दलहन-तिलहन किसानों के लिए भारतीय किसान संघ की बड़ी मांग, कहा- फसलों की 100% हो खरीद

दलहन-तिलहन किसानों के लिए भारतीय किसान संघ की बड़ी मांग, कहा- फसलों की 100% हो खरीद

भारतीय किसान संघ ने सरकार से मांग की है कि सभी दालों और तिलहन फसलों की 100 फीसदी गारंटी के साथ खरीद की जाए. संगठन का कहना है कि साल 2016 में दालों की सीमित सरकारी खरीद से ही उत्पादन में बड़ा इजाफा देखने को मिला था.

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दलहन-तिलहन किसानों के लिए भारतीय किसान संघ की बड़ी मांग, कहा- फसलों की 100% हो खरीददलहन-तिलहन किसानों के लिए बड़ी मांग (AI- तस्वीर)

भारतीय किसान संघ (BKS) ने केंद्र सरकार से दालों और तिलहनों की 100 फीसदी गारंटी खरीद की मांग की है. संगठन का कहना है कि किसानों को फसल विविधीकरण के लिए सीधे आर्थिक प्रोत्साहन दिए जाएं और खेती में आधुनिक जीन-एडिटिंग तकनीकों के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाई जाए. ये मांगें 16-17 मई को राजस्थान के माउंट आबू में हुई भारतीय किसान संघ की दो दिवसीय कार्यकारी समिति की बैठक के बाद सामने आईं. RSS से जुड़े इस किसान संगठन ने कहा कि आजादी के 78 साल बाद भी भारत दालों और खाने के तेलों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है. संगठन के मुताबिक यह सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और आत्मनिर्भरता से जुड़ा गंभीर मुद्दा है.

दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भर बने भारत

किसानों के इस संगठन ने केंद्र सरकार से दालों, तिलहनों और खाने के तेल के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए एक "व्यापक और व्यावहारिक" नीतिगत ढांचा अपनाने का आग्रह किया. भारतीय किसान संघ के महासचिव मोहिनी मोहन मिश्रा ने कहा कि मौजूदा एकल-फसल प्रणाली जैव विविधता, खाद्य विविधता और जलवायु स्थिरता के लिए हानिकारक है. उन्होंने मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने और किसानों के लिए लागत कम करने के उद्देश्य से गाय-आधारित खेती और व्यापार को बढ़ावा देने के साथ-साथ, अंतर-फसल (intercropping), मिश्रित खेती और फसल चक्र के माध्यम से फसल विविधीकरण की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया.

दलहन-तिलहन फसलों की 100% खरीद की मांग

भारतीय किसान संघ ने सरकार से मांग की है कि सभी दालों और तिलहन फसलों की 100 फीसदी गारंटी के साथ खरीद की जाए. संगठन का कहना है कि साल 2016 में दालों की सीमित सरकारी खरीद से ही उत्पादन में बड़ा इजाफा देखने को मिला था, इसलिए अगर पूरी खरीद की गारंटी मिले तो किसान ज्यादा उत्पादन के लिए आगे आएंगे. संगठन ने यह भी मांग की कि जो किसान मिट्टी बचाने वाली तकनीक, जलवायु के अनुसार खेती और फसल विविधीकरण अपनाते हैं, उन्हें सरकार सीधे आर्थिक मदद दे.

उन्नत किस्मों के बीजों को बचाने पर जोर

इसके अलावा भारतीय किसान संघ ने स्वदेशी बीजों और पारंपरिक तरीकों से विकसित उन्नत किस्मों को बचाने और बढ़ावा देने की बात कही. संगठन का कहना है कि इससे किसानों को हर बार महंगे बीज खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी और खेती की लागत भी कम होगी. संगठन ने कहा कि किसानों को हर साल महंगे बीज खरीदने के दुष्चक्र से बचाने के लिए, सरकार को पारंपरिक प्रजनन विधियों से विकसित स्वदेशी बीजों और उन्नत किस्मों के संरक्षण और विकास को बढ़ावा देना चाहिए.

जीन-एडिटिंग तकनीक पर लगे रोक: BKS

BKS ने छोटे और सीमांत किसानों के लिए पशुपालन को बढ़ावा देने की मांग भी की है. संगठन का कहना है कि इससे लोगों को खाने के तेल के विकल्प के तौर पर देसी घी मिल सकेगा. साथ ही गाय का गोबर और गौमूत्र प्राकृतिक और जैविक खेती को मजबूत बनाने में मदद करेगा. भारतीय किसान संघ ने फसल सुधार के लिए प्रस्तावित जीन-एडिटिंग तकनीक (CRISPR) का भी कड़ा विरोध किया है. संगठन ने मांग की कि इस तकनीक को संसदीय समिति की रिपोर्ट से हटाया जाए. BKS का कहना है कि जीन-एडिटिंग जैसी तकनीकें फसलों में ऐसे बदलाव कर सकती हैं, जिन्हें बाद में ठीक नहीं किया जा सकता. इससे पर्यावरण और प्राकृतिक संतुलन पर भी बुरा असर पड़ सकता है.

खेती में जीन-एडिटिंग तकनीक का विरोध

भारतीय किसान संघ ने उदाहरण देते हुए कहा कि पहले पंजाब के मुक्तसर इलाके में Bt कपास के इस्तेमाल से खेती और मंडी व्यवस्था पर असर पड़ा था. संगठन का मानना है कि ऐसी तकनीकों से किसानों को लंबे समय में नुकसान हो सकता है. संगठन ने कहा कि भारत को विदेशी तकनीकों पर पूरी तरह निर्भर होने के बजाय अपनी पारंपरिक खेती और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों के आधार पर समाधान तलाशने चाहिए. उनका कहना है कि केवल समय बचाने के लिए जीन-एडिटिंग तकनीक अपनाना भविष्य में कृषि और पर्यावरण के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है.

दो दिन चली इस बैठक में महिला किसानों से जुड़े मुद्दों, संगठन के विस्तार, नए सदस्य अभियान, वैश्विक कृषि व्यापार, किसानों की समस्याओं और 2029 में होने वाले संगठन के स्वर्ण जयंती समारोह की तैयारियों पर भी चर्चा हुई. बैठक में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष के. साई रेड्डी, सचिव दिनेश कुलकर्णी, प्रचार प्रमुख राघवेंद्र सिंह पटेल समेत देशभर से किसान प्रतिनिधि शामिल हुए. (PTI)

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