धान खरीद में पंजाब को बड़ा झटका, 9.7% गिरावट... तेलंगाना, आंध्र और मध्य प्रदेश ने बढ़ाई हिस्सेदारी

धान खरीद में पंजाब को बड़ा झटका, 9.7% गिरावट... तेलंगाना, आंध्र और मध्य प्रदेश ने बढ़ाई हिस्सेदारी

देश की धान खरीद व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. जहां पंजाब में सरकारी धान खरीद 9.7 फीसदी घट गई है, वहीं तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने खरीद में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की है. विशेषज्ञों का मानना है कि धान खरीद का पारंपरिक भूगोल बदल रहा है और दक्षिणी राज्यों की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है.

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धान खरीद में पंजाब को बड़ा झटका, 9.7% गिरावट... तेलंगाना, आंध्र और मध्य प्रदेश ने बढ़ाई हिस्सेदारीधान खरीद (सांकेतिक तस्‍वीर)

देश में धान और चावल उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र माने जाने वाले पंजाब को इस साल सरकारी धान खरीद में बड़ा झटका लगा है. केंद्रीय पूल के लिए की गई खरीद के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में धान खरीद पिछले साल की तुलना में 9.7 प्रतिशत घटकर 116.13 लाख टन से 104.86 लाख टन रह गई है. इसके विपरीत तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने खरीद में बड़ी वृद्धि दर्ज कर अपनी स्थिति मजबूत की है.

आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि देश में धान खरीद का पारंपरिक भूगोल धीरे-धीरे बदल रहा है. लंबे समय तक सरकारी खरीद का केंद्र रहे पंजाब की हिस्सेदारी घट रही है, जबकि दक्षिण और मध्य भारत के राज्यों की भूमिका लगातार बढ़ रही है.

खरीद में गिरावट के बावजूद पंजाब टॉप राज्यों में शामिल

खाद्य निगम (FCI) के आंकड़ों के अनुसार, 1 अक्टूबर से 4 अगस्त तक पंजाब में 104.86 लाख टन धान की खरीद हुई, जबकि पिछले सीजन में यह 116.13 लाख टन थी. यह 9.7 प्रतिशत की गिरावट है.

पंजाब में क्यों गहराया खरीद संकट?

कृषि क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक पंजाब पिछले 25 वर्षों के सबसे गंभीर धान खरीद संकट का सामना कर रहा है. इस बार मौसम अनुकूल रहने के बावजूद खरीद प्रक्रिया में देरी और भंडारण संबंधी समस्याओं ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.

पंजाब में धान खरीद की व्यवस्था केंद्र सरकार, राज्य सरकार और भारतीय खाद्य निगम (FCI) के मिले जुले रोल से चलती है. एफसीआई न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर किसानों से धान खरीदता है, जिसके बाद उसका मिलिंग कर चावल तैयार किया जाता है और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत उसका भंडारण या वितरण किया जाता है.

लेकिन बीते एक दो साल में राज्य के चावल मिल मालिकों ने नई फसल के लिए पर्याप्त भंडारण क्षमता नहीं होने की बात कही है. उनका कहना है कि गोदामों में पहले से मौजूद गेहूं और धान का स्टॉक हटाए बिना नई फसल को रखना मुश्किल होगा.

राइस मिलर्स की नाराजगी ने बढ़ाई परेशानी

खरीद संकट उस समय और गहरा गया जब निजी राइस मिलर्स ने सरकारी धान को रखने में अनिच्छा दिखाई. इसके पीछे सीमित भंडारण क्षमता, राज्य सरकार की ओर से प्रदेश में बांटे गए कुछ हाइब्रिड धान किस्मों का एफसीआई मानकों पर खरा न उतरना और अनाज मंडियों में श्रमिकों और कमीशन एजेंटों से जुड़ी समस्याओं को प्रमुख कारण बताया जा रहा है.

इन समस्याओं का सीधा असर खरीद व्यवस्था पर पड़ा है, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा.

तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की मजबूत बढ़त

जहां पंजाब में खरीद घटी है, वहीं तेलंगाना ने सबसे शानदार प्रदर्शन करते हुए 22.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है. राज्य में धान खरीद 67.29 लाख टन से बढ़कर 82.18 लाख टन पहुंच गई.

आंध्र प्रदेश में भी खरीद में 54.6 प्रतिशत की बड़ी छलांग दर्ज हुई है. यहां खरीद 25.60 लाख टन से बढ़कर 39.59 लाख टन हो गई. यह वृद्धि बताती है कि दक्षिण भारत के राज्य अब केंद्रीय पूल के लिए धान आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र भी आगे

मध्य प्रदेश में धान खरीद 29.16 लाख टन से बढ़कर 34.67 लाख टन हो गई, जो 18.9 प्रतिशत की वृद्धि है. वहीं महाराष्ट्र ने 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज करते हुए खरीद को 10.16 लाख टन से 12.50 लाख टन तक पहुंचा दिया.

हरियाणा में भी 15.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई और खरीद 35.99 लाख टन से बढ़कर 41.58 लाख टन हो गई.

कुछ राज्यों में भी दिखी गिरावट

पंजाब के अलावा छत्तीसगढ़ में 6.4 प्रतिशत, तमिलनाडु में 5.4 प्रतिशत और बिहार में 4.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. हालांकि इन राज्यों की गिरावट पंजाब जितनी बड़ी नहीं रही.

बदल रहा है धान खरीद का नक्शा

देशभर में कुल धान खरीद 542.85 लाख टन से बढ़कर 571.14 लाख टन पहुंच गई, जो 5.2 प्रतिशत की वृद्धि दिखाती है. इसका मतलब यह है कि राष्ट्रीय स्तर पर खरीद बढ़ी है, लेकिन इस वृद्धि का लाभ पंजाब को नहीं मिला.

विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते उत्पादन, बेहतर खरीद व्यवस्था और सरकारी समर्थन के कारण तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और मध्य भारत के कुछ राज्यों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है. दूसरी ओर, पंजाब को भंडारण, मिलिंग और खरीद प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियों का समाधान जल्दी करना होगा, अन्यथा देश की सरकारी धान खरीद व्यवस्था में उसकी पारंपरिक बढ़त और कमजोर पड़ सकती है.

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