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Farmers Protest: सरकार के साथ बातचीत बेनतीजा, आज 10 बजे दिल्ली कूच करेगा किसानों का मार्च

Farmers Protest: सरकार के साथ बातचीत बेनतीजा, आज 10 बजे दिल्ली कूच करेगा किसानों का मार्च

किसानों का दिल्ली कूच मंगलवार को रवाना होगा. सरकार के साथ बातचीत बेनतीजा रही जिसके बाद किसानों ने दिल्ली कूच जारी रखने का फैसला किया. चंडीगढ़ में सरकार और किसान संगठनों के बीच सोमवार देर रात तक वार्ता चली, लेकिन दिल्ली कूच रोकने का कोई हल नहीं निकल पाया. इसके बाद किसानों ने दिल्ली कूच करने का फैसला किया.

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किसानों और सरकार के बीच बातचीत बेनतीजा रही. सूत्रों के मुताबिक, किसानों के दिल्ली कूच को रोकने के लिए कोई हल नहीं निकल पाया जिसके बाद किसानों ने दिल्ली कूच करने का फैसला बरकरार रखा. मीटिंग के बाद किसान मजदूर मोर्चा ने कहा कि दिल्ली कूच जारी रहेगा. किसान मोर्चा का कहना है कि सरकार सिर्फ आश्वासन दे रही थी, इसलिए कोई बात नहीं बन पाई. किसान मोर्चा ने कहा कि 13 फ़रवरी को सभी किसान दिल्ली कूच करने के लिए शंभु बॉर्डर, ख़नौरी बॉर्डर और डबवाली बॉर्डर पर तैयार रहें.

चंडीगढ़ में सरकार और किसान संगठनों के बीच सोमवार देर रात तक वार्ता चली, लेकिन दिल्ली कूच रोकने का कोई हल नहीं निकल पाया. इसके बाद किसानों ने दिल्ली कूच करने का फैसला किया. सरकार और किसानों के नुमाइंदों के बीच पांच घंटे से अधिक समय तक वार्ता हुई. सूत्रों के मुताबिक, किसान संगठन दिल्ली में अपने आंदोलन को मंगलवार को शुरू करेंगे.

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किसानों के साथ बातचीत में केंद्र सरकार के दो मंत्रियों ने हिस्सा लिया. इसमें वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा शामिल हुए. सूत्रों के मुताबिक, किसान नेता पंधेर ने कहा कि सरकार ने हर मुद्दे पर बात की, लेकिन ऐसा लगता है कि इसमें किसी तरह की गंभीरता नहीं दिखाई दी. पंधेर ने कहा, सरकार के मन में खोट है और वह किसानों को कुछ नहीं देना चाहती. पंधेर के मुताबिक, किसानों ने फसलों की एमएसपी गारंटी की मांग और उस पर फैसले की मांग की गई, लेकिन सरकार इस पर तैयार नहीं हुई. लिहाजा दिल्ली कूच का फैसला लिया गया.

क्या कहा कृषि मंत्री मुंडा ने?

केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि कई मुद्दों पर हमारे किसानों के साथ सहमति है, कुछ मुद्दों पर सहमति नहीं है तो उन पर हमने कमेटी बनाने की बात कही है. उम्मीद है कि बातचीत जारी रहेगी और बातचीत से ही आगे का फैसला निकलेगा. आगे हम किसानों के साथ फिर बैठेंगे.

किसानों की ये है मांग

1. सभी फसलों की खरीद पर MSP गारंटी अधिनियम बनाया जाए, डॉ स्वामीनाथन आयोग के निर्देश पर सभी फसलों की कीमतें C2+50% फॉर्मूले के अनुसार तय की जाएं.

1.1 गन्ने का एफआरपी और एमसएपी स्वामीनाथन आयोग के फार्मूले के अनुसार दिया जाना चाहिए, जिससे यह हल्दी सहित सभी मसालों की खरीद के लिए एक राष्ट्रीय प्राधिकरण बन जाए.

2. किसानों और मजदूरों के लिए पूर्ण ऋण माफी.

3. पिछले दिल्ली आंदोलन की अधूरी मांगें जैसे किः

3.1 लखीमपुर खीरी हत्या मामले में न्याय हो, अजय मिश्रा को केबिनेट से बर्खास्त किया जाए और गिरफ्तार किया जाए, आशीष मिश्रा की जमानत रद्द की जाए, सभी आरोपियों से उचित तरीके से निपटा जाए.

