मुर्रा भैंस ‘गार्गी’ का कमालउत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के मोहम्मदपुर गांव से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने पूरे प्रदेश में पशुपालन करने वाले किसानों और पशुप्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. गांव के पूर्व जिला पंचायत सदस्य चौधरी विक्रम सिंह के परिवार की मुर्रा नस्ल की भैंस ‘गार्गी’ ने ऐसा रिकॉर्ड बनाया है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान है. गार्गी ने प्रतिदिन 23.375 लीटर दूध देकर पूरे उत्तर प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है. इस उपलब्धि के बाद गांव में खुशी का माहौल है और दूर-दूर से लोग इस खास भैंस को देखने पहुंच रहे हैं.
उत्तर प्रदेश कृषि एवं पशुपालन संघ द्वारा आयोजित प्रतियोगिता में प्रदेशभर की कई उच्च नस्ल की भैंसों ने हिस्सा लिया था. इस प्रतियोगिता में दूध उत्पादन के आधार पर विजेता चुना गया. गार्गी ने रोजाना 23.375 लीटर दूध देकर सभी प्रतियोगियों को पीछे छोड़ दिया और पहला स्थान अपने नाम कर लिया.
बताया जा रहा है कि दूसरे स्थान पर रहने वाली भैंस ने 21.700 लीटर दूध दिया, जबकि तीसरे स्थान वाली भैंस का दूध उत्पादन 21.200 लीटर रहा. ऐसे में गार्गी का प्रदर्शन बाकी सभी भैंसों से काफी आगे रहा.
गार्गी की इस बड़ी उपलब्धि के बाद शुक्रवार को उत्तर प्रदेश कृषि एवं पशुपालन संघ और पशु चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम मोहम्मदपुर गांव पहुंची. यहां भैंस मालिक परिवार को ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया. इस दौरान गांव के लोगों में भी काफी उत्साह देखने को मिला. बड़ी संख्या में ग्रामीण गार्गी को देखने पहुंचे और परिवार को बधाई दी.
गांव में पहली बार किसी पशु ने इस तरह का रिकॉर्ड बनाया है, इसलिए लोग इसे पूरे गांव का गर्व मान रहे हैं.
करीब चार साल की गार्गी मुर्रा नस्ल की भैंस है. मुर्रा नस्ल को देश की सबसे अच्छी दूध देने वाली नस्लों में गिना जाता है. लेकिन गार्गी सिर्फ अपने दूध उत्पादन की वजह से ही नहीं, बल्कि अपने अनोखे आकार की वजह से भी चर्चा में है.
परिवार के मुताबिक गार्गी की ऊंचाई करीब साढ़े पांच फीट है, जो इसे सामान्य भैंसों से अलग बनाती है. इसका मजबूत शरीर और शानदार बनावट लोगों को पहली नजर में ही आकर्षित कर लेती है.
गार्गी के दूध उत्पादन का परीक्षण पिछले साल दिसंबर के आखिरी सप्ताह में किया गया था. इसके लिए लखनऊ से विशेषज्ञों की टीम गांव पहुंची थी. दूध उत्पादन की पूरी प्रक्रिया का लाइव टेलीकास्ट भी किया गया, ताकि परिणाम पूरी तरह पारदर्शी रहें.
हाल ही में घोषित परिणामों में गार्गी को पूरे उत्तर प्रदेश में पहला स्थान मिला. जैसे ही यह खबर गांव पहुंची, परिवार और ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई.
भैंस मालिक शेखर चौहान का कहना है कि इस सफलता के पीछे उनके पिता विक्रम सिंह की करीब 15 साल की मेहनत है. उन्होंने बताया कि परिवार ने हमेशा अच्छी नस्ल तैयार करने पर ध्यान दिया. बाहर से महंगी भैंस खरीदने के बजाय उन्होंने अपनी ही नस्ल को बेहतर बनाने का काम किया.
उन्होंने बताया कि गार्गी का टीकाकरण हरियाणा के प्रसिद्ध मुर्रा भैंसे ‘भीम’ से कराया गया था. सही देखभाल, अच्छा खानपान और बेहतर ब्रीडिंग की वजह से गार्गी आज इस मुकाम तक पहुंची है.
गार्गी की लोकप्रियता अब इतनी बढ़ चुकी है कि कई लोग इसे खरीदने के लिए बड़ी-बड़ी कीमत लगाने को तैयार हैं. परिवार के अनुसार कुछ लोगों ने इसकी कीमत 20 लाख रुपये तक लगाई, लेकिन उन्होंने साफ इनकार कर दिया.
परिवार का कहना है कि गार्गी सिर्फ एक भैंस नहीं, बल्कि उनकी मेहनत, पहचान और परिवार का हिस्सा है. वे इसके बच्चे जरूर देने को तैयार हैं, लेकिन गार्गी को किसी भी कीमत पर नहीं बेचेंगे.
गार्गी की सफलता अब दूसरे पशुपालकों के लिए भी प्रेरणा बन रही है. यह कहानी बताती है कि अगर सही देखभाल, अच्छी नस्ल और मेहनत के साथ पशुपालन किया जाए, तो किसान इस क्षेत्र में भी बड़ी सफलता हासिल कर सकते हैं.
आज सहारनपुर का छोटा सा मोहम्मदपुर गांव पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है और हर कोई सिर्फ एक ही नाम की बात कर रहा है- ‘गार्गी’, यूपी की नंबर-1 भैंस.
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