बंगाल में आलू उत्पादन बढ़ने के अनुमान के बीच कोल्ड स्टोरेज को लेकर बढ़ी चिंता ()पश्चिम बंगाल में इस बार आलू उत्पादन नया रिकॉर्ड बनाने की ओर बढ़ रहा है. 2025-26 सीजन में राज्य में आलू की पैदावार 140 से 150 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है, जो पिछले पांच सालों में सबसे ज्यादा होगी. इससे पहले 2024-25 में भी राज्य ने करीब 115 लाख टन आलू का उत्पादन किया था, जिसे बंपर फसल माना गया था. इस लिहाज से देखा जाए तो इस साल उत्पादन में सालाना आधार पर 20 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज हो सकती है.
राज्य में आलू की खेती को इस बार मौसम का पूरा साथ मिला है. बुआई से लेकर कंद बनने और खुदाई तक तापमान और नमी की स्थिति अनुकूल रही, जिससे फसल की गुणवत्ता और औसत पैदावार दोनों में सुधार हुआ है. इसके अलावा आलू के रकबे में भी मामूली इजाफा हुआ है. 2024-25 सीजन में राज्य में करीब 5.12 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में आलू की खेती की गई थी, जो इस बार थोड़ा और बढ़ी है.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण बंगाल के हुगली, बर्दवान और पश्चिम मेदिनीपुर जिले आलू उत्पादन के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं. इन इलाकों में आलू की खुदाई (उपज लेने) का काम शुरू हो चुका है और मार्च तक फसल निकलने का सिलसिला जारी रहेगा. अनुमान है कि जैसे-जैसे खुदाई तेज होगी, मंडियों में आवक भी तेजी से बढ़ेगी.
आलू उत्पादन बढ़ने के अनुमान के बीच, राज्य सरकार ने कोल्ड स्टोरेज प्रबंधन को एक मार्च से आलू भंडारण के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं. पश्चिम बंगाल में फिलहाल करीब 580 कोल्ड स्टोरेज हैं, जिनका बड़ा हिस्सा आलू के भंडारण के लिए इस्तेमाल होता है. वहीं, राज्य में आलू भंडारण की क्षमता लगभग 70 से 80 लाख टन के आसपास है. लेकिन इस बार अनुमानित उत्पादन को देखते हुए भंडारण क्षमता एक बड़ी चुनौती बन सकती है.
पश्चिम बंगाल कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन के सीनियर मेंबर पतित पावन डे ने कहा कि राज्य में आलू की औसत मासिक खपत करीब 6 लाख टन है. इस हिसाब से पूरे साल में खपत के बाद भी लगभग 68 लाख टन आलू एक्स्ट्रा बच सकता है. ऐसे में अगर समय रहते अंतर-राज्यीय व्यापार को बढ़ावा नहीं दिया गया तो किसानों को कीमतों में गिरावट और बिक्री के दबाव का सामना करना पड़ सकता है.
इसी जोखिम को कम करने के लिए राज्य सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि हर कोल्ड स्टोरेज को अपनी कुल क्षमता का 30 प्रतिशत हिस्सा सीमांत और छोटे किसानों के लिए आरक्षित रखना होगा. इसका उद्देश्य यह है कि किसानों को मजबूरी में औने-पौने दाम पर आलू बेचने से बचाया जा सके.
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