अब सुरक्षित रहेंगे पारंपरिक बीजभारत में जलवायु परिवर्तन का असर खेती-किसानी पर लगातार बढ़ता जा रहा है. कभी बेमौसम बारिश, कभी लंबे समय तक सूखा और कभी बढ़ता तापमान किसानों के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर रहा है. ऐसे समय में देशी और पारंपरिक बीजों का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है. इन्हीं बीजों के संरक्षण और किसानों तक उनकी पहुंच को तय करने के लिए भारत सरकार के अंतर्गत भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने एक नया भारतीय मानक IS 20201:2026–सामुदायिक बीज बैंक प्रबंधन जारी किया है.
यह नया मानक देशभर में चलाई जा रही सामुदायिक बीज बैंकों के लिए एक व्यवस्थित और वैज्ञानिक ढांचा उपलब्ध कराएगा. इसका उद्देश्य देशी बीजों को सुरक्षित रखना, उनकी क्वालिटी बनाए रखना और किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अच्छे बीज उपलब्ध कराना है.
भारत खेती किसानी पर निर्भर यानी कृषि प्रधान देश है, जहां हजारों वर्षों से किसान अलग-अलग प्रकार की पारंपरिक फसलों और बीजों को बचाते आए हैं. इन देशी बीजों में कई विशेष गुण पाए जाते हैं, जैसे सूखा सहन करने की क्षमता, रोगों से लड़ने की ताकत और बेहतर पोषण मूल्य. लेकिन आधुनिक खेती और बदलते मौसम के कारण कई पारंपरिक बीज किस्में धीरे-धीरे खत्म होती जा रही हैं. ऐसे में सामुदायिक बीज बैंक इन बीजों को सुरक्षित रखने और अगली पीढ़ियों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकते हैं.
नए मानक के लागू होने से किसान स्थानीय स्तर पर क्वालिटी वाले बीजों को संग्रहित, संरक्षित और आपस में साझा कर सकेंगे. इससे उन्हें हर सीजन में महंगे बीज खरीदने पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. इसके अलावा स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुसार तैयार बीज किसानों को बेहतर उत्पादन देने में मदद करेंगे। इससे खेती की लागत कम होगी और फसल खराब होने का जोखिम भी घटेगा.
BIS द्वारा जारी इस मानक में बीज बैंक संचालन के पूरे सिस्टम को शामिल किया गया है. इसमें बीजों का संग्रह, भंडारण, सफाई, सुखाने, क्वालिटी जांच, अंकुरण क्षमता परीक्षण, दस्तावेजीकरण, जोखिम प्रबंधन और बीजों के पुनर्जनन जैसी प्रक्रियाओं के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं. इससे बीज बैंकों के संचालन में पारदर्शिता बढ़ेगी. साथ ही किसानों को भरोसेमंद और बेहतर क्वालिटी वाले बीज उपलब्ध हो सकेंगे.
यह मानक केंद्र सरकार की उन पहलों को भी मजबूती देगा, जिनका उद्देश्य कृषि जैव विविधता का संरक्षण और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (NFSNM) के तहत सामुदायिक बीज बैंक स्थापित करने के लिए 50 लाख रुपये तक की एकमुश्त सहायता का प्रावधान भी किया गया है. इसके अलावा पादप किस्म और किसान अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2001 और जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत भी देशी बीजों के संरक्षण को कानूनी सुरक्षा दी गई है.
इस मानक को तैयार करने में ICAR-राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (NBPGR), राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण, पादप किस्म और किसान अधिकार संरक्षण प्राधिकरण, रायथु साधिकर संस्था और BAIF विकास अनुसंधान फाउंडेशन सहित कई संस्थानों का सहयोग लिया गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह मानक किसानों, सहकारी समितियों और कृषि संगठनों को देशी बीजों के संरक्षण के लिए एक मजबूत दिशा देगा.
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