AI की सटीक भविष्यवाणी से बदली भारत की खेती, अब डेटा के आधार पर फैसले ले रहे किसान

AI की सटीक भविष्यवाणी से बदली भारत की खेती, अब डेटा के आधार पर फैसले ले रहे किसान

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में एक सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी ने बताया कि अब एआई की मदद से खेती में किसानों के लिए मौसम का अनुमान लगाना ज्यादा सही हो गया है.

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AI की सटीक भविष्यवाणी से बदली भारत की खेती, अब डेटा के आधार पर फैसले ले रहे किसानAI की सटीक भविष्यवाणी से बदली खेती

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में एक सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी ने बताया कि अब एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से खेती में किसानों के लिए मौसम का अनुमान लगाना ज्यादा सही हो गया है.इसी वजह से किसान अब सरकारी मौसम पूर्वानुमानों पर भरोसा करके खेती से जुड़े फैसले लेने लगे हैं. ऐसे में सरकार अब आगे चलकर मौसम के साथ-साथ बाजार भाव और फसलों की आवक जैसी जानकारियों को भी इन पूर्वानुमानों में जोड़ना चाहती है, ताकि किसान बेहतर और समझदारी से फैसले ले सकें.

AI से मिली मौसम की सटीक जानकारी

उन्होंने बताया कि हमने भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 100 वर्षों के मौसम डेटा का उपयोग कर एक AI मॉडल तैयार किया है, जिसकी मदद से एक सप्ताह और एक महीने पहले मॉनसून की भविष्यवाणी की गई और ये अनुमान काफी सटीक साबित हुए. इस संदर्भ में पहले सुंदर पिचाई भी मौसम पूर्वानुमान को लेकर बात कर चुके हैं. उन्होंने कहा कि अब किसान इन पूर्वानुमान मॉडलों के आधार पर बुवाई और सिंचाई जैसे अहम फैसले लेने लगे हैं.

सरकार अब इन पूर्वानुमानों के दायरे को और व्यापक बनाने की योजना पर काम कर रही है, जिसमें मौसम के साथ-साथ बाजार की स्थिति, फसलों की कीमतें और अन्य जरूरी जानकारियों को भी शामिल किया जाएगा, ताकि किसानों की निर्णय लेने की क्षमता बेहतर हो सके. इससे किसानों को खेती की लागत कम करने, उत्पादकता बढ़ाने और आमदनी में सुधार करने में मदद मिलेगी.

AI से प्याज, आलू और टमाटर की कीमतों का अनुमान

सूत्रों के अनुसार, कृषि मंत्रालय ने दलवाई समिति की सिफारिशों के आधार पर AI का इस्तेमाल करके प्याज, आलू और टमाटर जैसी जरूरी फसलों की कीमतों का अनुमान लगाने की कोशिश की थी. इसका मकसद ये था कि किसान और सरकार पहले से कीमतों का अंदाजा लगाकर सही फैसले ले सकें. लेकिन छोटे इलाकों और स्थानीय स्तर पर पुराने आंकड़ों में गड़बड़ी और असमानता होने की वजह से इस योजना को सही तरीके से लागू नहीं किया जा सका. विशेषज्ञों का मानना था कि यह कदम राजनीतिक रूप से भी जोखिम भरा हो सकता था, क्योंकि अगर सरकार या उसकी किसी एजेंसी द्वारा जारी अनुमान में 20–30 प्रतिशत तक का फर्क होता, तो इससे विवाद खड़ा हो सकता था.

भारत-विस्तार से मिलेगी मौसम की जानकारी

देवेश चतुर्वेदी ने यह भी बताया कि भारत-विस्तार प्लेटफॉर्म के जरिए अभी किसानों तक मौसम की जानकारी, आईसीएआर की फसल संबंधी सलाह, कीट प्रबंधन की जानकारी, मंडियों में बिकने वाले उत्पादों के बाजार भाव और केंद्र सरकार की योजनाओं की जानकारी पहुंचाई जा रही है, ताकि किसान सही समय पर सही निर्णय ले सकें.

कृषि में एआई के क्या हैं महत्व और फायदे

कृषि में एआई के महत्व पर बात करते हुए देवेश चतुर्वेदी ने कहा कि इससे “डिजिटल लालफीताशाही” खत्म करने में मदद मिलेगी. पहले मंत्रालय के अलग-अलग विभागों की जानकारी कई वेबसाइटों और प्लेटफॉर्म पर होती थी, जिससे किसानों को सही जानकारी पाने के लिए कई वेबसाइट और ऐप खोलने पड़ते थे. यह किसानों के लिए काफी मुश्किल भरा काम था. लेकिन एआई और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अब सारी जरूरी जानकारी एक ही जगह पर आसानी से उपलब्ध कराई जा सकेगी.

इसी दिशा में शिवराज सिंह चौहान ने 17 फरवरी को जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में ‘भारत विस्तार’ योजना का उद्घाटन किया था. इस दौरान किसान-केंद्रित एआई हैकाथॉन और कृषि कोष एआई रणनीति रोडमैप भी लॉन्च किया गया. इससे पहले निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को अपने बजट भाषण में ‘भारत विस्तार’ योजना की घोषणा की थी. इस पहल का उद्देश्य तकनीक के जरिए किसानों को एक ही प्लेटफॉर्म पर सारी जरूरी जानकारी उपलब्ध कराना और खेती से जुड़े फैसलों को आसान बनाना है.

एग्रीस्टैक से जोड़ा जाएगा भारत-विस्तार का AI

केंद्रीय कृषि सचिव ने बताया कि भारत-विस्तार का एआई आधारित लॉन्च इसका पहला चरण है, जिसे आगे चलकर एग्रीस्टैक से जोड़ा जाएगा. एग्रीस्टैक में किसानों की पहचान से जुड़ा पूरा डेटा सुरक्षित रखा जा रहा है. उन्होंने कहा कि अगले छह महीनों में किसान अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर से एक हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके एआई तकनीक के जरिए खेती से जुड़ी समस्याओं का समाधान पा सकेंगे। जैसे ही किसान कॉल करेगा, सिस्टम अपने आप उसकी जमीन का आकार, उगाई गई फसलें, खरीदे गए उर्वरक और दूसरी जानकारियां पहचान लेगा और उसी के अनुसार सही सलाह देगा.

भारत-विस्तार पर मिलेगी और 9 भाषाओं में जानकारी

देवेश चतुर्वेदी फिलहाल भारत-विस्तार को हिंदी और अंग्रेजी में लॉन्च किया गया है, लेकिन आने वाले समय में इसमें सभी क्षेत्रीय भाषाओं को जोड़ा जाएगा. लक्ष्य है कि अगले छह महीनों में इसमें 9 और भाषाएं शामिल की जाएं. इस प्लेटफॉर्म पर किसानों को मंडी के भाव, मौसम की जानकारी, केंद्र सरकार की योजनाएं, किसी योजना में आवेदन की स्थिति, और आईसीएआर के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किए गए ‘पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज’ (खेती के वैज्ञानिक तरीके) की जानकारी भी मिलेगी. इसके साथ ही हेल्पलाइन नंबर की सुविधा होगी. किसान इसे सीधे एंड्रॉयड ऐप के रूप में डाउनलोड कर सकते हैं या वेबसाइट के जरिए भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. यानी अब किसानों को खेती से जुड़ी हर जरूरी जानकारी और सलाह एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आसानी से मिलने लगेगी.

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