National Mango Day: क्यों आम के बिना अधूरी हैं हमारी गर्मियां, जानिए फलों के राजा का दिलचस्प सफर

National Mango Day: क्यों आम के बिना अधूरी हैं हमारी गर्मियां, जानिए फलों के राजा का दिलचस्प सफर

हर साल आने वाला 'नेशनल मैंगो डे' फलों के राजा का शानदार जश्न है. आम सिर्फ फल नहीं, बल्कि हमारी गर्मियों की जान और बचपन की यादों का खास हिस्सा है. रामायण काल में हनुमान जी से लेकर मुगलों और आम जनता तक, सब इसके लाजवाब स्वाद के दीवाने हैं. यह सिर्फ लजीज ही नहीं, बल्कि सेहत का असली पावरहाउस भी है.

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क्यों आम के बिना अधूरी हैं हमारी गर्मियां, जानिए फलों के राजा का दिलचस्प सफरनेशनल मैंगो डे और फलों के राजा की कहानी

हर साल 22 जुलाई को पूरी दुनिया में 'नेशनल मैंगो डे' मनाया जाता है। यह दिन फलों के राजा यानी हमारे प्यारे आम के सम्मान में रखा गया है. आम सिर्फ एक फल नहीं है, बल्कि यह स्वाद, मिठास और हमारी संस्कृति का एक बहुत अहम हिस्सा है. वैसे तो यह दिन मुख्य रूप से अमेरिका में मनाया जाता है, लेकिन भारत जैसे देशों में, जहाँ आम सबसे ज्यादा उगाया और खाया जाता है, इसकी अहमियत बहुत खास है. आम की पैदावार, किसानों की मेहनत और इसके लाजवाब स्वाद को याद करने के लिए यह दिन बेहतरीन है. दुनिया भर में 120 से ज्यादा देशों में आम की खेती होती है, लेकिन आपको जानकर फक्र होगा कि पूरी दुनिया का 60 फीसदी से ज्यादा आम भारत, चीन, थाईलैंड, इंडोनेशिया और मेक्सिको में पैदा होता है. भारत इसमें सबसे आगे है, जहांइसे राष्ट्रीय फल  का दर्जा भी हासिल है.

आम की अहमियत सिर्फ इसके स्वाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लाखों किसानों की जिंदगी और देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करता है.  गर्मियों का मौसम आते ही हर किसी को आम का बेसब्री से इंतजार रहता है. बच्चे हों या बुजुर्ग, अमीर हों या गरीब, हर कोई इसके रसीले स्वाद का दीवाना है. जूसी आम, आम पन्ना, चटपटा अचार या ठंडी स्मूदी- आम हर रूप में हमारे दिलों पर राज करता है. इसीलिए, 22 जुलाई का दिन इस 'किंग ऑफ फ्रूट्स' की खूबियों को दुनिया तक पहुंचाने और इसका शानदार जश्न मनाने का एक बेहतरीन मौका देता है.

हजारों साल पुरानी कहानी

आम का इतिहास बहुत ही दिलचस्प और हजारों साल पुराना है. माना जाता है कि इसकी शुरुआत करीब चार हजार साल पहले भारत और म्यांमार के इलाके में हुई थी. पुराने जमाने में जब समुद्री सफर दुनिया घूमने का इकलौता जरिया था, तब साहसी व्यापारियों ने आम को दुनिया के अलग-अलग कोनों, जैसे अफ्रीका, ब्राजील और कैरेबियन देशों तक पहुंचाया. भारत के इतिहास और हमारी पौराणिक कथाओं में आम का बहुत ऊंचा मुकाम है.

संस्कृत भाषा में इसे 'आम्र' कहा जाता है, और हिंदी में यह 'आम' बन गया, जिसका सीधा मतलब है आम जनता का फल. मशहूर सूफी संत अमीर खुसरो ने अपनी शायरी में आम की खूब तारीफ की है. मुगलों के दौर में भी आम मशहूर था. बादशाह अकबर को आम इतने पसंद थे कि उन्होंने 'लाख बाग' नाम से एक लाख पेड़ों का बड़ा बगीचा लगवाया था. आज भी हमारे घरों की पूजा-पाठ में आम के पत्तों का इस्तेमाल शुभ माना जाता है.

