बेतिया राज की जमीन को लेकर बिहार सरकार का बड़ा फैसलाबिहार सरकार इन दिनों निजी भूमि, ऐतिहासिक और सरकारी भूमि से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए काफी एक्टिव दिख रही है. वहीं, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने बेतिया राज की पुरानी और ऐतिहासिक संपत्तियों को राज्य के अधिकार में लाने की प्रक्रिया तेज कर दी है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने बताया कि बेतिया राज की कुल 7,272.16 एकड़ भूमि को राज्य में निहित करने के लिए छह जिलों में अधिसूचनाएं जारी कर दी गई हैं. यह कदम पूरी तरह पारदर्शी और कानूनी प्रक्रिया के तहत उठाया जा रहा है.
बिहार सरकार के अनुसार राज्य के अंदर बेतिया राज की जमीन करीब 6 जिलों में है. इसके बारे में विभाग के सचिव जय सिंह ने बताया कि अधिसूचित भूमि में पूर्वी चंपारण जिले की सबसे ज्यादा 7,194.56 एकड़ भूमि शामिल है. इसके अलावा पश्चिम चंपारण में 14.77 एकड़, गोपालगंज में 35.58 एकड़, सारण में 8.47 एकड़, सिवान में 7.29 एकड़ और पटना में 11.49 एकड़ भूमि शामिल की गई है. आगे उन्होंने बताया कि अधिसूचनाओं में हर संपत्ति का पूरा विवरण, अंचल, मौजा, थाना संख्या, खाता, खेसरा और रकबा स्पष्ट रूप से दिया गया है. इससे कोई भ्रम नहीं रह जाएगा और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहेगी.
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने कहा कि बेतिया राज की 7,272 एकड़ संपत्तियां सिर्फ जमीन का एक टुकड़ा नहीं हैं, बल्कि ऐतिहासिक और सार्वजनिक महत्व की धरोहर हैं. राज्य सरकार इनका व्यवस्थित अभिलेखीकरण, संरक्षण और जनकल्याणकारी कार्यों में उपयोग सुनिश्चित करेगी. यह राज्य की परिसंपत्तियों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में एक बड़ा कदम है. इससे भविष्य में इन भूमियों का उपयोग विकास योजनाओं, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जनहित के कार्यों के लिए किया जा सकेगा.
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने स्पष्ट किया कि अधिसूचनाएं राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी. सभी जिलाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि अधिसूचित भूमि के संबंध में सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी की जाएं. यह प्रक्रिया पूरी तरह विधिसम्मत और तथ्यपरक है, ताकि किसी भी तरह का विवाद न खड़ा हो. सरकार का फोकस है कि पुरानी संपत्तियों को राज्य के विकास में उपयोगी बनाया जाए.
वहीं, सरकार का यह निर्णय बिहार की परिसंपत्तियों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. बेतिया राज की भूमि अब विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं और ग्रामीण विकास के लिए उपयोगी बनेगी या नहीं, यह तो आने वाले दिनों में पता चलेगा. हालांकि, सरकार का लक्ष्य है कि ऐसी ऐतिहासिक संपत्तियों का सही और पारदर्शी उपयोग करके बिहार के समग्र विकास को नई गति दी जाए.
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