Tomato Price: खुदरा बाजार में टमाटर महंगा, थोक मंडी में कौड़ियों का भाव! किसानों ने लगाई रेट फिक्‍स करने की गुहार

Tomato Price: खुदरा बाजार में टमाटर महंगा, थोक मंडी में कौड़ियों का भाव! किसानों ने लगाई रेट फिक्‍स करने की गुहार

छत्रपति संभाजीनगर में टमाटर उत्पादक किसान कम मंडी भाव और बारिश की कमी से परेशान हैं. किसानों को मंडी में महज 5 से 6 रुपये किलो का भाव मिल रहा है, जबकि बीज, खाद, दवाइयों, मजदूरी और परिवहन की लागत लगातार बढ़ रही है.

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खुदरा बाजार में टमाटर महंगा, थोक मंडी में कौड़ियों का भाव! किसानों ने लगाई रेट फिक्‍स करने की गुहारकिसान प्रवीण थोटे

छत्रपति संभाजीनगर जिले में टमाटर की खेती करने वाले किसान कम मंडी भाव और बारिश की कमी के चलते परेशानी का सामना कर रहे हैं. स्थिति यह है कि खुदरा बाजार में उपभोक्ताओं को टमाटर के लिए काफी ज्‍यादा कीमत चुकानी पड़ रही है, जबकि कृषि उपज मंडी में किसानों को इतना भाव भी नहीं मिल रहा कि उनकी उत्पादन लागत निकल सके. किसानों ने सरकार से उत्‍पादन लागत निकलने जितना रेट फिक्‍स करने की मांग की है.

मंडी में 5 से 6 रुपये किलो का भाव

जिले की पैठण तहसील के दादेगांव हजारे गांव के किसान प्रवीण थोटे ने टमाटर की खेती की है. उन्‍होंने कहा कि मंडी में टमाटर का भाव करीब 5 से 6 रुपये प्रति किलो मिल रहा है. इतने कम दाम में बीज, खाद, दवाइयों, मजदूरी और परिवहन पर हुआ खर्च निकालना मुश्किल हो गया है.

खेती का खर्च लगातार बढ़ रहा

किसान प्रवीण थोटे ने बताया कि टमाटर की फसल तैयार करने में पौधों, खाद और दवाइयों पर बड़ी रकम खर्च होती है. अब तक उनके खेती में करीब 50 से 60 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं. इसके बावजूद फसल बेचने के समय बाजार में अपेक्षित भाव नहीं मिल रहा है.

महंगी इनपुट लागत से बढ़ी परेशानी

वहीं, गांव के अन्‍य किसानों का भी कहना है कि कृषि उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली खाद और दवाइयों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं. दूसरी ओर, फसल तैयार होने के बाद मंडी में मिलने वाला भाव लागत के मुकाबले काफी कम है. ऐसे में बिक्री के बाद किसानों के पास आय के तौर पर बहुत कम रकम बच रही है.

किसानों ने सरकार से मांगा तय भाव

किसानों ने सरकार से कृषि उपज के लिए निश्चित भाव तय करने की मांग की है. उनका कहना है कि किसानों को उनकी उपज का ऐसा मूल्य मिलना चाहिए, जिससे कम से कम उत्पादन पर हुआ खर्च निकल सके. कम मंडी भाव की स्थिति में उनका खेती जारी रखना मुश्किल हो रहा है. (इसरारुद्दीन चिश्‍ती की रिपोर्ट)

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