मक्के का निर्यात घटाभारत में पहले प्याज और अब मक्के के मामले में भी हालात बदलते नजर आ रहे हैं. जहां भारत लंबे समय तक कई देशों को मक्का निर्यात करता रहा है, अब वही निर्यात घटता जा रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह देश में मक्के की बढ़ती घरेलू जरूरत बताई जा रही है.
अब तक भारत से मक्का मुख्य रूप से पशु आहार (फीड) बनाने के लिए कई एशियाई देशों में जाता था. बांग्लादेश भारत के मक्के का सबसे बड़ा खरीदार था. लेकिन इस साल तस्वीर बदल गई है. भारत से मक्के की सप्लाई कम होते ही ब्राजील ने मौका पकड़ लिया और बांग्लादेश का सबसे बड़ा मक्का निर्यातक बन गया है.
इस बदलाव के पीछे भारत का इथेनॉल अभियान अहम कारण माना जा रहा है. भारत सरकार ने पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का ई‑20 लक्ष्य हासिल कर लिया है और अब इसे आगे बढ़ाने की तैयारी चल रही है. इससे विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता कम होगी.
इथेनॉल बनाने के लिए टूटे चावल और गन्ने की चीनी के साथ‑साथ अब मक्का एक अहम विकल्प बनकर उभरा है. मक्के से इथेनॉल उत्पादन पर जोर बढ़ने के कारण भारत में इसकी मांग काफी बढ़ गई है. इसी वजह से सरकार और कारोबारी मक्के के निर्यात को सीमित कर रहे हैं.
भारत से मक्के की सप्लाई घटने का सीधा असर बांग्लादेश जैसे देशों पर पड़ा है, जो लंबे समय से भारत पर निर्भर थे. भारत के हटते ही ब्राजील ने इस खाली जगह को भर दिया और नंबर वन एक्सपोर्टर बन गया.
हालांकि भारत का मक्का विदेशी बाजारों में सस्ता मिलता था, जबकि ब्राजील का मक्का महंगा है. ऐसे में आने वाले दिनों में पूरे दक्षिण एशिया में फीड के दाम बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.
भारत की मौजूदगी से वैश्विक बाजार में मक्के के दामों में मुकाबला बना रहता था, जिससे कीमतों में स्थिरता रहती थी. अब भारत के पीछे हटने से इस स्थिरता पर असर पड़ सकता है और मक्के के रेट में उतार‑चढ़ाव बढ़ सकता है.
भारत दुनिया में मक्का उत्पादन के मामले में पांचवें स्थान पर है. 2023‑24 में भारत ने करीब 1.44 मिलियन टन मक्का का निर्यात किया, जिसकी कीमत लगभग 443.53 मिलियन अमेरिकी डॉलर रही.
भारत से मक्का मुख्य रूप से वियतनाम, नेपाल, बांग्लादेश, मलेशिया और थाइलैंड को भेजा जाता था. निर्यात होने वाले उत्पादों में पीला मक्का, मक्का स्टार्च और इंडस्ट्रियल ग्रिट्स शामिल हैं.
देश में मक्का उत्पादन में कर्नाटक, मध्य प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु, तेलंगाना, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश प्रमुख राज्य हैं. कुल मिलाकर, भारत का इथेनॉल कार्यक्रम देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए अहम है, लेकिन इसके चलते मक्का निर्यात घटने से पड़ोसी देशों और फीड इंडस्ट्री पर असर साफ दिखाई देने लगा है. आने वाले समय में मक्के के दाम और व्यापार दोनों पर सबकी नजर रहेगी.
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