घटिया कीटनाशकों ने छीनी 535 अन्नदाताओं की जान, किसानों की मौत ने खड़े किए बड़े सवाल!

घटिया कीटनाशकों ने छीनी 535 अन्नदाताओं की जान, किसानों की मौत ने खड़े किए बड़े सवाल!

कृषि विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, जनवरी 2024 से जनवरी 2026 के बीच राज्य के अलग-अलग जिलों में कीटनाशकों के संपर्क से किसानों की मौत के मामले सामने आए हैं. जिससे कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की क्वालिटी और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

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घटिया कीटनाशकों ने छीनी 535 अन्नदाताओं की जान, किसानों की मौत ने खड़े किए बड़े सवाल!कीटनाशकों के कारण किसानों की मौत

राजस्थान में कीटनाशकों के बढ़ते इस्तेमाल और उनसे जुड़ी सुरक्षा खामियों को लेकर चिंताजनक आंकड़े सामने आई हैं. दरअसल, विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में खेतों में काम करते समय कीटनाशकों के संपर्क में आने से 535 किसानों की मौत हो चुकी है. इन मामलों में राज्य सरकार ने प्रभावित परिवारों को कुल 5.1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया है. वहीं, जांच के दौरान 189 कीटनाशक नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं, जिससे कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की क्वालिटी और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

किन जिलों में हुई किसानों की सबसे अधिक मौत

कृषि विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, जनवरी 2024 से जनवरी 2026 के बीच राज्य के अलग-अलग जिलों में कीटनाशकों के संपर्क से किसानों की मौत के मामले सामने आए, जिसमें सबसे ज्यादा 57 मौतें बीकानेर में दर्ज की गई. इसके बाद चुरू में 56, हनुमानगढ़ और झालावाड़ में 42-42. इसके अलावा जोधपुर में 38 श्रीगंगानगर और ब्यावर में 31-31 किसानों की जान गई. इन आंकड़ों ने खेती में रसायनों के बढ़ते खतरे को उजागर कर दिया है.

किसानों की मौत के मुआवजे की राशि में बड़ा अंतर

हालांकि, सरकार ने मृतक किसानों के परिवारों को मुआवजा दे दिया है, लेकिन जिलों के बीच मुआवजे की राशि में बड़ा अंतर देखने को मिला. बीकानेर को 92 लाख रुपये, चुरू को 72 लाख रुपये और जोधपुर को 58 लाख रुपये मिले हैं, जबकि 42 मौतों वाले झालावाड़ को केवल 18 लाख रुपये का मुआवजा मिला हैं. वहीं, डीग में आठ मौतों के बावजूद कोई मुआवजा नहीं दिया गया है. अधिकारियों का कहना है कि यह अंतर दावों के सत्यापन और मंजूरी की प्रक्रिया के कारण है.

जांच में 189 घटिया कीटनाशक के नमूने आए सामने

विधानसभा में सामने आए आंकड़ों का दूसरा चिंताजनक पहलू घटिया गुणवत्ता वाले कीटनाशकों का है. राज्यभर से लिए गए 5,570 नमूनों में से 5,521 की जांच की गई, जिनमें 189 नमूने मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए. इसके बाद कृषि विभाग ने 282 नोटिस जारी किए गए, 14 मामलों में कोर्ट केस दर्ज हुए, 14 लाइसेंस निलंबित किए गए और 22 लाइसेंस रद्द हुए.

घटिया कीटनाशकों के सबसे ज्यादा मामले श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में सामने आए, जहां 17-17 नमूने फेल हुए. इसके बाद बीकानेर में 13, कोटा में 10 और भीलवाड़ा में 9 नमूने खराब पाए गए. श्रीगंगानगर में सबसे अधिक 34 नोटिस जारी किए गए, जबकि बीकानेर में पांच और श्रीगंगानगर में तीन मामलों में कानूनी कार्रवाई भी शुरू की गई.

किसानों और खेत दोनों के लिए हानिकारक है कीटनाशक 

विशेषज्ञों का मानना है कि अधिक उत्पादन की दौड़ में कीटनाशकों पर बढ़ती निर्भरता किसानों के स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए खतरा बनती जा रही है. सुरक्षा उपकरणों की कमी, गलत तरीके से छिड़काव और घटिया क्वालिटी वाले रसायनों का उपयोग खेतों की उपजाऊ शक्ति और किसानों के मौत का कारण बन रही है. इसके अलावा, कीटनाशकों के अत्यधिक जल स्रोतों की गुणवत्ता और जैव विविधता पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है.

आंकड़ों की समीक्षा करेंगे कृषि मंत्री कृषि मंत्री

इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि सरकार इन आंकड़ों की समीक्षा करेगी और किसानों को सुरक्षित तरीके से कीटनाशकों के उपयोग के लिए जागरूक किया जाएगा. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार जैविक खेती को बढ़ावा दे रही है और किसानों को अपनी जमीन का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा ऑर्गेनिक खेती के लिए इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि रासायनिक खेती पर निर्भरता कम हो और खेती अधिक सुरक्षित बन सके. 

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