फसल नुकसान बताते हुए किसान उत्तर और पूर्वी भारत के कई राज्यों में किसानों को आंधी-तूफान और भारी बारिश से काफी नुकसान हुआ है. उत्तर प्रदेश में अयोध्या समेत कई जिले इसकी चपेट में आए हैं. लगातार बारिश और तेज हवाओं की वजह से खेतों में धान, गन्ना, गोभी, केला सहित कई खड़ी फसलें प्रभावित हुई हैं. अयोध्या के तारुन विकासखंड के करनाईपुर गांव के किसान राज बहादुर वर्मा ने बताया कि उनके खेतों में धान, गन्ना और केले की फसल को भारी नुकसान हुआ है.
किसान राज बहादुर वर्मा ने बताया कि उनके खेत में मालवीय सुगंधा 156 धान की फसल लगी थी. फसल में बालियां निकलनी शुरू ही हुई थीं, लेकिन लगातार बारिश के बाद पूरा प्लॉट पानी में डूब गया. खेत में करीब छह इंच तक पानी भरा हुआ है.
उन्होंने बताया कि धान की बालियों के ऊपर तक पानी पहुंच गया है. खेत में पानी भरे रहने से धान की बालियों और दानों के सड़ने का खतरा है. फसल जिस अवस्था में पहुंच चुकी थी, उसमें अब धान की पैदावार को लेकर काफी नुकसान की आशंका है.
धान के साथ किसान के गन्ने के खेत को भी नुकसान हुआ है. राज बहादुर वर्मा ने बताया कि तेज हवा और बारिश के कारण गन्ने का पूरा प्लॉट धराशायी हो गया. उन्होंने गन्ने की फसल को सहारा देने के लिए कई बार बांधने की प्रक्रिया भी की थी, लेकिन तेज तूफान के सामने फसल टिक नहीं सकी.
किसान के मुताबिक, गन्ना गिरने के बाद उसे दोबारा खड़ा कराने में अतिरिक्त लागत आएगी. खेत में मिट्टी में नमी अधिक होने की वजह से फिलहाल गन्ने को उठाना भी मुश्किल है. अगर गन्ना लंबे समय तक जमीन पर पड़ा रहा तो गांठों के आसपास फसल में फटने और दूसरी तरह के नुकसान का खतरा बढ़ सकता है.
बारिश और तेज हवा से केले की फसल को भी नुकसान पहुंचा है. किसान ने बताया कि केले के पौधों को सहारा देने के लिए खेत में बांस लगाए गए थे और डोरी भी बांधी गई थी. इसके बावजूद तेज हवा और बारिश के कारण केले के कई पौधे जमीन पर गिर गए. कुछ पौधों पर केले की घारियां तैयार हो चुकी थीं, जबकि कुछ अभी पूरी तरह पकने की स्थिति में भी नहीं पहुंची थीं. पौधों के गिरने के बाद इन फलों की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है.
राज बहादुर वर्मा ने बताया कि केले के पौधे गिरने के बाद फल की बिक्री भी चुनौती बन जाती है. मंडी में गिरे हुए या प्रभावित केले के लिए खरीदार अक्सर कम कीमत लगाते हैं. ऐसे में फसल को हुए नुकसान के साथ किसानों को बाजार में भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. किसान ने बताया कि कुछ केले की घारियां अभी छोटी हैं और पूरी तरह तैयार नहीं हुई थीं. ऐसे में उन्हें यह भी चिंता है कि गिरने के बाद इनका सही दाम मिल पाएगा या नहीं.
राज बहादुर वर्मा के खेत में धान, गन्ना और केले की तीनों फसलों को बारिश और तेज हवाओं से नुकसान हुआ है. धान के खेत में पानी भरने से फसल के सड़ने का खतरा है, जबकि गन्ना और केले के पौधे तेज हवा के कारण जमीन पर गिर गए हैं. किसान का कहना है कि इस बार बारिश से लगातार नुकसान ही नुकसान हुआ है.
इधर, जिले के बसवार खुर्द गांव के किसान हरिशचंद्र चौरसिया ने बताया कि उन्होंने करीब दो एकड़ में गोभी की फसल लगाई है, लेकिन खेत में लगातार पानी भरने से फसल को भारी नुकसान हो रहा है. पानी निकालने के लिए इंजन लगाया गया है, इसके बावजूद खेत से पानी पूरी तरह नहीं निकल पा रहा है.
पानी भरने के कारण गोभी के पौधों की पत्तियां गिरने लगी हैं, जबकि फसल में फूल भी आ चुका है. किसान के मुताबिक धूप निकलने पर पौधों की पत्तियां और तेजी से गिरने की आशंका है, जिससे पूरी फसल खराब हो सकती है. उन्होंने बताया कि गोभी की खेती में अब तक करीब 2 से 3 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं. किसान ने सरकार से फसल नुकसान का मुआवजा देने की मांग की है.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today