Explained: भारत‑चीन के बीच GMO चावल विवाद, क्या है पूरा मामला और क्यों बढ़ी चिंता

Explained: भारत‑चीन के बीच GMO चावल विवाद, क्या है पूरा मामला और क्यों बढ़ी चिंता

भारत और चीन के बीच जीएमओ चावल को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. चीन ने भारत की तीन कंपनियों की चावल खेप में जीएमओ अंश होने का आरोप लगाकर उसे वापस लौटा दिया है. इससे भारत के चावल निर्यात, किसानों की आय और वैश्विक साख पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है. यह विवाद ऐसे समय उभरा है, जब भारत चीन के लिए गैर‑बासमती चावल का बड़ा सप्लायर बन रहा है.

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Explained: भारत‑चीन के बीच GMO चावल विवाद, क्या है पूरा मामला और क्यों बढ़ी चिंताक्या है जीएमओ विवाद, चीन के साथ कहां फंसा मामला?

भारत और चीन के बीच इन दिनों जीएमओ (जेनेटिकली मोडिफाइड ऑर्गेनिज्म) चावल को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. चीन ने भारत की तीन कंपनियों के भेजे गए चावल की खेप को यह कहकर वापस लौटा दिया है कि उसमें जीएमओ (GMO) के अंश पाए गए हैं. इस कदम ने भारत के चावल निर्यात और किसानों की आमदनी को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं.

क्या है चीन का आरोप

चीन का कहना है कि भारतीय चावल की जिन खेपों को निर्यात किया गया, उनमें जीएमओ चीजें मौजूद थीं. जबकि भारत और चीन—दोनों देशों में जीएमओ चावल पूरी तरह प्रतिबंधित है. चीन ने जिन तीन भारतीय कंपनियों का माल लौटाया है, वे नागपुर, दिल्ली और रायपुर की हैं.

खास बात यह है कि यह चावल इंसानों के खाने के लिए नहीं था, बल्कि पशु आहार और औद्योगिक उपयोग के लिए भेजा गया था. इसके बावजूद चीन का आरोप गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि नियमों के मुताबिक किसी भी तरह के जीएमओ अंश की अनुमति नहीं है.

निर्यात से पहले मिली थी मंजूरी

भारतीय कंपनियों का कहना है कि चावल की यह खेप भारत के बंदरगाह से रवाना होने से पहले जांच के सभी जरूरी स्टेप से गुजरी थी और संबंधित एजेंसियों से मंजूरी भी मिली थी. इतना ही नहीं, चीन की संबंधित कंपनी ने भी पहले इसे आयात के लिए हरी झंडी दी थी. ऐसे में चीन का खेप लौटाने का फैसला भारतीय निर्यातकों के लिए हैरान करने वाला है.

भारत की साख पर असर की आशंका

इस विवाद से भारत के चावल निर्यात पर खतरा मंडराने लगा है. भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है और बड़ी मात्रा में अफ्रीकी देशों, रूस, अमेरिका और एशियाई देशों को चावल भेजता है. यदि चीन की तरह दूसरे देश भी जीएमओ को लेकर सवाल उठाने लगे, तो इसका सीधा असर निर्यात और किसानों की कमाई पर पड़ सकता है.

चीन के लिए अहम है भारतीय चावल

चीन में हर साल करीब 1.6 करोड़ टन चावल की खपत होती है, जिसमें से लगभग 30 लाख टन भारत से आता है. गैर‑बासमती चावल की चीन में काफी मांग है और लौटाई गई खेप भी गैर‑बासमती ही थी. भारत के अलावा वियतनाम, थाइलैंड और पाकिस्तान भी चीन को चावल निर्यात करते हैं, लेकिन जीएमओ सर्टिफिकेशन की सख्त मांग चीन सिर्फ भारत से ही करता है.

2016 का प्रतिबंध और बाद की स्थिति

चीन ने वर्ष 2016 तक भारत से गैर‑बासमती चावल के आयात पर रोक लगा रखी थी. बाद में कूटनीतिक बातचीत के जरिए यह प्रतिबंध हटाया गया और दोनों देशों के व्यापारिक रिश्ते बेहतर हुए. ऐसे में यह नया विवाद पुराने घावों को फिर से हरा कर सकता है.

भारत में जीएम फसलों के नियम

भारत में किसी भी जीएम फसल की खेती के लिए सरकार की जेनेटिक इंजीनियरिंग अप्रेजल कमेटी (GEAC) से मंजूरी जरूरी है. अब तक केवल बीटी कॉटन को ही व्यावसायिक खेती की अनुमति मिली है. बीटी कॉटन में सुंडी से बचाव की क्षमता होती है, इसलिए इसे अपवाद के तौर पर मंजूरी दी गई.

जीनोम एडिटिंग बनाम जीएमओ

हाल ही में भारत ने जीनोम एडिटिंग तकनीक से तैयार धान की दो किस्में—DRR Dhan और Pusa DST—लॉन्च की हैं. दावा है कि इन किस्मों से 20 प्रतिशत तक कम मीथेन गैस निकलती है. भारत सरकार का कहना है कि जीनोम एडिटिंग जीएमओ से अलग है. इसमें फसल के पहले से मौजूद जीन में बदलाव किया जाता है, जबकि जीएमओ में बाहर से जीन डाला जाता है.

निर्यातकों की चिंता

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की इस कार्रवाई के बाद चावल निर्यातक कंपनियां भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) से स्पष्टीकरण की उम्मीद कर रही हैं, ताकि आगे ऐसे विवादों से बचा जा सके.

कुल मिलाकर, जीएमओ को लेकर चीन का यह कदम भारत के चावल निर्यात के लिए चेतावनी माना जा रहा है. अगर समय रहते इस विवाद का निपटारा नहीं हुआ, तो इसका असर न सिर्फ व्यापार पर बल्कि लाखों किसानों की आजीविका पर भी पड़ सकता है.

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