Rajasthan: चुनाव हारीं दिव्या, क्या मदेरणा परिवार की राजनीति का हो गया है ट्रैजिक एंड?

Rajasthan: चुनाव हारीं दिव्या, क्या मदेरणा परिवार की राजनीति का हो गया है ट्रैजिक एंड?

2018 में पहली बार विधायक चुन कर आई दिव्या मदेरणा को विरासत में राजनीति मिली है. दिव्या मारवाड़ में खांटी जाट नेता और गांधी परिवार के बेहद नजदीकी नेता रहे परसराम मदेरणा की पोती हैं. यह वही परिवार है जो भंवरी देवी हत्याकांड के बाद पूरे देश में पहचाना जाने लगा. दिव्या के पिता महिपाल मदेरणा भंवरी केस में आरोपी थे.

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Rajasthan: चुनाव हारीं दिव्या, क्या मदेरणा परिवार की राजनीति का हो गया है ट्रैजिक एंड?  Rajasthan assembly election result

कभी मारवाड़ की राजनीति का धुरी रहे मदेरणा परिवार अब राजनीति के किसी अंधेरे कोने में सिमटता हुआ दिखाई दे रहा है. कांग्रेस पार्टी से ओसियां से चुनाव लड़ रही दिव्या मदेरणा चुनाव हार गई हैं. उन्हें बीजेपी के भैराराम चौधरी ने 2807 वोटों से हराया. विरासत में मिली राजनीति को दूसरी बार लड़ रही दिव्या संभाल नहीं पाईं और हार गईं. उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान अपने पिता महिपाल मदेरणा को लेकर कई भावुक भाषण दिए, लेकिन मतदाओं ने मदेरणा को नकार दिया. बता दें कि मदेरणा परिवार भंवरी देवी हत्याकांड के बाद राजनीतिक रूप से किनारे हो गया है. अब दिव्या के हारने से यह राजनीतिक खानदान किसी अंधेरे कोने में सिमट सा गया है. 

2018 में पहली बार विधायक चुन कर आई दिव्या मदेरणा को विरासत में राजनीति मिली है. दिव्या मारवाड़ में खांटी जाट नेता और गांधी परिवार के बेहद नजदीकी नेता रहे परसराम मदेरणा की पोती हैं. यह वही परिवार है जो भंवरी देवी हत्याकांड के बाद पूरे देश में पहचाना जाने लगा. दिव्या के पिता महिपाल मदेरणा भंवरी केस में आरोपी थे. इस केस के बाद मदेरणा परिवार की राजनीतिक साख काफी धूमिल हुई है. दिव्या अपने अंदाज से उस साख को वापस स्थापित करने की कोशिश करती हुई दिखती हैं. दिव्या अपने पहले ही कार्यकाल में अपने बेबाक अंदाज के कारण काफी चर्चित रही हैं. विधानसभा में उनके कुछ भाषण काफी प्रभावशाली रहे हैं. विपक्ष के साथ-साथ कई मौकों पर उन्होंने अपनी ही पार्टी और उसकी नीतियों को कटघरे में खड़ा किया है. विधानसभा में शेर-ओ-शायरी के साथ तल्ख लहजे में कड़े शब्दों में अपनी बात दिव्या रखती हैं. 

इस बार ओसियां से भाजपा ने उनके सामने भैराराम चौधरी को टिकट दिया है. पिछली बार दिव्या ने भैराराम को 27 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था. 

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दिव्या को विरासत में मिली राजनीति

दिव्या मदेरणा मारवाड़ के बड़े सियासी परिवार से ताल्लुक रखती हैं. उनके दादा परसराम मदेरणा कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे हैं. राजस्थान में व्यापक प्रभाव वाले जननेता होने के कारण वे गांधी परिवार के पसंदीदा नेताओं में शुमार थे. एक वक्त में वे मुख्यमंत्री पद के सबसे बड़े दावेदार भी माने जाते हैं. मदेरणा केन्द्र सरकार में मंत्री भी रहे हैं. दिव्या के पिता महिपाल मदेरणा भी राजस्थान सरकार में मंत्री रहे. उनकी मां लीला मदेरणा 25 साल से जोधपुर जिला कांग्रेस की अध्यक्ष हैं और फिलहाल वे जोधपुर की जिला प्रमुख हैं. दिव्या की राजनीति मदेरणा खानदान की तीसरी पीढ़ी की राजनीति है. 

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दिव्या मदेरणा का राजनीतिक सफर

दिव्या की पढ़ाई इंग्लैंड में हुई है. भारत लौटने के बाद दिव्या का राजनीति सफर साल 2010 से शुरू हुआ. 2010 में उन्होंने जिला परिषद जोधपुर का चुनाव लड़ा और पहले ही चुनाव में जीत हासिल की. साल 2018 में वे काउंसिल की मेंबर बनी और उसी साल उन्हें कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में जोधपुर ग्रामीण की ओसिया विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया. दिव्या के लिए यह चुनाव बड़ा और महत्वपूर्ण था क्योंकि उनके पिता और दादा इस सीट विधायक रह चुके हैं. भाजपा के भैराराम चौधरी को 27 हजार वोटों से हराते हुए दिव्या पहली बार विधायक बनीं. 

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