मक्के की कीमत को लेकर बड़ा अनुमान, 2700 रुपये तक पहुंच सकता है भाव

मक्के की कीमत को लेकर बड़ा अनुमान, 2700 रुपये तक पहुंच सकता है भाव

तमिलनाडु में मक्का किसानों के लिए अहम खबर है. तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय के अनुमान के मुताबिक, फसल कटाई के दौरान मक्के का भाव करीब 2,700 रुपये प्रति क्विंटल रह सकता है. हालांकि, कीमतों पर मौसम और बिहार समेत दूसरे राज्यों से मक्के की आवक का असर पड़ सकता है. 

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मक्के की कीमत को लेकर बड़ा अनुमान, 2700 रुपये तक पहुंच सकता है भावमक्के की कीमत (फाइल फोटो)

तमिलनाडु में मक्का किसानों के लिए अहम खबर है. तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU) के पूर्वानुमान के मुताबिक, फसल कटाई के दौरान मक्के का भाव खेत के स्तर पर करीब 2,700 रुपये प्रति क्विंटल रह सकता है. हालांकि, यह केवल अनुमान है. बाजार में मक्के की कीमत आगे कितनी रहेगी, यह दूसरे राज्यों से आने वाली मक्का की मात्रा और मौसम की स्थिति पर निर्भर करेगा.

बाजार भाव का विश्लेषण करके लगाया अनुमान

तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय के कृषि अर्थशास्त्र विभाग और कृषि और ग्रामीण विकास अध्ययन केंद्र (CARDS) के तहत काम करने वाले बाजार सूचना केंद्र DEMIC ने मक्के की कीमतों का अनुमान लगाया है. इसके लिए उडुमलपेट बाजार में पिछले 15 साल के भाव का विश्लेषण किया गया और बाजार सर्वेक्षण भी किया गया. इस रिसर्च के आधार पर विश्वविद्यालय ने अनुमान जताया है कि कटाई के मौसम में किसानों को खेत के स्तर पर मक्के का भाव लगभग 2,700 रुपये प्रति क्विंटल मिल सकता है. हालांकि, किसानों को इस अनुमान को तय भाव नहीं मानना चाहिए. वास्तविक कीमत बाजार की मांग, आपूर्ति और आवक के हिसाब से बदल सकती है.

बिहार से आने वाला मक्का तय करेगा बाजार का रुख

तमिलनाडु में मक्के की कीमतों पर बिहार से आने वाली फसल का खास असर पड़ सकता है. इसके अलावा मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से भी मक्के की आपूर्ति होती है. यदि इन राज्यों से बाजार में अधिक मक्का पहुंचता है, तो कीमतों पर दबाव पड़ सकता है. वहीं, आपूर्ति कम रहने पर भाव में बदलाव देखने को मिल सकता है. इसी वजह से कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों को सलाह दी है कि वे फसल बेचने का फैसला लेने से पहले बाजार के मौजूदा भाव और मंडियों में मक्के की आवक पर नजर रखें.

बारिश की कमी से मक्के की पैदावार पर असर! 

मक्के की कीमतों को प्रभावित करने वाला एक बड़ा कारण मौसम भी है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के मुताबिक, दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में उत्तर-पूर्वी मॉनसून के दौरान सामान्य से कम बारिश हो सकती है. अगर बारिश में कमी रहती है, तो इससे मक्के की फसल और बाजार में इसकी उपलब्धता प्रभावित हो सकती है. तमिलनाडु में करीब 5.4 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मक्के की खेती होती है और लगभग 33 लाख टन उत्पादन होता है. राज्य के सलेम, नमक्कल, पेरम्बलुर, अरियालुर, विल्लुपुरम और तिरुप्पुर प्रमुख मक्का उत्पादक जिले हैं.

पशु आहार और ईंधन में बढ़ रही मक्के की मांग

मक्का अब केवल खाने के लिए ही इस्तेमाल नहीं होता. पशुओं के चारे, स्टार्च बनाने और ईंधन में मिलाए जाने वाले इथेनॉल जैसे उत्पादों के लिए भी इसकी मांग रहती है. इन क्षेत्रों में मांग बढ़ने से मक्के के बाजार पर असर पड़ सकता है. कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तीसरे अग्रिम अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2025-26 में भारत में लगभग 144.08 लाख हेक्टेयर क्षेत्र से 550.93 लाख टन मक्के का उत्पादन हुआ. मध्य प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, बिहार और आंध्र प्रदेश देश के प्रमुख मक्का उत्पादक राज्यों में शामिल हैं. 

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