‘प्यूल चीज़’ को माना जाता है दुनिया का सबसे महंगा पनीर (सांकेतिक तस्वीर), फोटो साभार: freepikआप सब ने कभी न कभी गधे के बारे में जरूर सुना होगा, इस जानवर का उपयोग माल ढोने के लिए किया जाता है. अक्सर इस जानवर के विषय में निगेटिव बातें ही कही जाती हैं. लेकिन, आपको यह जानकर हैरानी होगी की गधी के दूध से बने पनीर की कीमत 70 हजार से 1 लाख रुपये तक है, जिसे दुनिया के सबसे महंगे पनीर माना जाता है. दरअसल सार्बिया में पाए जाने वाली बाल्कन नस्ल की गधी के दूध से बनी पनीर को दुनिया की सबसे महंगी पनीर माना जाता है. इस पनीर की कीमत 10 ग्राम यानी एक तोला सोने से अधिक है. आइए जानते हैं इस पनीर में ऐसा क्या खास है जिसकी वजह से यह इतना कीमती है.
इस खास गधी के दूध का 1 किलो पनीर बनाने में 25 लीटर दूध लगता है. यह पनीर आम गधी नहीं बल्कि सर्बिया में पाई जाने वाली खास प्रजाती बाल्कन गधी के दूध से बनाई जाती है. इस पनीर का उत्पादन सर्बिया के जवासिका स्पेशल नेचर रिजर्व में किया जाता है. इसे बनाने में 60 फीसदी के करीब बाल्कन गधी का दूध और 40 फीसदी बकरी के दूध का इस्तेमाल किया जाता है और इसे अच्छे से प्रोसेस कर के बनाया जाता है.
ये भी पढ़ें:- Farming Tips: जायद के मौसम में करें इन फसलों की खेती, होगा मुनाफा
प्यूल चीज पनीर को बनाना काफी मुश्किल भरा काम है. क्योंकि इस पनीर को बनाने के लिए 25 किलो दूध की जरुरत होती है. लेकिन बाल्कन गधी एक बार में काफी कम दूध देती है. वहीं इस गभी के दूध को निकालने के लिए कोई मशीन भी न होने की वजह से हाथ से दूध निकालनी पड़ती है. इसके प्रोडक्शन कम होने और इसकी खास गुणों की वजह से ये पनीर इतना महंगा होता है. इस गधी के दूध की पनीर इतनी महंगी है कि 1 किलो पनीर के कीमतों में 15 ग्राम सोना खरीदा जा सकता है. इस पनीर की कीमत 70 हजार से 1 लाख रुपये किलो तक है.
इस पनीर की खास गुणों के वजह से इसकी डिमांड पूरी दुनिया में बहुत ज्यादा है. बता दें की इस गधी के दूध में ‘मां’ के दूध जैसा गुण होता है. इसके दूध और पनीर के सेवन से कई बीमारियों से भी छुटकारा मिलता है. इस गभी के दूध में कई पौष्टिक तत्व भी पाए जाते हैं. अगर इसे अस्थमा और ब्रोंकाइटिस के रोगी इसका इस्तेमाल करें उनके लिए काफी फायदेमंद होगा. वहीं जिन लोगों को गाय के दूध या पनीर खाने से एलर्जी हो वो इस गधी के दूध का पनीर खा सकते हैं उनके लिए ये काफी फायदेमंद होगा.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today