प्याज पर सरकार का नया दांव: MAPP बढ़कर 1650 रुपये, किसानों को राहत या राहत से दूर?

प्याज पर सरकार का नया दांव: MAPP बढ़कर 1650 रुपये, किसानों को राहत या राहत से दूर?

सरकार ने प्याज के लिए मिनिमम एश्योर्ड प्रोक्योरमेंट प्राइस (MAPP) बढ़ाकर 1650 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है, जो 13 जून 2026 से लागू होगा. हालांकि किसान इसे अपर्याप्त बताते हुए अधिक कीमत की मांग कर रहे हैं.

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प्याज पर सरकार का नया दांव: MAPP बढ़कर 1650 रुपये, किसानों को राहत या राहत से दूर?सरकार ने प्याज खरीद का रेट बढ़ाया

सरकार ने प्याज के लिए 'मिनिमम एश्योर्ड प्रोक्योरमेंट प्राइस' (MAPP) को बदलते हुए 1,650 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है. एमएपीपी भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की तरह है जो किसानों को उनकी उपज खरीद के लिए दिया जाता है. एमएपीपी के तहत किसानों को प्याज के लिए एक निश्चित कीमत मिलती है जिसे केंद्र सरकार की ओर से तय किया जाता है. केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बताया कि यह नई कीमत, मंडी के मौजूदा भाव और स्टोरेज-ग्रेड प्याज की खास क्वालिटी की जरूरतों पर आधारित है.

प्याज किसानों को बेहतर रिटर्न दिलाने के लिए उपभोक्ता मामलों के विभाग (DoCA) और खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के अधिकारियों के साथ हुई समीक्षा बैठक में यह फैसला लिया गया.

13 जून से प्याज खरीद के नए रेट लागू

प्रह्लाद जोशी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "कल DoCA के अधिकारियों के साथ एक बैठक की, जिसका मकसद प्याज की खरीद को मजबूत करना और हमारे किसानों को बेहतर रिटर्न सुनिश्चित करना था. मंडी के मौजूदा भाव और स्टोरेज-ग्रेड प्याज की क्वालिटी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, 'मिनिमम एश्योर्ड प्रोक्योरमेंट प्राइस' (MAPP) को संशोधित कर 1,650 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जो 13 जून 2026 से लागू होगा. खरीद प्रक्रिया को बाजार की स्थितियों के हिसाब से ज्यादा बेहतर बनाने के लिए कीमत तय करने के तरीके में भी सुधार किया गया है."

महाराष्ट्र भारत में प्याज का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है, और कीमतों में बार-बार होने वाले उतार-चढ़ाव लंबे समय से किसानों, खासकर नासिक इलाके के किसानों के लिए भारी परेशानी का कारण रहे हैं. इस इलाके के किसानों में प्याज की कीमतों को लेकर घोर नाराजगी है और वे समय-समय पर इसके लिए आंदोलन करते रहे हैं. केंद्र की इस नई खरीद कीमत से किसानों को राहत मिलने की उम्मीद कम है क्योंकि वे 3000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से एमएपीपी की मांग कर रहे हैं. अभी यह रेट 1580 रुपये था जिसे बढ़ाकर 1650 रुपये किया गया है.

प्याज खरीद के नियमों में ढील

अभी हाल में केंद्र सरकार ने प्याज की खरीद के लिए साइज और क्वालिटी से जुड़े नियमों में ढील दी. इसके तहत, स्वीकार्य साइज की रेंज को 45-65 mm से बढ़ाकर 35-70 mm कर दिया गया और दाग-धब्बों, रंग में अंतर, छिलके की खराबी और धूप से होने वाले मामूली नुकसान से जुड़े नियमों में भी ढील दी गई. इस फैसले का स्वागत करते हुए किसान नेताओं ने कहा कि किसानों के सामने मुख्य समस्या खरीद के लिए पात्रता की नहीं, बल्कि उन्हें मिल रही कम कीमतों की है.

महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के नासिक जिला अध्यक्ष जयदीप भदाणे ने कहा, "नियमों में ढील तो दी गई है, लेकिन किसानों को अब भी नुकसान हो रहा है. असली सवाल यह है कि प्याज की कीमतें कब बढ़ेंगी." एसोसिएशन के अध्यक्ष भरत दिघोले ने कहा कि प्याज के उत्पादन की औसत लागत लगभग 1,800 रुपये प्रति क्विंटल है और किसानों को लागत से कम कीमत पर प्याज बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.

दिघोले ने दावा किया, "जब किसान उत्पादन लागत से कम कीमत पर प्याज बेचने को मजबूर होते हैं, तो वे आर्थिक तंगी में फंस जाते हैं. केंद्रीय खरीद एजेंसियों द्वारा घोषित दरें किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसी हैं."

महाराष्ट्र सरकार ने बनाई सब-कमेटी

दूसरी ओर, महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को प्याज की गिरती कीमतों से निपटने और राज्य के प्याज सेक्टर को मजबूत करने के लिए तुरंत और लंबे समय के उपाय सुझाने के मकसद से एक एक्सपर्ट सब-कमेटी बनाई. यह सब-कमेटी, प्याज किसानों के लिए उपाय सुझाने के मकसद से अप्रैल में कोऑपरेशन, मार्केटिंग और टेक्सटाइल डिपार्टमेंट की ओर से बनाई गई सेक्रेटरी-लेवल कमेटी के तहत बनाई गई है.

मंगलवार को जारी एक सरकारी आदेश (GR) में कहा गया है कि यह पैनल प्याज की कीमतों में गिरावट के कारणों की जांच करेगा, पिछले सात-आठ वर्षों में केंद्र की प्याज निर्यात नीति के असर का आकलन करेगा और फसल की वैल्यू चेन को बेहतर बनाने के उपाय सुझाएगा.

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