केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहानकेंद्र सरकार अब रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग को लेकर देशभर में बड़ा जनजागरण अभियान चलाने जा रही है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अभियान के तहत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यानी ICAR को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है. अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को संतुलित खाद उपयोग, मिट्टी की सेहत और प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करना है. कृषि मंत्रालय में आयोजित बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, आईसीएआर और लैंड रिसोर्सेज विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि गांव-गांव तक इस अभियान को पहुंचाया जाए. इसके तहत करीब 1600 टीमें किसानों के बीच जाकर जागरूकता कार्यक्रम चलाएंगी.
सरकार का मानना है कि रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो रही है, इसलिए अब किसानों को संतुलित पोषण प्रबंधन और वैकल्पिक खेती पद्धतियों के बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा. बैठक में यह भी तय किया गया कि गांव स्तर पर “खेत बचाओ समितियों” का गठन किया जाएगा. ये समितियां किसानों को मिट्टी परीक्षण, उर्वरकों के संतुलित उपयोग और प्राकृतिक खेती के फायदे समझाने का काम करेंगी.
सरकार चाहती है कि किसान अपने खेत के कम से कम एक हिस्से में प्राकृतिक खेती अपनाएं, ताकि रासायनिक लागत घटे और मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर हो सके. केंद्रीय मंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान का जिक्र करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को राष्ट्रहित में संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर भी जोर देने को कहा. वहीं, उन्होंने मंत्रालय स्तर पर गैर-जरूरी खर्च कम करने, कार पूलिंग को बढ़ावा देने, मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल और वर्क फ्रॉम होम की संभावनाओं पर कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं.
बैठक में यह भी फैसला लिया गया कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों और बैठकों में स्थानीय उत्पादों, मोटे अनाज और स्वदेशी खाद्य सामग्री को प्राथमिकता दी जाएगी. साथ ही खाद्य तेलों के विवेकपूर्ण उपयोग को लेकर भी जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, जिसमें अधिकारी 5-5 परिवारों को प्रेरित करेंगे.
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, आईसीएआर, कृषि शिक्षा और लैंड रिसोर्सेज विभाग मिलकर संयुक्त रूप से जनजागरण अभियान चलाएंगे. अभियान का उद्देश्य केवल खेती की लागत घटाना नहीं, बल्कि मिट्टी संरक्षण, टिकाऊ खेती और विकसित भारत के संकल्प को मजबूत करना भी है.
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, देश में उर्वरकों का संतुलन तेजी से बिगड़ रहा है. वैज्ञानिक मानकों के अनुसार खेतों में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का आदर्श अनुपात 4:2:1 होना चाहिए, लेकिन वर्तमान में यह बढ़कर 9.3:3.5:1 तक पहुंच गया है. यानी किसान जरूरत से दोगुने से ज्यादा यूरिया का इस्तेमाल कर रहे हैं.
वर्ष 2023-24 में भारत को 70.42 लाख मीट्रिक टन यूरिया आयात करना पड़ा, जिस पर करीब 21,600 करोड़ रुपये खर्च हुए. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान संतुलित उर्वरक उपयोग अपनाएं, तो मिट्टी की सेहत सुधरने के साथ यूरिया आयात पर निर्भरता भी घट सकती है.
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