जल संकटछत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले से सामने आई ये तस्वीरें केवल पानी की कमी नहीं, बल्कि ग्रामीणों की बेबसी की कहानी बयां कर रही हैं. ग्राम पंचायत लोहारी के नवापारा में हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि लोग एक लगभग सूख चुके कुएं में उतरकर बूंद-बूंद पानी जुटाने को मजबूर हैं. कभी पूरे गांव की प्यास बुझाने वाले कुएं आज खुद पानी के लिए तरस रहे हैं. हालात ऐसे हो गए हैं कि भीषण गर्मी और लगातार गिरते जलस्तर ने करीब 500 की आबादी वाले इस गांव में पेयजल संकट खड़ा कर दिया है, जहां हर दिन पानी की तलाश ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है.
लगातार 40 से 42 डिग्री तापमान और बारिश की कमी के चलते गांव के अधिकांश कुओं का जलस्तर लगभग खत्म चुका है. कई कुएं सूखने की कगार पर हैं, पीने के पानी की व्यवस्था नहीं होने से महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है. एक ग्रामीण ने बताया कि जिस तरह पानी से बाहर निकलने पर मछली तड़पती है, उसी तरह हम लोग पानी के लिए तड़प रहे हैं. कुएं सूख गए हैं, इसलिए पीने के पानी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है.
एक तरफ सरकार जल संरक्षण और हर घर जल जैसी योजनाओं के दावे कर रही है, तो दूसरी तरफ ये तस्वीरें जमीनी हकीकत बयां कर रही हैं. सवाल यह है कि भीषण गर्मी के इस दौर में जब ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तब राहत और वैकल्पिक जल व्यवस्था के इंतजाम आखिर कहां हैं.
नवापारा गांव की रहने वाली कौशल्या ने बताया कि पूरे परिवार की पानी की जरूरत इसी कुएं से पूरी होती है. पानी भरने के लिए उन्हें एक से दो घंटे तक इंतजार करना पड़ता है. कई बार दिन में भी और रात में भी घंटों इंतजार करना पड़ता है, तब जाकर कुछ पानी मिल पाता है. उन्होंने बताया कि गांव के 6 से 7 अन्य कुएं पूरी तरह सूख चुके हैं, जिससे लोगों की परेशानी और बढ़ गई है. कौशल्या के अनुसार, सरपंच और अधिकारियों को कई बार समस्या बताई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई. हालात ऐसे हैं कि करीब एक घंटे इंतजार करने के बाद मुश्किल से 5 से 6 लीटर पानी ही निकल पाता है.
इसी गांव की एक दूसरी महिला प्रेम कुंवर ने बताया कि गांव के लोग इसी कुएं से पानी निकालकर अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि पानी की समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है. कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया. प्रेम कुंवर के मुताबिक, जब रात में पानी की जरूरत पड़ती है तो उन्हें रात 2 से 3 बजे तक कुएं पर आना पड़ता है और धीरे-धीरे रिसकर जमा हुए पानी को निकालकर घर ले जाना पड़ता है. उन्होंने बताया कि गांव में पानी की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है और अधिकांश कुएं पूरी तरह सूख चुके हैं, जिससे ग्रामीणों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.
ग्राम पंचायत लोहारी के सरपंच ने बताया कि नवापारा पूरी तरह जल संकट से जूझ रहा है. गांव के पांच से छह कुएं लगभग सूख चुके हैं, इसलिए पिछले एक महीने से पंचायत की ओर से टैंकर के माध्यम से पानी पहुंचाया जा रहा है. हालांकि, कुछ दूरस्थ इलाकों तक पानी पहुंचाने में दिक्कत आ रही है. उन्होंने बताया कि ग्रामीण सुबह-सुबह कुएं पर पहुंचकर पानी भरने को मजबूर हैं. साथ ही, पीएमजीएसवाई सड़क निर्माण के दौरान कई जगहों पर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से भी समस्या बढ़ी है.
वहीं, जिला कलेक्टर संतन देवी जग्गे ने कहा कि यदि गांव में पेयजल संकट है और लोगों को कुएं में उतरकर पानी भरना पड़ रहा है, तो प्रशासन इस मामले की जांच कराएगा. उन्होंने आश्वासन दिया कि अधिकारियों को मौके पर भेजकर स्थिति का आकलन किया जाएगा और समस्या के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे. (धीरेन्द्र विश्वकर्मा की रिपोर्ट)
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