आलू क‍िसानों की मांग, पाकिस्तान-बांग्लादेश से शुरू हो कारोबार तो सुधरेंगे हालात

आलू क‍िसानों की मांग, पाकिस्तान-बांग्लादेश से शुरू हो कारोबार तो सुधरेंगे हालात

आलू के ढेर से बड़ा, पीला और साफ-सुथरा छांटकर अलग किए गए आलू के दाम 511 रुपये क्विंटल मिल रहे हैं. जबकि आलू पर तिल जैसे छोटे-छोटे निशान होने पर किसान अभयराज का आलू 240 रुपये क्विंटल के रेट पर बिका है. बिना छांटे मिक्स आलू की बात करें तो वो 250 से 350 रुपये तक बिक रहा है.

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आलू क‍िसानों की मांग, पाकिस्तान-बांग्लादेश से शुरू हो कारोबार तो सुधरेंगे हालातफर्रुखाबाद आलू मंडी का फाइल फोटो.

आलू की खुदाई भी पूरी नहीं हुई है. लेकिन, उसके दाम जमीन पर आ गए हैं. आलू बेचकर लागत निकालना भी किसान के लिए मुश्किल हो गया है. हालांकि अभी फर्रुखाबाद, कन्नौज और संभल में ही थोड़ी बहुत आलू की खुदाई हुई है, जबकि आलू की बड़ी बेल्ट के लिए मशहूर आगरा-अलीगढ़ में तो खुदाई भी शुरू नहीं हुई है. मंडी में 250 से 350 रुपये क्विंटल तक आलू बिक रहा है. जबकि लागत 600 रुपये से शुरू होती है. यही वजह है कि फर्रुखाबाद हो या आगरा-अलीगढ़, किसान पाकिस्तान-बांग्लादेश को आलू बेचने की छूट मांग रहे हैं.  

आलू कारोबारियों का कहना है कि पीले आलू के मुकाबले लाल आलू हमेशा 100 से 150 रुपये प्रति क्विंटल महंगा बिकता है और इस आलू को पाकिस्तान-बांग्लादेश के लोग बड़े चाव से खाते हैं. पीला आलू भी खूब खाया जाता है. जब दोनों देश को भारत से आलू जाता था तो पीलू आलू के मुकाबले लाल आलू 200 से 250 रुपये क्विंदटल तक महंगा बिकता था.

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एक्सपोर्ट की छूट मिल जाए तो फेंकने से बच जाएगा

फर्रुखाबाद की आलू मंडी के आढ़ती रामऔतार ने किसान तक से बात करते हुए कहा कि खरीदार न मिलने से आलू लागत से भी आधे रेट पर जा रहा है. थोड़ा ही सही. लेकिन, बीते साल के मुकाबले आलू ज्यादा भी हुआ है. सही दाम न मिलने से किसान परेशान है. उसके मुंह से बोल तक नहीं फूट रहे हैं. अगर ऐसे में सरकार पहले की तरह से पाकिस्तान और बांग्लादेश आलू भेजने की छूट दे दे तो किसान की जान बच सकती है. वरना हमारा अनुभव तो कहता है कि इस बार कहीं आलू सड़क पर फेंकना न पड़ जाए. 

सासनी, अलीगढ़ के आलू किसान विनोद ने बताया कि तीन-चार साल में आलू के साथ यह उलटफेर चलता ही है. बीते साल 50 किलो आलू का जो पैकेट हमने 600 से 700 रुपये बेचा था, उसके तो इस बार 400 रुपये मिलते हुए भी नहीं दिख रहे हैं. इसलिए अगर किसानों की जान बचानी है तो आलू एक्सपोर्ट करने की अनुमति देनी होगी.

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लाल ही नहीं पीला आलू भी पाक-बांग्लादेश की पसंद 

फर्रुखाबाद जिले में आने वाले मोहम्मदाबाद के आलू किसान सुरेन्द्र ने किसान तक को बताया कि काफी वक्त पहले तक पाकिस्तान को लाल आलू भेजा जाता था. फिर एकदम से पाक को आलू की सप्लाई बंद कर दी गई. कुछ समय पहले धीरे-धीरे बांग्लादेश को भी लाल आलू जाना बंद हो गया. असल में पाक और बांग्लादेश लाल आलू को इसलिए पसंद करते हैं कि एक तो यह दूसरी जगह के पीले आलू की तरह से चिकना नहीं होता है. इसमे हल्के से दाने यानि यह रबेदार होता है. 

दूसरा यह कि दूसरे आलूओं के मुकाबले यह थोड़ी देर से गलता है. पाक और बांग्लादेश के लोग इस आलू को मीट के साथ बनाते हैं. इसका फायदा यह होता है कि पकाने के दौरान लाल आलू मीट के साथ ही गलता है. जबकि पीला आलू मीट के साथ बनाने पर पहले गल जाता है और मीट बाद में गलता है. डिमांड के चलते पाक-बांग्लादेश से हमेशा इस आलू के मुंह मांगे दाम मिले हैं. पीले आलू को भी स्वाद के चलते खूब पसंद किया जाता है. 

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