आप मेरे हाथ पर लगी चोटें देख सकते हैं. लगभग आठ से दस पुलिसकर्मियों ने हममें से हर एक को घसीटा और पीटा, जिससे ये चोटें आईं.
हमें बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा है, और ऐसा लगता है कि हमें न्याय नहीं मिल रहा है. हम अनुरोध करते हैं कि किसानों को न्याय मिले. कृपया हमारी जमीन न छीनें. हम आपसे अपील करते हैं कि किसानों की रक्षा करें.
पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को पत्र लिखकर कर्नाटक सरकार से 'ग्रेटर बेंगलुरु बिदादी इंटीग्रेटेड टाउनशिप प्रोजेक्ट' को वापस लेने की अपील की है. इस प्रोजेक्ट के तहत रामनगर जिले के नौ गांवों में 7,481 एकड़ कृषि भूमि का अधिग्रहण किया जाना है.
अपने पत्र में देवेगौड़ा ने कहा कि इस प्रोजेक्ट से हजारों छोटे और सीमांत किसान बेदखल हो जाएंगे. उन्होंने सवाल उठाया कि जब मौजूदा BDA लेआउट में हजारों प्लॉट अभी भी आवंटित नहीं हुए हैं, तो एक नई टाउनशिप की क्या जरूरत है. उन्होंने पर्यावरण से जुड़ी चिंताएं भी जताईं और आरोप लगाया कि अधिग्रहण का अंतिम नोटिफिकेशन जारी करने से पहले अनिवार्य 'सोशल इम्पैक्ट स्टडी' (सामाजिक प्रभाव का अध्ययन) नहीं की गई.
आंदोलन की चेतावनी देते हुए देवेगौड़ा ने कहा कि JD(S) किसानों के चल रहे विरोध प्रदर्शन का समर्थन करेगी और अगर सरकार इस प्रोजेक्ट पर दोबारा सोचने से इनकार करती है, तो वह विधान सौध में गांधीजी की प्रतिमा के सामने सत्याग्रह करेंगे.
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