
खेती अब फैक्ट्री की तरह ‘ऑन डिमांड’ होने लगी है, जिससे उत्पादन तो बढ़ रहा है लेकिन पोषण और मिट्टी की सेहत पर सवाल खड़े हो रहे हैं. इसी विषय को लेकर कानपुर स्थित ICAR-ATARI (आटारी कैंपस) में सरसों की फसल पर एक विशेष प्रयोग किया गया. यह प्रयोग संस्थान के डायरेक्टर डॉ. राघवेंद्र सिंह की देखरेख में संपन्न हुआ, जिसमें सरसों को तीन अलग-अलग तरीकों—प्राकृतिक, जैविक और रासायनिक विधि—से तैयार किया गया.
प्रयोग के दौरान पाया गया कि प्राकृतिक तरीके से तैयार की गई सरसों की फसल की लंबाई और घनत्व सबसे बेहतर था. फसल में किसी प्रकार के कीट का प्रभाव भी देखने को नहीं मिला. डॉ. राघवेंद्र सिंह ने मिट्टी की खुशबू के आधार पर बताया कि प्राकृतिक विधि वाली मिट्टी में विशेष प्रकार के लाभकारी बैक्टीरिया मौजूद थे, जो जमीन की सेहत सुधारने के साथ-साथ उत्पादन क्षमता भी बढ़ाते हैं.
जैविक विधि से तैयार की गई सरसों की फसल में मिट्टी की खुशबू अपेक्षाकृत कम पाई गई और पौधों की वृद्धि भी प्राकृतिक विधि की तुलना में थोड़ी धीमी रही. हालांकि यह रासायनिक खेती से बेहतर स्थिति में देखी गई.
रासायनिक विधि से उगाई गई सरसों की फसल न तो घनी थी और न ही उसकी लंबाई संतोषजनक रही. सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि मिट्टी में किसी भी प्रकार के जीवाणु सक्रिय नहीं पाए गए. इससे यह संकेत मिलता है कि भले ही रासायनिक खेती तात्कालिक उत्पादन दे रही हो, लेकिन यह मिट्टी की सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचा रही है.
विशेषज्ञों का मानना है कि जब मिट्टी बीमार होती है तो उससे उत्पन्न फसल भी पोषण की दृष्टि से कमजोर होती है. लंबे समय तक रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से न केवल भूमि की उर्वरता घटती है, बल्कि इसका असर मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है.
डॉ. राघवेंद्र सिंह ने इस शोध के माध्यम से किसानों के बीच फैले इस भ्रम को तोड़ने का प्रयास किया कि प्राकृतिक खेती में उत्पादन कम होता है. प्रयोग के नतीजों से स्पष्ट हुआ कि प्राकृतिक विधि से न केवल उत्पादन बेहतर मिलता है, बल्कि पौधों की वृद्धि, मिट्टी की गुणवत्ता और समग्र पारिस्थितिकी तंत्र भी मजबूत होता है.
यह प्रयोग इस बात की पुष्टि करता है कि यदि प्राकृतिक तरीके से फसलों का उत्पादन किया जाए तो देश की मृदा सेहत सुधरेगी और लोगों को अधिक पोषणयुक्त अनाज मिलेगा. आने वाले समय में यह मॉडल किसानों के लिए लाभकारी और टिकाऊ विकल्प साबित हो सकता है.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today