NABARD की अनोखी पहलग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक बुनियादी सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) और महाराष्ट्र सरकार की कंपनी महात्मा फुले रिन्यूएबल एनर्जी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर टेक्नोलॉजी लिमिटेड (MAHAPREIT) ने एक समझौता किया है. इस समझौते के तहत गांवों में सौर ऊर्जा, बायोगैस, जलवायु के अनुकूल बुनियादी ढांचा और अन्य हरित परियोजनाओं (Green Energy Program) पर काम किया जाएगा. इसकी शुरुआत महाराष्ट्र से होगी, लेकिन आगे चलकर देश के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी ऐसी परियोजनाएं शुरू की जा सकती हैं.
इस समझौते के बाद दोनों संस्थाएं मिलकर ऐसे प्रोजेक्ट तैयार करेंगी, जिनसे गांवों में रहने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें. खासतौर पर ग्राम पंचायतों, पंचायती राज संस्थाओं और ग्रामीण सार्वजनिक संस्थानों में हरित ऊर्जा से जुड़े काम किए जाएंगे. इसका उद्देश्य गांवों में विकास के साथ-साथ पर्यावरण की भी सुरक्षा करना है.
शुरुआत में जिन योजनाओं पर काम होगा, उनमें सौर ऊर्जा परियोजनाएं, सरकारी भवनों में बिजली की बचत और कार्बन उत्सर्जन कम करने के उपाय, ग्राम पंचायतों के बुनियादी ढांचे का विकास और पानी की पंपिंग योजनाओं में स्वच्छ ऊर्जा का इस्तेमाल शामिल है.
इसके अलावा सरकारी अस्पतालों, जिला अस्पतालों, तकनीकी शिक्षा संस्थानों और ग्रामीण इलाकों में लोगों को सेवाएं देने वाले अन्य सरकारी संस्थानों में भी स्वच्छ ऊर्जा से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जाएंगी.
इस योजना के तहत फसल के बचे हुए अवशेष और अन्य जैविक सामग्री का उपयोग कर बायोगैस और बायोएनर्जी उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा. इससे किसानों को कृषि अवशेषों से अतिरिक्त आय कमाने का अवसर मिल सकता है. साथ ही खेतों में पराली जलाने जैसी समस्याओं को कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है.
समझौते के तहत गांवों में सौर ऊर्जा से चलने वाले छोटे कोल्ड स्टोरेज भी बनाए जाएंगे. इनका इस्तेमाल फल, सब्जियों, दूध और अन्य जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पादों को सुरक्षित रखने के लिए किया जाएगा. इससे किसानों को अपनी उपज लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी और नुकसान कम होगा.
इस पहल का उद्देश्य केवल नई परियोजनाएं शुरू करना नहीं है, बल्कि गांवों में ऐसी सुविधाएं विकसित करना है जो लंबे समय तक उपयोगी रहें और पर्यावरण को भी नुकसान न पहुंचाएं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये योजनाएं सफल होती हैं तो इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़ेगा, किसानों को नए अवसर मिलेंगे और गांवों का विकास भी तेज होगा.
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