अनाज मंडी में धान बेचने को तरस रहे किसान, MSP से कम दाम और खरीद में देरी से बढ़ी परेशानी

अनाज मंडी में धान बेचने को तरस रहे किसान, MSP से कम दाम और खरीद में देरी से बढ़ी परेशानी

करनाल की अनाज मंडी में किसान अपनी धान की फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बेचने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. कई किसान पिछले तीन से चार दिनों से मंडी में उपज लेकर बैठे हैं, लेकिन खरीद नहीं हो रही. किसानों का आरोप है कि MSP 2461 रुपये प्रति क्विंटल होने के बावजूद उनकी फसल 2100 से 2200 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर खरीदी जा रही है. मंडी में अव्यवस्थाओं और खरीद में देरी से किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं.

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अनाज मंडी में धान बेचने को तरस रहे किसान, MSP से कम दाम और खरीद में देरी से बढ़ी परेशानीकरनाल मंडी में धान बेचने के लिए किसान परेशान

हरियाणा के करनाल जिले की अनाज मंडियों में धान खरीद को लेकर किसानों की परेशानियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं. सरकार की ओर से धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2461 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, लेकिन किसानों का आरोप है कि उनकी फसल MSP से काफी कम कीमत पर खरीदी जा रही है. कई किसान पिछले तीन से चार दिनों से मंडी में अपनी फसल लेकर बैठे हैं, लेकिन खरीद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही.

किसानों का कहना है कि उनकी फसल की नमी निर्धारित मानकों के अनुरूप है, इसके बावजूद खरीद एजेंसियां कभी नमी तो कभी काले दाने का हवाला देकर धान खरीदने से बच रही हैं. इससे किसानों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है.

मंडी में व्यवस्था नहीं, खुले में पड़ी किसानों की फसल

पुंडरक गांव से दो ट्रॉलियां धान लेकर आए किसान फतेह सिंह ने मंडी प्रशासन पर अव्यवस्था का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि मंडी के शेडों के नीचे व्यापारियों का खरीदा हुआ माल रखा गया है, जबकि किसानों की फसल खुले आसमान के नीचे पड़ी हुई है.

फतेह सिंह का कहना है कि यदि बारिश, तूफान या तेज आंधी आती है तो किसानों की फसल खराब हो सकती है. पहले ही खेतों में बारिश के कारण किसानों को नुकसान झेलना पड़ा है और अब मंडी में भी उन्हें उचित दाम नहीं मिल रहे.

उन्होंने बताया कि उनकी पीआर-14 धान की फसल 2200 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर खरीदी गई, जो MSP से करीब 300 रुपये कम है. किसान का आरोप है कि मंडी में कोई भी व्यापारी पीआर-14 धान के लिए 2200 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक का भाव नहीं दे रहा. उन्होंने कहा कि खरीददार कभी काले दाने का बहाना बनाते हैं तो कभी नमी अधिक होने की बात कहते हैं, जबकि उनकी फसल पूरी तरह सूखी हुई है.

फतेह सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश से आने वाली धान की फसल का काम कुछ आढ़ती आसानी से करवा रहे हैं, जबकि स्थानीय किसानों को परेशान किया जा रहा है.

चार दिन से मंडी में बैठे किसान, नहीं हो रही खरीद

शेखूपुरा गांव के किसान कुलदीप अपनी आठ एकड़ की धान की फसल लेकर करनाल मंडी पहुंचे हैं. उन्होंने बताया कि उन्हें मंडी में आए हुए चार दिन हो चुके हैं, लेकिन अब तक उनकी फसल की खरीद नहीं हुई.

कुलदीप ने कहा कि उनकी फसल पूरी तरह अच्छी गुणवत्ता की है और बारिश से कोई नुकसान भी नहीं हुआ, लेकिन इसके बावजूद खरीद प्रक्रिया में देरी की जा रही है. उन्होंने बताया कि इससे पहले लाई गई उनकी दो ढेरियां 2100 और 2200 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदी गई थीं, जो MSP से काफी कम हैं.

किसान का कहना है कि खेतों में फसल सुरक्षित रही, लेकिन मंडी में लंबे समय तक खुले में पड़े रहने से फसल खराब होने का खतरा बढ़ गया है. उन्होंने कहा कि किसान आर्थिक संकट और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है.

खरीद और उठान के सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के अनुसार करनाल जिले की मंडियों में अब तक 5 लाख 50 हजार 840 मीट्रिक टन धान की आवक दर्ज की गई है. इनमें से 2 लाख 64 हजार 637 मीट्रिक टन धान का उठान किया जा चुका है.

हालांकि धान सीजन आधे से अधिक गुजर चुका है, लेकिन किसानों की मुख्य समस्याएं अभी भी बरकरार हैं. खरीद में देरी, MSP से कम दाम और मंडी की व्यवस्थाओं को लेकर किसान लगातार सवाल उठा रहे हैं.

अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन और सरकार किसानों की इन समस्याओं का समाधान कब तक करती है और क्या सभी किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिल पाता है या नहीं.

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