खेतों में बिजली के खंभे लगाने का विरोध तेजगुजरात के जामनगर जिले में खेतों में बिजली के खंभे लगाने और भूमि अधिग्रहण के मुद्दे को लेकर किसानों का गुस्सा खुलकर सामने आया. बड़ी संख्या में किसान और महिलाओं ने प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारी पहले शहर के विरल बाग में एकत्र हुए और फिर रैली निकालते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचे. यहां उन्होंने अपनी मांगों को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और जल्द समाधान की मांग की. किसानों का आरोप है कि उनकी अनुमति के बिना ही उनके खेतों में बिजली के बड़े-बड़े खंभे लगाए जा रहे हैं. इससे उनकी खेती प्रभावित हो रही है और कृषि भूमि को नुकसान पहुंच रहा है. किसानों का कहना है कि प्रशासन और संबंधित बिजली कंपनी उनकी बात सुनने के बजाय लगातार नोटिस भेजकर उन पर दबाव बना रही है. इससे किसानों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है.
प्रदर्शन में शामिल किसानों ने कहा कि वे किसी भी कीमत पर अपनी खेती की जमीन पर बिना सहमति बिजली के खंभे नहीं लगने देंगे. उनका कहना है कि यह केवल जमीन का मामला नहीं, बल्कि उनकी आजीविका का भी सवाल है. किसानों ने साफ कहा कि उन्हें किसी तरह का मुआवजा या दूसरी प्रक्रिया स्वीकार नहीं है. उनकी एकमात्र मांग है कि जिन खेतों में बिजली के खंभे लगाए गए हैं, उन्हें तुरंत हटाया जाए.
रैली में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी हिस्सा लिया. महिलाओं ने भी प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए किसानों के समर्थन में आवाज उठाई. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि खेती ही उनके परिवार की आय का मुख्य साधन है और यदि खेतों में इस तरह बिजली के खंभे लगाए जाएंगे तो खेती करना मुश्किल हो जाएगा.
किसान नेता प्रवीणभाई पटारिया ने आरोप लगाया कि सरकार और बिजली कंपनी किसानों की सहमति के बिना उनके खेतों में पोल लगा रही है. उन्होंने कहा कि पिछले 12 दिनों में किसानों को तीन बार नोटिस भेजे गए हैं, जिससे किसान मानसिक रूप से परेशान हैं. उन्होंने बताया कि किसान कलेक्टर से मांग करने आए हैं कि वे संबंधित बिजली कंपनी को निर्देश दें कि किसानों की मंजूरी के बिना किसी भी खेत में बिजली के खंभे लगाने का काम तुरंत रोका जाए. उन्होंने कहा कि किसानों ने पहले भी प्रशासन को सात दिन का समय दिया था, लेकिन 15 दिन बीत जाने के बाद भी कोई फैसला नहीं लिया गया.
प्रवीणभाई पटारिया ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो किसान बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे. उन्होंने कहा कि अभी केवल कुछ किसान प्रदर्शन में शामिल हुए हैं, जबकि पूरे जिले में हजारों किसान इस मुद्दे से जुड़े हुए हैं. यदि सरकार और प्रशासन ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा.
प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि यह केवल जामनगर का मुद्दा नहीं है. उनका दावा है कि मोरबी समेत पूरे गुजरात के किसान इस मामले में एकजुट हो चुके हैं. किसानों ने कहा कि यदि उनकी मांगों को जल्द नहीं माना गया तो वे आंदोलन का दायरा पूरे राज्य में बढ़ाएंगे.
प्रदर्शनकारियों ने राजनीतिक नेताओं के घेराव की भी चेतावनी दी. उनका कहना है कि यदि किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज किया गया तो वे लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध और तेज करेंगे. किसानों ने प्रशासन से मांग की कि मामले में तुरंत हस्तक्षेप कर किसानों के हितों की रक्षा की जाए और बिना सहमति लगाए जा रहे बिजली के खंभों को हटाने के निर्देश दिए जाएं.
फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. अब किसानों की नजर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है. यदि समय रहते समाधान नहीं निकला तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है. (दर्शन ठक्कर की रिपोर्ट)
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