किसान कारवां गाजियाबादउत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप की संयुक्त पहल के तहत ‘किसान तक’ का किसान कारवां आज गाजियाबाद जनपद के भोजपुर गांव में पहुंचा, जहां किसानों की बड़ी संख्या में भागीदारी देखने को मिली. प्रदेश के 75 जिलों की इस विशेष कवरेज में यह 72वां पड़ाव रहा. कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी और उनका लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया. वहीं, पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने भी पशुपालकों के लिए चलाई जा रही नई योजनाओं और सुविधाओं के बारे में जानकारी साझा की.
इसके अलावा कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों को आधुनिक खेती तकनीकों, उन्नत बीज, और बेहतर उत्पादन के तरीकों के बारे में जागरूक किया. कार्यक्रम में मौजूद किसानों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और विशेषज्ञों से अपनी समस्याओं के समाधान प्राप्त किए. किसान कारवां का उद्देश्य किसानों तक नई तकनीक, सरकारी योजनाओं और आधुनिक खेती की जानकारी पहुंचाकर उनकी आय बढ़ाने में सहयोग करना है.
पहले चरण में कृषि विज्ञान केंद्र की मृदा वैज्ञानिक डॉ. आकांक्षा सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि किसान अपने शरीर की जांच तो कराते हैं, लेकिन मिट्टी की जांच को नजरअंदाज कर देते हैं. उन्होंने बताया कि रासायनिक उर्वरकों का अंधाधुंध प्रयोग मिट्टी की सेहत को खराब कर रहा है. इसलिए समय-समय पर मृदा परीक्षण कराकर उसमें मौजूद पोषक तत्वों की कमी को पूरा करना जरूरी है. स्वस्थ मिट्टी से ही पौष्टिक और बेहतर उत्पादन संभव है.
दूसरे चरण में धानुका एग्रीटेक लिमिटेड के एडवाइजर राकेश धुरिया ने “खेत का पानी खेत में, गांव का पानी गांव में” अभियान पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि पानी का सही प्रबंधन किए बिना न तो खेती टिकाऊ रह सकती है और न ही देश का भविष्य सुरक्षित रह सकता है. यह अभियान किसानों को जल बचाने और उसे सही तरीके से उपयोग करने के लिए प्रेरित कर रहा है.
धानुका एग्रीटेक के सब्जेक्ट मैटर एक्सपर्ट मनु बहादुर ने माइकोर सुपर और कनिका जैसे उत्पादों के लाभ बताए. उन्होंने कहा कि इन उत्पादों के उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है, रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम होती है और फसलों का उत्पादन बढ़ता है.
तीसरे चरण में भोजपुर ब्लॉक प्रमुख सुचिता सिंह ने तालाबों की सफाई और पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया. उन्होंने किसानों से अपील की कि प्लास्टिक कचरे को अलग रखें और जैविक कचरे से कंपोस्ट खाद तैयार करें. उन्होंने यह भी कहा कि धरती केवल प्राकृतिक चीजों को ही स्वीकार करती है, इसलिए प्लास्टिक प्रदूषण से बचना जरूरी है.
चौथे चरण में इफको के जिला प्रभारी सुनील तेवतिया ने किसानों को नैनो यूरिया और लिक्विड डीएपी के उपयोग के फायदे बताए. उन्होंने कहा कि बागवानी और सब्जी उत्पादन में बोरोन का प्रयोग करने से फलन बेहतर होता है और फल गिरने की समस्या कम होती है.
पांचवे चरण में चंबल फर्टिलाइजर के मार्केटिंग मैनेजर अभिषेक यादव ने कहा कि बिना मृदा जांच के उर्वरक और केमिकल का उपयोग मिट्टी को नुकसान पहुंचाता है. उन्होंने किसानों को सलाह दी कि पहले मिट्टी का परीक्षण कराएं फिर संतुलित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करें, ताकि मिट्टी की सेहत बनी रहे और उत्पादन बेहतर हो.
छठवें चरण में स्टील इंडिया के डीलर राजकुमार ने बताया कि बागवानी, कटाई-छंटाई और खरपतवार नियंत्रण के लिए जर्मन तकनीक पर आधारित उपकरण उपलब्ध हैं. इनकी कीमत ₹10,000 से ₹60,000 तक है और ये किसानों के लिए उपयोग में आसान और लाभकारी हैं.
सातवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. चंद्रपाल ने जैविक खेती को समय की आवश्यकता बताया. उन्होंने कहा कि जैविक खेती से न केवल मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है बल्कि यह मानव स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है.
आठवें चरण में रिलायंस एग्रो इंडस्ट्री के नितिन सारस्वत ने बताया कि पराली को विशेष प्रक्रिया के जरिए खाद (FOM) में बदला जा रहा है. इससे जहां एक ओर प्रदूषण कम हो रहा है, वहीं दूसरी ओर मिट्टी की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता में वृद्धि हो रही है.
नौवें चरण में पशुपालन विभाग के उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरबंस सिंह ने नंद बाबा, नंदिनी और मिनी नंदिनी योजनाओं की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इन योजनाओं के तहत किसानों को 50% तक अनुदान दिया जाता है, जिससे वे डेयरी व्यवसाय को बढ़ाकर अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं.
दसवें चरण में प्रगतिशील महिला किसान मंजू कश्यप ने बताया कि उन्होंने सरकारी सहायता से तालाब प्राप्त कर मछली पालन शुरू किया. इसके साथ ही वे कड़कनाथ मुर्गी पालन भी कर रही हैं. समेकित कृषि प्रणाली अपनाकर वे अच्छी आमदनी हासिल कर रही हैं और अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रही हैं.
ग्यारहवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष एवं प्रभारी डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि KVK के माध्यम से किसानों को उन्नत खेती और नई तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल रही है और वे आधुनिक खेती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं.
बारहवें चरण में क्षेत्र पंचायत सदस्य आशीष चौधरी ने कहा कि सरकार किसानों को बिजली, सोलर ऊर्जा और बेहतर बीज उपलब्ध करा रही है. इन सुविधाओं के कारण किसानों का उत्पादन बढ़ रहा है और उनकी आय को दोगुना करने का प्रयास किया जा रहा है.
तेरहवें चरण में किसान तक के वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह ने कहा कि आज गांव-गांव में स्मार्टफोन का इस्तेमाल बढ़ गया है. इससे किसानों तक योजनाओं और तकनीकों की जानकारी आसानी से पहुंच रही है. उन्होंने युवाओं से खेती को अपनाने और आधुनिक तकनीक से जुड़ने का आह्वान किया.
चौदहवें चरण में कार्यक्रम के अंत में लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया, जिसमें ₹500 के 10 इनाम वितरित किए गए. पहला इनाम अनिल और दूसरा इनाम धर्मपाल ने जीता.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today