आलू किसानों ने उठाई समर्थन मूल्य की मांगदेशभर की मंडियों में आलू के भाव इन दिनों काफी नीचे चल रहे हैं, जिससे आलू किसानों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. मंडियों भाव अचानक गिर जाने से किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है. गुजरात के बनासकांठा में भी किसानों को मात्र 4 से 5 रुपये प्रति किलो तक दाम मिल रहे हैं. किसानों का कहना है कि वर्तमान में मिल रहा भाव उत्पादन की लागत का आधा भी नहीं है. आलू की खेती में बीज, खाद, दवा, सिंचाई, मजदूरी और ट्रांसपोर्ट पर भारी खर्च आता है.
एक किलो आलू तैयार करने की लागत इससे कहीं ज्यादा होती है, लेकिन बाजार में उन्हें बेहद कम दाम मिल रहे हैं. इस कारण किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है और कई किसान कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं. इस बार एकाएक भाव गिरने से किसानों को फसल निकालना भी मुश्किल हो गया है. कई जगहों पर किसान आलू खेत में ही छोड़ने को मजबूर हैं, क्योंकि कटाई और बाजार तक पहुंचाने का खर्च भी निकल पाना मुश्किल हो रहा है.
| मंडी | वैरायटी/ग्रेड | न्यूनतम कीमत (रु/क्विंटल) | अधिकतम कीमत (रु/क्विंटल) | औसत कीमत (रु/क्विंटल) |
| आणंद एपीएमसी, गुजरात | आलू ग्रेड A | 500 | 750 | 625 |
| डीसा एपीएमसी, बनासकांठा | आलू FAQ | 285 | 655 | 500 |
| अंकलेश्वर एपीएमसी, भरूच | आलू ग्रेड A | 1000 | 1300 | 1100 |
| दाहोद सब्जी मंडी, गुजरात | आलू लोकल | 700 | 1000 | 900 |
| भुज एपीएमसी, कच्छ | देसी आलू FAQ | 900 | 1200 | 1050 |
| कपडवंज एपीएमसी, खेड़ा | आलू मीडियम | 400 | 850 | 600 |
| नडियाद एपीएमसी, खेड़ा | आलू FAQ | 1400 | 1800 | 1600 |
| नडियाद चकलासी, खेड़ा | आलू FAQ | 1100 | 1400 | 1200 |
| नडियाद पिपलाग, खेड़ा | आलू FAQ | 1200 | 1400 | 1300 |
| मेहसाणा वेज एपीएमसी | आलू लोकल | 200 | 1000 | 800 |
| विजापुर वेज एपीएमसी | आलू लोकल | 450 | 800 | 625 |
| बिलिमोरा एपीएमसी, नवसारी | आलू FAQ | 1000 | 1500 | 1200 |
| नवसारी एपीएमसी | आलू ग्रेड A | 800 | 1200 | 1000 |
| पोरबंदर एपीएमसी | रेड नैनिटल आलू | 1000 | 1500 | 1250 |
नाेट: ऊपर दी गई टेबल में लिखे भाव 21 फरवरी के हैं. (सोर्स- एगमार्कनेट पोर्टल)
किसानों ने सरकार से मांग की है कि आलू के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय किया जाए और बाजार में भाव स्थिर रखने के लिए तुरंत हस्तक्षेप किया जाए. साथ ही भंडारण और प्रोसेसिंग की बेहतर व्यवस्था की भी मांग उठ रही है, ताकि किसानों को अपनी उपज का सही दाम मिल सके. अगर जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो आलू किसानों की स्थिति और भी बदतर हो सकती है. जरूरत है कि सरकार और संबंधित विभाग किसानों के हित में तुरंत निर्णय लें, ताकि उन्हें उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके. (इनपुट- परेशकुमार किशनलाल पढियार)
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