अभय सिंह चौटाला ने हरियाणा सरकार पर साधा निशाना (फाइल फोटो)इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के अध्यक्ष अभय सिंह चौटाला ने हरियाणा विधानसभा के 27 अप्रैल को प्रस्तावित विशेष सत्र को लेकर राज्य सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि सत्र का इस्तेमाल किसानों की समस्याओं पर चर्चा के लिए होना चाहिए था, न कि विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने के लिए. चौटाला ने आरोप लगाया कि गेहूं खरीद के दौरान मंडियों में लागू की गई बायोमेट्रिक सत्यापन जैसी नई शर्तों ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है. इन व्यवस्थाओं के कारण खरीद प्रक्रिया जटिल हो गई है और किसानों को अनावश्यक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
उन्होंने बताया कि INLD ने मंडियों में अपने कार्यकर्ताओं को तैनात कर किसानों की मदद के लिए शिकायत निवारण केंद्र शुरू किए हैं, ताकि किसी भी तरह की समस्या का तुरंत समाधान किया जा सके. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर निशाना साधते हुए चौटाला ने कहा कि सरकार को अपनी कमियों पर चर्चा करनी चाहिए, लेकिन इसके बजाय राजनीतिक एजेंडे को प्राथमिकता दी जा रही है.
उन्होंने महिला आरक्षण मुद्दे को भी अनावश्यक बताते हुए कहा कि जिस विषय पर लोकसभा में पहले ही फैसला हो चुका है, उसे राज्य स्तर पर उठाना व्यावहारिक नहीं है. इसके साथ ही उन्होंने जमीन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को लेकर भी चिंता जताई.
उन्होंने कहा कि किसानों को इसके लिए 503 रुपये की फीस देनी पड़ती है. वहीं, आवेदन खारिज होने पर यह फीस उन्हें वापस नहीं मिलती. चौटाला ने कहा कि तीन दिन की समय सीमा के साथ ऑनलाइन पोर्टल की तकनीकी दिक्कतें किसानों के लिए नई चुनौती बन रही हैं.
बता दें कि राज्य में मंडियों में गेहूं खरीदी के लिए जारी नए नियमों को लेकर किसान संगठन और विपक्षी कांग्रेस भी लगातार राज्य सरकार पर हमलावर हैं. पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी विभिन्न मंडियों का दौरा कर किसानों की 'परेशानी' का मुद्दा उठा रहे हैं. उन्होंने राज्य सरकार से इन फैसलों को वापस लेने की मांग की है, ताकि किसानों को लंबे इंतजार और दिक्कतों से छुटकारा मिल सके.
उधर, बीते दिन हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि राज्य में खिलौना उद्योग को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष इंडस्ट्रियल क्लस्टर विकसित किया जाएगा, जो हरियाणा इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2026 का अहम हिस्सा होगा. उन्होंने कहा कि 250 से 350 एकड़ में बनने वाला यह क्लस्टर निवेश आकर्षित करने, बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने और नवाचार को गति देने में मदद करेगा, साथ ही इससे राज्य की औद्योगिक पहचान मजबूत होगी और निर्यात बढ़ाकर देश की अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिलेगा. (पीटीआई)
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