तमिलनाडु में चीनी मिल कर्मचारियों को दिवाली बोनस का तोहफा, 20 प्रतिशत तक मिलेगा लाभ

तमिलनाडु में चीनी मिल कर्मचारियों को दिवाली बोनस का तोहफा, 20 प्रतिशत तक मिलेगा लाभ

तमिलनाडु सरकार ने दीपावली से पहले राज्य की 18 सहकारी और सार्वजनिक क्षेत्र की चीनी मिलों के करीब 5,190 कर्मचारियों को बोनस और एक्स-ग्रेशिया देने का ऐलान किया है. कर्मचारियों को मिल के आधार पर 10 से 20 फीसदी तक बोनस मिलेगा.

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तमिलनाडु में चीनी मिल कर्मचारियों को दिवाली बोनस का तोहफा, 20 प्रतिशत तक मिलेगा लाभतमिलनाडु सीएम सी. विजय जोसेफ (फाइल फोटो)

तमिलनाडु सरकार ने दीपावली से पहले राज्य की सहकारी और सार्वजनिक क्षेत्र की चीनी मिलों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए बोनस और अनुग्रह राशि (एक्स-ग्रेशिया) देने का ऐलान किया है. वित्त वर्ष 2025-26 के लिए की गई इस घोषणा से राज्य की 18 चीनी मिलों के करीब 5,190 श्रमिकों और कर्मचारियों को फायदा होगा. सरकार इस पर कुल 3.51 करोड़ रुपये खर्च करेगी. मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के निर्देश पर जारी इस फैसले का उद्देश्य त्योहार से पहले चीनी मिल कर्मचारियों को आर्थिक राहत देना है. राज्य में फिलहाल 16 सहकारी और 2 सार्वजनिक क्षेत्र की चीनी मिलें संचालित हो रही हैं.

दो चीनी मिलों के कर्मचारियों को 20 फीसदी बोनस

सरकार ने सुब्रमणिया शिवा और कल्लाकुरिची-II सहकारी चीनी मिलों के कर्मचारियों को अधिकतम 20 फीसदी बोनस देने का फैसला किया है. इन दोनों मिलों के पास वितरण योग्य अधिशेष (Allocable Surplus) दर्ज है. इसके तहत कर्मचारियों को 8.33 फीसदी वैधानिक बोनस और 1.67 फीसदी अनुग्रह राशि दी जाएगी.

बाकी 16 चीनी मिलों के लिए 10 फीसदी बोनस

राज्य की बाकी 14 सहकारी और 2 सार्वजनिक क्षेत्र की चीनी मिलों में कार्यरत कर्मचारियों को कुल 10 फीसदी बोनस मिलेगा. इसमें 8.33 फीसदी वैधानिक बोनस और 1.67 फीसदी एक्स-ग्रेशिया राशि शामिल है. सरकार के इस फैसले से सभी 18 चीनी मिलों के लगभग 5,190 कर्मचारियों को लाभ मिलेगा. 

बोनस और अनुग्रह राशि के भुगतान पर सरकारी खजाने से कुल 351.40 लाख रुपये यानी करीब 3.51 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. दीपावली से पहले की गई इस घोषणा से चीनी मिलों में काम करने वाले श्रमिकों को त्योहार के खर्चों के लिए अतिरिक्त आर्थिक मदद मिलेगी.

तमिलनाडु में वन्यजीव संरक्षण बोर्ड का पुनर्गठन

तमिलनाडु सरकार ने राज्य वन्यजीव बोर्ड का नए सिरे से गठन किया है. इस वैधानिक बोर्ड में तीन विधायकों के साथ वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण और जैव विविधता के क्षेत्र में काम करने वाले विशेषज्ञों तथा सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है. पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और वन विभाग की ओर से 28 अक्टूबर को इस संबंध में सरकारी आदेश जारी किया गया. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 6(1) के तहत बोर्ड का पुनर्गठन किया गया है.

दरअसल, बोर्ड के गैर-सरकारी सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद नए सिरे से नियुक्तियों का प्रस्ताव रखा गया था. मुख्यमंत्री बोर्ड के अध्यक्ष और वन मंत्री उपाध्यक्ष होंगे. बोर्ड में जिन तीन विधायकों को सदस्य बनाया गया है, उनमें कटपाड़ी से एम. सुधाकर, मदुरै ईस्ट से एस. कार्तिकेयन और तिरु वी का नगर से एम. आर. पल्लवी शामिल हैं. इसके अलावा वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाले संगठनों के प्रतिनिधियों को भी जिम्मेदारी दी गई है. इनमें वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के जोस लुईस और ओएमसीएआर फाउंडेशन के बालाजी वेधराजन शामिल हैं.

बोर्ड में संरक्षण और पर्यावरण के क्षेत्र से जुड़े कई विशेषज्ञों को भी जगह मिली है. इनमें वंडालूर स्थित एडवांस्ड इंस्टीट्यूट फॉर वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन की निदेशक आर. पद्मावती, अशोका ट्रस्ट फॉर रिसर्च इन इकोलॉजी एंड एनवायरनमेंट की अनीता अर्जुनदास, स्टूडेंट्स सी टर्टल कंजर्वेशन नेटवर्क के वी. अरुण और इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) के यश वीर भटनागर शामिल हैं. यह पुनर्गठन प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव वार्डन की ओर से भेजे गए प्रस्ताव के बाद किया गया है.

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