3.2 समझौते के अनुसार, घायलों को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए.

3.3 दिल्ली मोर्चा सहित देश भर में सभी आंदोलनों के दौरान सभी प्रकार के मामले/मुकदमे रद्द किए जाएं.

3.4 आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों और मजदूरों के परिवारों को मुआवजा दिया जाए और नौकरी दी जाए.

3.5 दिल्ली में किसान मोर्चा के शहादत स्मारक के लिए जगह दी जाए.

3.6 बिजली क्षेत्र को निजी हाथों में देने वाले बिजली संशोधन विधेयक पर दिल्ली किसान मोर्चा के दौरान सहमति बनी थी कि इसे उपभोक्ता को विश्वास में लिए बिना लागू नहीं किया जाएगा, जो कि अभी अध्यादेशों के माध्यम से पिछले दरवाजे से लागू किया जा रहा है, इसे निरस्त किया जाना चाहिए.

3.7 कृषि क्षेत्र को वादे के अनुसार प्रदूषण कानून से बाहर रखा जाना चाहिए.

4. भारत को डब्ल्यूटीओ से बाहर आना चाहिए, कृषि वस्तुओं, दूध उत्पादों, फलों, सब्जियों और मांस आदि पर आयात शुल्क कम करने के लिए भत्ता बढ़ाना चाहिए. विदेशों से और प्राथमिकता के आधार पर भारतीय किसानों की फसलों की खरीद करें.

5. किसानों और 58 वर्ष से अधिक आयु के कृषि मजदूरों के लिए पेंशन योजना लागू करके 10,000 रुपये प्रति माह की पेंशन दी जानी चाहिए.

6. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सुधार के लिए सरकार द्वारा स्वयं बीमा प्रीमियम का भुगतान करना, सभी फसलों को योजना का हिस्सा बनाना और नुकसान का आकलन करते समय खेत एकड़ को एक इकाई के रूप में मानकर नुकसान का आकलन करना.

7. भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 को उसी तरीके से लागू किया जाना चाहिए और भूमि अधिग्रहण के संबंध में केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को दिए गए निर्देशों को रद्द किया जाना चाहिए.

8. मनरेगा के तहत प्रति वर्ष 200 दिनों के लिए रोजगार उपलब्ध कराया जाए, मजदूरी बढ़ाकर 700 प्रति दिन की जाए और इसमें कृषि को शामिल किया जाए.

9. कीटनाशक, बीज और उर्वरक अधिनियम में संशोधन करके कपास सहित सभी फसलों के बीजों की गुणवत्ता में सुधार करना और नकती और घटिया उत्पादों का निर्माण और बिक्री करने वाली कंपनियों पर अनुकरणीय दंड और दंड लगाकर लाइसेंस रद्द करना.

10. संविधान की पांचवीं अनुसूची का कार्यान्वयन.

कितने किसान संगठन शामिल

पंजाब और हरियाणा के 26 किसान संगठनों ने 13 फरवरी को दिल्ली कूच का एलान किया है. इसकी कमान संयुक्त किसान मोर्चा (अराजनैतिक) के पास है. जबकि एसकेएम के दूसरे गुट ने 16 फरवरी को भारत बंद बुलाया है. लेकिन सरकार की टेंशन एसकेएम (अराजनैतिक) ने बढ़ाई हुई है क्योंकि इससे जुड़े हजारों किसान अपने घरों से दिल्ली के लिए निकल पड़े हैं.

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दिल्ली-एनसीआर में सुरक्षा

किसान कूच को देखते हुए पूरे दिल्ली-एनसीआर में सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम हैं. सभी बॉर्डर पर निगरानी बढ़ा दी गई है. बॉर्डर पर सीमेंट और लोहे के बैरिकेड लगाए गए हैं. बॉर्डर पर ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी जा रही है. पुलिस फोर्स के जवान सभी जगहों पर तैनात हैं. लोगों को असुविधा न हो, इसके लिए पुलिस ने पहले से ही ट्रैफिक एडवाइजरी जारी कर दी है. लोगों से अपील की गई है कि वे ट्रैफिक एडवाइजरी का पालन करते हुए घर से निकलें.