हौसले की जीतदो वर्ष की उम्र में पोलियो की मार झेलने वाले बिहार के एक किसान परिवार के बेटे ने संघर्ष, मेहनत और शिक्षा की ताकत से ऐसी मिसाल पेश की है, जो लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है. दरअसल, बिहार के समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर गांव निवासी सावन कुमार ने जेईई एडवांस्ड 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए पीडब्ल्यूडी श्रेणी में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 22 हासिल की है. इसके अलावा उन्होंने कॉमन रैंक 17,532 और ओबीसी-एनसीएल पीडब्ल्यूडी श्रेणी में ऑल इंडिया रैंक 9 प्राप्त की है.
एजुकेशन हब कोटा में रहकर तैयारी करने वाले सावन की सफलता इसलिए भी खास है, क्योंकि शारीरिक चुनौतियों और आर्थिक अभावों के बावजूद उन्होंने कभी अपने सपनों को सीमित नहीं होने दिया. अब उनका सपना देश के शीर्ष आईआईटी संस्थानों में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर भविष्य में सिविल सेवा के जरिए समाज की सेवा करना है.
सावन जब महज दो वर्ष के थे, तभी वे पोलियो से ग्रस्त हो गए. बीमारी के कारण उनके दोनों पैरों में लगभग 70 प्रतिशत लोकोमोटर डिसेबिलिटी विकसित हो गई. आज भी उन्हें चलने-फिरने में कठिनाई होती है, लेकिन उन्होंने अपनी शारीरिक स्थिति को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. सावन कहते हैं कि जीवन में आने वाली शारीरिक चुनौतियां व्यक्ति की क्षमता तय नहीं करती है. उनका मानना है कि शिक्षा सबसे बड़ा सशक्तिकरण का माध्यम है और हर व्यक्ति को अपनी परिस्थितियों से ऊपर उठकर आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए.
सावन एक साधारण किसान परिवार से आते हैं. उनके पिता प्रभु राय के पास खुद की खेती योग्य जमीन नहीं है और वे बंटाई पर खेती करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने बेटे की पढ़ाई को कभी रुकने नहीं दिया.
गांव के एक स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद सावन ने अपनी प्रतिभा के दम पर बिहार के प्रतिष्ठित सिमुलतला आवासीय विद्यालय, जमुई में प्रवेश हासिल किया, जहां उन्होंने कक्षा 6 से 10 तक फ्री शिक्षा प्राप्त की. उनकी मेधा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने बिहार बोर्ड की कक्षा 10 परीक्षा में मेरिट सूची में 10वां स्थान हासिल किया. इसके बाद परिवार ने इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए उन्हें कोटा भेजने का निर्णय लिया.
कोटा में इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के दौरान एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट ने सावन की प्रतिभा और परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें 80 प्रतिशत फीस स्कॉलरशिप दी. सावन का कहना है कि यह आर्थिक सहयोग उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ.
उन्होंने बताया कि यदि यह सहायता नहीं मिलती, तो उच्च स्तर की तैयारी कर पाना बेहद कठिन होता. जेईई मेन में भी उन्होंने 99.1473246 पर्सेंटाइल स्कोर हासिल कर अपनी क्षमता साबित की थी.
सावन का सपना देश के प्रतिष्ठित संस्थानों-आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी दिल्ली या आईआईटी मद्रास में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करना है. आगे चलकर वे सिविल सेवा में जाकर गरीब और जरूरतमंद वर्ग के लिए काम करना चाहते हैं. उनका कहना है कि समाज में बदलाव लाने के लिए प्रशासनिक सेवाएं एक प्रभावी माध्यम हैं और वे अपनी शिक्षा का उपयोग जनसेवा के लिए करना चाहते हैं.
सावन अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, परिवार और शिक्षकों को देते हैं. वे कहते हैं कि परिवार ने उन्हें कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि वे किसी भी रूप में दूसरों से पीछे हैं. चलने-फिरने में कठिनाइयों के बावजूद माता-पिता ने हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. कोटा में भी फैकल्टीज और शिक्षकों ने उनका मनोबल बढ़ाया और हर कदम पर सहयोग दिया, जिससे वे अपने लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ते रहे.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today