कर्ज बना मौत की वजहकर्नाटक के मांड्या जिले से किसानों की बदहाली की एक दर्दनाक घटना सामने आई है. यहां बढ़ते कर्ज और लगातार फसल खराब होने से परेशान एक किसान दंपत्ति ने आत्महत्या कर ली. इस घटना के बाद राज्य में किसानों की स्थिति को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है. पुलिस के अनुसार, मृतकों की पहचान पुट्टास्वामी (58) और उनकी पत्नी नागम्मा (55) के रूप में हुई है. दोनों मांड्या तालुका के हटना बेवुकाल्लू गांव के रहने वाले थे. गुरुवार को दोनों ने गांव के पास एक पेड़ से फांसी लगाकर अपनी जान दे दी. शुरुआती जांच में सामने आया है कि लगातार फसल खराब होने और बढ़ते कर्ज के दबाव के कारण उन्होंने यह कदम उठाया. वहीं, बीजेपी ने राज्य सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए तुरंत राहत उपाय लागू करने की मांग की है.
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि किसान दंपत्ति के पास करीब पांच एकड़ कृषि भूमि थी. खेती के लिए उन्होंने बैंक से लगभग 10 लाख रुपये का लोन लिया था. इस साल कम बारिश होने के कारण उनकी टमाटर और अन्य सब्जियों की फसल अच्छी नहीं हो सकी. फसल से पर्याप्त आमदनी नहीं हुई, जिससे वे बैंक का कर्ज और उसका ब्याज चुकाने में नाकाम रहे. आर्थिक तंगी लगातार बढ़ती गई और आखिरकार उन्होंने आत्महत्या जैसा दुखद कदम उठा लिया.
घटना की सूचना मिलने के बाद शिवल्ली पुलिस स्टेशन की टीम मौके पर पहुंची. पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है.
इस घटना के बाद कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने राज्य सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने इस घटना को बेहद दुखद और दिल दहला देने वाला बताया. उन्होंने कहा कि पुट्टास्वामी और नागम्मा की मौत यह दिखाती है कि राज्य के किसान किस तरह गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं. विजयेंद्र ने कहा कि किसान दंपत्ति ने पांच एकड़ जमीन पर टमाटर और दूसरी सब्जियों की खेती की थी, लेकिन लगातार फसल खराब होने से उन पर करीब 10 से 15 लाख रुपये तक का कर्ज हो गया था. वे लोन का ब्याज भी नहीं चुका पा रहे थे, जिससे उनकी परेशानी लगातार बढ़ती गई.
उन्होंने किसानों से अपील की कि चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, वे आत्महत्या जैसा कदम न उठाएं. उन्होंने कहा कि हर समस्या का समाधान निकाला जा सकता है और किसानों को हिम्मत बनाए रखनी चाहिए. बीजेपी अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से राज्यभर के किसानों की समस्याओं पर तुरंत ध्यान देने की मांग की. उन्होंने कहा कि सरकार को केवल बैठकों और वीडियो कॉन्फ्रेंस तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि मुख्यमंत्री को खुद प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर किसानों से सीधे बातचीत करनी चाहिए.
उन्होंने सरकार से मांग की कि कम बारिश से प्रभावित सभी तालुकों को जल्द से जल्द सूखाग्रस्त घोषित किया जाए. साथ ही किसानों के बैंक लोन माफ करने, राहत पैकेज देने और फसल नुकसान की भरपाई के लिए विशेष सहायता उपलब्ध कराने की भी मांग की. विजयेंद्र ने बताया कि बीजेपी की टीमें राज्य के अलग-अलग हिस्सों में जाकर किसानों की स्थिति का जायजा ले रही हैं. उनका कहना है कि यदि सरकार ने समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए तो कृषि संकट और गहरा सकता है. उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की समस्याओं की अनदेखी करना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा.
यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि प्राकृतिक आपदाओं, कम बारिश और आर्थिक संकट का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ता है. विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर राहत, उचित मुआवजा, आसान कर्ज व्यवस्था और बेहतर सिंचाई सुविधाएं ही ऐसे मामलों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं. (PTI)
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