El Nino और महंगे क्रूड ऑयल से बढ़ा महंगाई का खतरा, वित्त मंत्रालय ने जताई चिंता

El Nino और महंगे क्रूड ऑयल से बढ़ा महंगाई का खतरा, वित्त मंत्रालय ने जताई चिंता

वित्त मंत्रालय ने अक्टूबर 2026 की आर्थिक समीक्षा में चेतावनी दी है कि महंगे कच्चे तेल, समुद्री माल ढुलाई में बाधाओं और अल नीनो के खतरे से भारत में महंगाई बढ़ सकती है. सितंबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54 फीसदी और खाद्य महंगाई 7.74 फीसदी पहुंच गई.

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El Nino और महंगे क्रूड ऑयल से बढ़ा महंगाई का खतरा, वित्त मंत्रालय ने जताई चिंताअलनीनो से बढ़ा महंगाई का खतरा (AI Image)

भारत में महंगाई पर आने वाले महीनों में दबाव बना रह सकता है. वित्त मंत्रालय ने कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, समुद्री माल ढुलाई मार्गों में बाधाओं और अल नीनो के कारण कृषि उत्पादन प्रभावित होने की आशंका को महंगाई के प्रमुख जोखिमों में शामिल किया है. हालांकि, सरकार को उम्मीद है कि खाद्य पदार्थों की सप्‍लाई बढ़ाने के लिए किए जा रहे उपायों से कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी.

वित्त मंत्रालय की अक्टूबर 2026 की मासिक आर्थिक समीक्षा के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में आर्थिक विकास को बनाए रखने के साथ महंगाई को नियंत्रित करना नीति निर्माताओं की प्रमुख प्राथमिकता रहेगी. इस दौरान वैश्विक ऊर्जा कीमतों और घरेलू कृषि उत्पादन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि निकट भविष्य में महंगाई की दिशा घरेलू खाद्य आपूर्ति के प्रबंधन, वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव और वित्तीय प्रणाली में नकदी की स्थिति से प्रभावित होगी.

खाद्य महंगाई घटाने के लिए सरकार ने उठाए ये कदम

वित्त मंत्रालय ने कहा कि खाद्य पदार्थों की कीमतों पर दबाव कम करने के लिए सरकार कई उपाय कर रही है. इनमें 'कांदा एक्सप्रेस' के जरिए खरीफ प्याज की आपूर्ति, चीनी कारोबारियों पर स्टॉक रखने की सीमा और कच्चे खाद्य तेलों पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) में कटौती शामिल है.

मंत्रालय को उम्मीद है कि इन उपायों से आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी को कम करने में मदद मिलेगी. हालांकि, रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अल नीनो की स्थिति मजबूत होने पर आगामी रबी बुवाई के मौसम में मिट्टी की नमी प्रभावित हो सकती है. इसके अलावा, त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से भी महंगाई पर दबाव पड़ सकता है.

सितंबर में खुदरा महंगाई बढ़कर 5.54 फीसदी पहुंची

देश में खुदरा महंगाई दर में सितंबर 2026 के दौरान बढ़ोतरी दर्ज की गई. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित महंगाई अगस्त के 4.83 फीसदी से बढ़कर सितंबर में 5.54 फीसदी हो गई. इसमें 71 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हुई. 

खाद्य महंगाई दर भी बढ़कर 7.74 फीसदी पर पहुंच गई. प्याज, चीनी, खाद्य तेल और चावल जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि इसका प्रमुख कारण रही. वहीं, कोर महंगाई दर अगस्त के 4.16 फीसदी से बढ़कर सितंबर में 4.33 फीसदी हो गई.

दूसरी तिमाही में औसत खुदरा महंगाई 4.94 फीसदी रही

वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में खुदरा महंगाई औसतन 4.94 फीसदी रही. पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह 1.7 फीसदी थी. मौजूदा तिमाही का आंकड़ा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4.9 फीसदी के अनुमान के लगभग बराबर रहा. हालांकि, महंगाई बढ़ने के बावजूद उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में शामिल करीब 64 फीसदी वस्तुओं की महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक के 4 फीसदी के लक्ष्य से नीचे रही.

थोक महंगाई भी बढ़ी

थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर अगस्त के 9.92 फीसदी से बढ़कर सितंबर में 11.39 फीसदी हो गई. वित्त मंत्रालय के मुताबिक, इस बढ़ोतरी में ईंधन और बिजली की कीमतों में तेजी की अहम भूमिका रही. ईंधन और बिजली श्रेणी की महंगाई दर अगस्त के 22.93 फीसदी से बढ़कर सितंबर में 25.85 फीसदी हो गई. रिपोर्ट में इसे वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ते लागत दबाव से जोड़कर देखा गया है.

आयातित महंगाई पर नियंत्रण की उम्मीद

वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को सीधे डॉलर की उपलब्धता कराने और मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के हालिया उपायों से रुपये की विनिमय दर में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को सीमित करने में मदद मिल सकती है.

इससे आयात के जरिए आने वाले महंगाई के दबाव को कम करने में भी सहायता मिलने की उम्मीद है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि महंगाई के दूसरे दौर के प्रभावों को रोकने में हाल ही में की गई ब्याज दर वृद्धि कितनी प्रभावी होगी, यह केंद्रीय बैंक के सक्रिय नकदी प्रबंधन पर निर्भर करेगा.

चुनौतियों के बावजूद अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत

लगातार महंगाई के दबाव के बीच वित्त मंत्रालय ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था के बुनियादी कारक मजबूत बने हुए हैं. औद्योगिक गतिविधियों, घरेलू मांग, कर्ज वृद्धि और निवेश से अर्थव्यवस्था को समर्थन मिल रहा है.

हालांकि, मंत्रालय ने भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों में सख्ती को आर्थिक परिदृश्य के लिए प्रमुख चुनौतियां बताया है. रिपोर्ट के मुताबिक, इन प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के वित्त वर्ष 2026-27 के बाकी हिस्से में अपनी विकास गति बनाए रखने की स्थिति में रहने की संभावना है. (एएनआई)

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