नांदेड़ के गांवों में पानी के लिए हाहाकारमहाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में बारिश की कमी के कारण जल संकट गंभीर होता जा रहा है. मराठवाड़ा और विदर्भ की सीमा पर बहने वाली पैनगंगा नदी का पानी लगभग सूख गया है. नदी से जुड़े 100 से ज्यादा गांवों में आने वाले दिनों में पीने के पानी की समस्या और बढ़ने की आशंका है. ग्रामीणों ने प्रशासन से डैम से तुरंत पानी छोड़ने की मांग की है. मराठवाड़ा और विदर्भ को जोड़ने वाली पैनगंगा नदी इस समय सूखी पड़ी है. नदी में पानी नहीं होने का सीधा असर आसपास के गांवों पर पड़ रहा है. नांदेड़ जिले के हिमायतनगर और हदगांव तहसील के करीब 75 गांवों के साथ विदर्भ के 44 गांव भी इस नदी और इससे जुड़े जल स्रोतों पर निर्भर हैं. नदी का पानी कम होने के कारण इन गांवों में आने वाले दिनों में पीने के पानी का संकट और गंभीर होने की आशंका है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द पानी का इंतजाम नहीं किया गया तो लोगों के साथ-साथ मवेशियों के लिए भी बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है.
पैनगंगा नदी पर बने इस्लापुर डैम से विदर्भ के 44 गांवों और नांदेड़ जिले के हिमायतनगर और हदगांव तहसील के करीब 75 गांवों को पानी की सप्लाई होती है. लेकिन नदी के तल में पानी सूखने से अब इस जल स्रोत पर भी दबाव बढ़ गया है. फिलहाल पैनगंगा नदी पर बने एक तालाब में कुछ पानी जमा है. इसी रुके हुए पानी से हिमायतनगर शहर में पानी की सप्लाई की जा रही है. ग्रामीणों के मुताबिक, यह पानी भी कुछ दिनों में खत्म हो सकता है. ऐसे में लोगों को अभी से आने वाले दिनों की चिंता सताने लगी है.
हिमायतनगर तहसील में करीब दो महीने से अच्छी बारिश नहीं हुई है. बारिश की कमी का असर गांवों के जल स्रोतों पर साफ दिखाई दे रहा है. कई कुएं और नदियां सूख चुकी हैं, जबकि कई जगह बोरवेल में भी पानी नहीं बचा है. ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में पानी की कमी के कारण फसलों को भी भारी नुकसान हुआ है. सोयाबीन, कपास और गन्ने जैसी फसलें प्रभावित हुई हैं. किसानों के सामने एक तरफ फसल खराब होने का नुकसान है तो दूसरी तरफ पीने के पानी की समस्या बढ़ती जा रही है.
पानी की कमी का असर सिर्फ लोगों पर ही नहीं, बल्कि मवेशियों पर भी पड़ रहा है. गांवों में जानवरों के पीने के लिए भी पर्याप्त पानी नहीं है. कई ग्रामीणों को दूर-दराज के इलाकों से पानी लाना पड़ रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर अभी पानी की यह स्थिति है तो आने वाले महीनों में समस्या और गंभीर हो सकती है. सर्दियों की शुरुआत में ही जल स्रोत सूखने लगे हैं, इसलिए लोगों को गर्मियों की चिंता सताने लगी है.
हिमायतनगर और हदगांव क्षेत्र के ग्रामीणों ने प्रशासन से इस्लापुर डैम से तुरंत पानी छोड़ने की मांग की है. किसानों और ग्रामीणों का कहना है कि सबसे पहले लोगों और मवेशियों के पीने के पानी की व्यवस्था की जानी चाहिए. प्रभावती माने समेत स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इस गंभीर स्थिति पर तुरंत ध्यान देने की अपील की है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते डैम से पानी नहीं छोड़ा गया और दूसरे स्रोतों से पानी की व्यवस्था नहीं हुई तो आने वाले दिनों में गांवों में पानी के लिए बड़ी परेशानी हो सकती है.
बारिश नहीं होने से किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं. खेतों में नमी की कमी के कारण सोयाबीन जैसी फसलों को नुकसान हुआ है. कपास और गन्ने की फसल पर भी पानी की कमी का असर पड़ा है. किसानों का कहना है कि फसल खराब होने से पहले ही आर्थिक नुकसान हो चुका है. अब अगर पीने के पानी की समस्या भी बढ़ती है तो ग्रामीण परिवारों और पशुपालकों के लिए स्थिति और मुश्किल हो जाएगी.
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कई जगह हालात 1972 के सूखे से भी ज्यादा खराब नजर आ रहे हैं. गांवों में कुएं, बोरवेल और नदी-नाले सूखने लगे हैं. लोगों के मुताबिक, अनाज का किसी तरह इंतजाम किया जा सकता है, लेकिन पीने के पानी का कोई विकल्प नहीं है. ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर जल स्रोत पूरी तरह सूख गए तो इंसानों और जानवरों के लिए पीने का पानी कहां से आएगा.
स्थानीय लोगों को डर है कि अगर सर्दियों की शुरुआत में ही पानी की इतनी कमी हो गई है तो गर्मियों में स्थिति और गंभीर हो सकती है. इसलिए ग्रामीण चाहते हैं कि प्रशासन अभी से पानी की व्यवस्था शुरू करे. लोगों की मांग है कि डैम से जरूरत के मुताबिक पानी छोड़ा जाए और गांवों में टैंकर या दूसरे माध्यमों से भी पीने का पानी उपलब्ध कराया जाए. ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने अगर समय रहते कदम उठाया तो आने वाले दिनों में बड़े जल संकट को रोका जा सकता है. (कुंवरचंद मलकुलाल मंडले का इनपुट)
ये भी पढ़ें:
कपास खरीद शुरू नहीं होने से भड़के किसान, खरगोन मंडी में तालाबंदी, प्रदर्शन के दौरान किसान की मौत
कपास से किसानों की कमाई तक... क्यों खास है World Cotton Day? जानिए पूरी कहानी
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today