ऑर्गेनिक गन्ने ने बदली किसान की तकदीर, बाजार में मिल रहा चार गुना ज्यादा रेट

ऑर्गेनिक गन्ने ने बदली किसान की तकदीर, बाजार में मिल रहा चार गुना ज्यादा रेट

गन्ने की मिठास सबको पसंद है. वहीं बाजार में बिकने वाले ऑर्गेनिक गुड़ की मांग दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. ऐसे में अब गन्ने की जैविक खेती भी तेजी से बढ़ रही है, जिससे किसानों को अच्छा फायदा हो रहा है. पढ़‍िए एक ऐसे ही एक किसान की कहानी जिसकी कमाई चार गुना बढ़ गई है...

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ऑर्गेनिक गन्ने ने बदली किसान की तकदीर, बाजार में मिल रहा चार गुना ज्यादा रेट

उत्तर प्रदेश देश में गन्ना उत्पादन के मामले में पहले नंबर पर है, लेकिन अब इसी प्रदेश का एक किसान अपनी अनोखी खेती पद्धति और मार्केटिंग रणनीति से नई मिसाल कायम कर रहा है. फिरोजाबाद जिले के बाबई गांव निवासी सचिन राजपूत गन्ने को सरकारी रेट से चार गुना अधिक कीमत पर बेचकर अच्छी कमाई कर रहे हैं.

मसूर के साथ गन्ने की खेती

सचिन राजपूत पारंपरिक तरीके से हटकर गन्ने की खेती मसूर के साथ करते हैं. इस इंटरक्रॉपिंग मॉडल से जमीन की उर्वरता बनी रहती है और अतिरिक्त आय का स्रोत भी तैयार होता है. मसूर की फसल से जहां अलग से कमाई होती है, वहीं गन्ने की पैदावार पर भी सकारात्मक असर पड़ता है.

पूरी तरह जैविक खेती

सचिन रासायनिक खाद और कीटनाशकों से दूरी बनाकर पूरी तरह जैविक विधि से गन्ने की खेती करते हैं. गोबर की खाद, जीवामृत और प्राकृतिक घोल का उपयोग कर वे लागत घटाते हैं और गुणवत्ता बढ़ाते हैं. यही वजह है कि उनके गन्ने की बाजार में अलग पहचान बन गई है.

400 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन

सचिन राजपूत प्रति एकड़ लगभग 400 क्विंटल तक गन्ने का उत्पादन ले रहे हैं. गर्मियों के मौसम में वे अपना गन्ना सीधे बाजार में बेचते हैं, जहां उन्हें ₹1600 प्रति क्विंटल तक कीमत मिल जाती है, जो सामान्य सरकारी रेट से करीब चार गुना अधिक है.

4 एकड़ में मजबूत आमदनी

वर्तमान में वे 4 एकड़ में गन्ने की खेती कर रहे हैं और हर साल अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं. इसके अलावा आलू की खेती से भी उन्हें अतिरिक्त मुनाफा मिलता है.

“खेती के साथ मार्केटिंग भी जरूरी”

सचिन का मानना है कि आज के दौर में किसान को सिर्फ उत्पादन पर नहीं, बल्कि मार्केटिंग पर भी ध्यान देना होगा. अगर किसान अपनी फसल को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाए और गुणवत्ता पर फोकस करे, तो वह अपनी आय को दो से तीन गुना तक बढ़ा सकता है. उनकी सफलता यह साबित करती है कि सही रणनीति, जैविक खेती और बेहतर विपणन से किसान अपनी किस्मत खुद बदल सकता है.

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