स्वाद में नंबर वन और सेहत का  पावरहाउस

आम सिर्फ खाने में ही स्वादिष्ट नहीं होता, बल्कि यह हमारी सेहत के लिए भी अनमोल खजाने से कम नहीं है. इसमें विटामिन सी और विटामिन ए भरपूर मात्रा में पाया जाता है. विटामिन सी हमारी इम्यूनिटी यानी बीमारियों से लड़ने की प्राकृतिक ताकत बढ़ाता है. वहीं विटामिन ए हमारी आंखों की रोशनी के लिए बहुत फायदेमंद होता है. इसके अलावा, आम में फाइबर, पोटैशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे जरूरी मिनरल्स मौजूद होते हैं जो हाजमे को दुरुस्त रखते हैं और शरीर को ताजगी देते हैं.

आम में फैट न के बराबर होता है और सोडियम भी काफी कम पाया जाता है. साइंस के नजरिए से देखें तो आम में 'मैंगिफेरिन' और 'ल्यूपियोल' नाम के कुछ खास बायोएक्टिव केमिकल मिलते हैं. ये रसायन शरीर में सूजन कम करने, शुगर कंट्रोल करने और खतरनाक बीमारियों से बचाव में बहुत मददगार साबित हुए हैं. इसलिए आम को अपनी रोजमर्रा की डाइट का हिस्सा बनाना एक बेहद सेहतमंद फैसला है.

दुनिया भर में आम का जलवा

दुनिया भर में आम की एक हजार से भी ज्यादा बेमिसाल किस्में पाई जाती हैं. हर किस्म का अपना एक बिल्कुल अलग स्वाद, रंग, खुशबू और अनोखी मिठास होती है. हमारे भारत में अल्फोंसो, दशहरी, लंगड़ा और केसर जैसे आम बहुत ही मशहूर और लोकप्रिय हैं. अल्फोंसो अपनी शानदार मिठास और लजीज स्वाद के लिए जाना जाता है, जबकि केसर आम को 'आमों की रानी' कहा जाता है.

अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो वहां अक्सर लाल छिलके वाले आम जैसे टॉमी एटकिंस ज्यादा पसंद किए जाते हैं क्योंकि वे देखने में आकर्षक लगते हैं. लेकिन अब दुनिया भर के विदेशी लोगों का नजरिया बदल रहा है. अमेरिका और यूरोप के विशाल बाजारों में भी अब पीले और हरे छिलके वाले बेहतरीन भारतीय आमों को उनके स्वाद के कारण खूब पसंद किया जाने लगा है. आज मेक्सिको दुनिया का सबसे बड़ा आम निर्यातक देश है, लेकिन भारत से भी स्वादिष्ट पल्प और अचार बड़े पैमाने पर हर साल बाहर भेजा जाता है.

खट्टे पन्ने से लेकर मीठे स्वाद तक

आम एक ऐसा अनोखा फल है जिसके पेड़ का हर हिस्सा हमारे किसी न किसी काम जरूर आता है. कच्चे आम से स्वादिष्ट चटनी, खट्टा अचार और ठंडा पन्ना बनाया जाता है. वहीं जब आम मीठा होकर पक जाता है, तो उससे स्मूदी, जैम, जेली और तरह-तरह की मिठाइयां तैयार होती हैं. आम की सख्त गुठली से निकलने वाले प्राकृतिक तेल का इस्तेमाल कॉस्मेटिक और दवाइयों की कंपनियों में किया जाता है.

भारत में अलग-अलग इलाकों के हिसाब से अचार बनाने के तरीके भी अलग हैं. कुल मिलाकर कहें तो नेशनल मैंगो डे सिर्फ कलेंडर की एक तारीख नहीं है, बल्कि यह आम की शानदार अहमियत का जश्न है. यह हमें याद दिलाता है कि कैसे एक फल हमारी संस्कृति का अहम हिस्सा बन चुका है. चाहे तपती दोपहर में आम पन्ने का सुकून हो या मीठे आम का स्वाद, यह हर दिल अजीज है. आम सिर्फ फलों का राजा नहीं, बल्कि बचपन की यादों और खुशियों का खूबसूरत एहसास है. 

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