मक्का के भाव में गिरावट से किसान परेशानखरीफ सीजन 2025 में बुवाई के वक्त बड़ी संख्या में किसानों ने कपास और सोयाबीन जैसी फसलों को छोड़कर मक्का की ओर रुख किया था. इसकी वजह भी साफ थी कि उन्हें बेहतर रिटर्न की उम्मीद थी, क्योकि मक्का की बढ़ती मांग और सरकार की तरफ से इथेनॉल, फीड और स्टार्च इंडस्ट्री को लेकर दिए जा रहे सकारात्मक संकेत उन्हेंं सुरक्षित भाव के सपने दिखा रहे थे. लेकिन नई फसल आते ही हालात पलट गए. अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच मक्का के दाम ऐसे गिरे कि अब किसान इस फसल में भी लगातार घाटा झेलने को मजबूर हैं.
देशभर के प्रमुख मक्का उत्पादक राज्यों में किसानों को उपज का सही दाम नहीं मिल पा रहा है. मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र सहित ज्यादातर राज्यों में मक्का के भाव बेहद निराशाजनक बने हुए हैं, जिससे कई जगह किसानों की लागत तक नहीं निकल पा रही है. खरीफ मार्केटिंग सीजन 2025-26 में मक्का किसानों को जिस बेहतर दाम की उम्मीद थी, वह अब तक पूरी होती नहीं दिख रही है. सरकार ने खरीफ मार्केटिंग सीजन 2025-26 के लिए मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2400 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है.
वहीं, कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) के मुताबिक, मक्का की औसत लागत लगभग 1508 रुपये प्रति क्विंटल बैठती है. MSP का मकसद किसानों को लागत से कम से कम 50 प्रतिशत अधिक रिटर्न देना है, लेकिन मौजूदा बाजार भाव इस फॉर्मूले से काफी पीछे चल रहे हैं. महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की कुछ मंडियों में जनवरी के दौरान मक्का का भाव 1400 रुपये प्रति क्विंटल और उससे भी नीचे तक दर्ज किया गया, जिससे किसानों की लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है.
अगर अक्टूबर 2025 से दामों के ट्रेंड को देखें तो औसत थोक भाव 2127.80 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जो MSP से करीब 270 रुपये कम था. नवंबर 2025 में औसत भाव मामूली बढ़त के साथ 2151.57 रुपये पर पहुंचा, लेकिन यह भी MSP से लगभग 250 रुपये नीचे रहा. दिसंबर 2025 में भी कोई खास सुधार नहीं दिखा और औसत थोक भाव 2150.38 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया. यानी तीन महीनों में दाम लगभग स्थिर जरूर रहे, लेकिन MSP के आसपास भी नहीं पहुंच पाए.
असली चिंता की वजह सालाना गिरावट यानी Year-on-Year ट्रेंड है. दिसंबर 2025 में औसत मक्का भाव दिसंबर 2024 के मुकाबले करीब 300 रुपये प्रति क्विंटल कम रहे. अक्टूबर 2025 में औसत भाव अक्टूबर 2024 से लगभग 312 रुपये नीचे था, जबकि नवंबर 2025 में भी सालाना आधार पर करीब 258 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई.
बड़े उत्पादक राज्यों की स्थिति और भी गंभीर है. हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में मक्का के भाव सालाना आधार पर 15 से 35 प्रतिशत तक टूट चुके हैं. हरियाणा में दिसंबर 2025 के दौरान मक्का का भाव एक साल पहले की तुलना में करीब 35 प्रतिशत नीचे चला गया. मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी सालाना गिरावट 25 प्रतिशत के आसपास रही है.
एक तरफ सरकार इथेनॉल नीति, पोल्ट्री और स्टार्च इंडस्ट्री के जरिए मक्का की मांग बढ़ाने की बात कर रही है. दूसरी तरफ, बाजार में मिल रहे दाम उस मांग का फायदा किसानों तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं, जबकि खेती की लागत हर साल बढ़ती जा रही है. MSP से लगातार नीचे बने भाव और सालाना गिरावट किसानों की आय पर सीधा असर डाल रही है.
अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले सीजन में किसान मक्का की बुवाई को लेकर दोबारा सोचने को मजबूर हो सकते हैं. ऐसा हुआ तो यह सरकार के मक्का उत्पादन बढ़ाने और वैकल्पिक फसलों के जरिए कृषि आय सुधारने के लक्ष्य के लिए भी बड़ी चुनौती बन सकता है.
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